टीम एबीएन, रांची। सूर्य नमस्कार महाअभियान में सत्यानन्द योग मिशन ने अपनी संस्था और डीएवी संस्थान के साथ पैंतीस हजार सूर्यनमस्कार को पूर्ण किया। आज डीएवी पुंदाग, डीएवी हेहल, डीएवी गांधीनगर, निरजा सहाय डीएवी कांके और डीएवी बरियातू में सैकड़ों शिक्षक, हजारों विद्यर्थियों एवं उनके अभिभावक ने स्वामी मुक्तरथ जी के दिशानिर्देश में बड़े उत्साह के साथ सूर्यनमस्कार किया। डीएवी नीरजा सहाय के प्राचार्य टीके मिश्रा ने सूर्य नमस्कार अभ्यास में बढ़-चढ़ कर रुचि दिखाई। डीएवी बरियातू के प्राचार्य विनय कुमार पांडेय ने कहा कि योग हमारी संस्कृति है जो हमे एक कर्तव्यनिष्ठ और जिम्मेवार नागरिक बनाता है। आचार्य मुक्तरथ शिक्षक और आॅनलाइन जुड़े सैकड़ों बच्चे एवं उनके अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि सूर्य नमस्कार, नाड़ीशोधन प्राणायाम और भ्रामरी प्राणायाम बच्चों को सात वर्ष के उम्र से प्रारंभ कर देना चाहिये। यह तीनों क्रिया करते रहने से जीवन के विपरीत और प्रतिकूल परिस्थितियों से भी आप आसानी से सामना कर सकते हैं। भारत वर्ष में बच्चों का 7-8 वर्ष में उपनयन संस्कार किया जाता था जिसमें मुख्य रूप से ब्राह्मण लोग, गुरुजन उस वक्त सूर्यनमस्कार, नाड़ीशोधन प्राणायाम और गायत्री मंत्र सिखाते थे। उपनयन का वैज्ञानिक पहलू भी यही है ताकि बच्चों का पिनियल ग्रंथि सक्रिय रहे। पिनियल ग्रंथि मेमोरी पावर और कॉन्स्ट्रेशन को बढ़ाने वाली ग्रन्थि है। इसके क्षय होते ही मस्तिष्क में उत्तेजना बढ़ना शुरू हो जाता है। तब तक यौन हार्मोन सक्रिय होने लगता है और मन में बहुत दिवास्वप्न आने लगते हैं,बच्चे खुद को समझ नहीं पाते हैं और यहाँ असंतुलन जैसी स्थिति आने लगती है। आचार्य मुक्तरथ जी ने कहा भारत में यदि लोग योग के इन तीन प्रमुख क्रियाओँ को नियमित करेंगे तो मधुमेह और हृदय रोग पर पूरी तरह से नियंत्रण पाया जा सकता है। उक्त जानकारी सत्यानंद योग मिशन रांची के अध्यक्ष आचार्य मुक्तरथ ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
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