एबीएन सोशल डेस्क। यज्ञीय अनुष्ठान विधान में शांतिकुंज हरिद्वार के प्रतिनिधिमंडल द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार पाठ व जयघोष विधान से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा। आज भी गायत्री महामंत्र का गुरु दीक्षा संस्कार 60 जनों ने ली। साथ ही दर्जनों ने जन्मदिन संस्कार, पुंसवन संस्कार, नामकरण संस्कार, विद्यारंभ संस्कार, अन्नप्राशन संस्कार अधिकाधिक ने लिये। यज्ञ स्थल पर आज भी बीपी, नेत्र जांच, चिकित्सा शिविर का भी आयोजन नि: शुल्क रहा।
श्रद्धालुओं ने इस सेवा का खूब लाभ उठाया। पर्यावरण संरक्षण हेतु महायज्ञ में आयें हुए सभी आज भी श्रद्धालुओं को एक-एक वृक्ष भेंट के रूप में गायत्री परिवार के भाई-बहन ने प्रदान किया। संध्याकालीन सत्र में गायत्री दीपयज्ञ विधान हुआ। दीपयज्ञ के महत्वपूर्ण सूत्रों के अर्थ के भावार्थ में संतोष कुमार संगम ने बताया कि मनुष्य को वही करना चाहिए जिससे सबका हित हो।
कहा कि विचारों को संयमित करने के लिए उन्हें किसी उद्देश्य से जोड़ देने चाहिए। मनुष्य का जीवन ही प्रत्यक्ष देवता है। जीवन देवता की उपासना का फल इसी लोक में मिल जाता है। आगे प्रज्ञा पुराण कथामृतम अंतर्गत संयमशीलता, कर्तव्य परायणता और उदार भक्ति भावना प्रकरण आदि अनेक विषय पर प्रकाश विस्तार से प्रकाश डाला।
युग निर्माण योजना, विचार क्रांति के प्रणेता सृजेता परमपूज्य श्रीगुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के अच्छे विचारों से बुरे विचारों के काट, इस युग के वैचारिक प्रदूषण और उनसे उपजी समस्याओं के समाधान व निपटान अंतर्गत, ग्राम तीर्थ योजना अंतर्गत व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण, समाज कल्याण व राष्ट्रीय कल्याण के साथ याज्ञवल्क्य ऋषि यज्ञीय विधान के ज्ञान विज्ञान पर, परम पूज्य के लेखन गायत्री महाविज्ञान और कथन भारतीय संस्कृति के निर्माता यज्ञ पिता गायत्री माता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कथाएं मानव जीवन को बहुत प्रभावित करती हैं।
अंत में आरती उपरांत शांति-पाठ व सर्व मंगलाय वंदना सहित जयघोष कर समापन हुआ। उक्त जानकारी गायत्री परिवार महिला मंडल शाखा हरमू हाउसिंग कॉलोनी, रांची के जय नारायण प्रसाद और कुणाल कुमार ने दी।
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