एबीएन एडिटोरियल डेस्क (डॉ मेरी ग्रेस)। अब कोरोना का तीसरा लहर अप्रत्याशित है। इस लहर में भी परीक्षा कोरोना के नियमों का पालन करते हुए सही समय पर हो यह आवश्यक है। लेकिन यह तीसरा साल है जब छात्रों व शिक्षक का सीधा संवाद कम हो रहा है। ऐसे में छात्रों की शिक्षा और परीक्षा के साथ उनके करियर के अतिरिक्त बल, मनोबल की आवश्यकता है। आज छात्र शिक्षक, अभिभावक या काउंसलर से अपने भविष्य के बारे में बात करने लगते हैं। वह चुने हुए क्षेत्र में ही करियर बनाना चाहते हैं। यह अच्छी बात है लेकिन उनके जीवन में व्यावसायिक डिग्री लेने के लिए छह से दस वर्ष का समय महत्वपूर्ण होता है। इन वर्ष में ही उनका वास्तविक करियर बनता है। इसमें वे संबंधित संस्थान, करियर और डिग्री लेते हैं। इसके बाद वे जॉब्स में जाते हैं या अपना व्यापार करते हैं। आज एक से एक रोजगार और करियर की संभावना बन रही है। प्रचलित क्षेत्र जैसे मेडिकल, इंजीनियरिंग, सिविल सर्विस, सहित रिटेल, आईटी और अन्य कई परम्परागत और नए करियर की संभावनाए सामने हैं। करियर की भरमार है और बेहतर शिक्षण संस्थान भी है जो पढ़ाई के साथ प्लेसमेंट भी कराते हैं। आवश्यकता है कि दसवीं के बाद से ही उन संस्थानों और करियर की जानकारी लेना आंरभ करे दे। आज इंटरनेट पर सभी जानकारी उपलब्ध है। हर समाचार पत्र और मैग्जीन इसकी सूचना देते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि वे इस बात की जांच कर लें कि जिस संस्थान में काम कर रहे हैं उनकी मान्यता है या नहीं। जान बूझकर भी गलत जानकारी दी जाती है। विज्ञापन से भ्रमित होने से बचे और अपने स्रोतों से भी संस्थानों के बारे में जानकारी हासिल कर लें जिससे उनका करियर सुरक्षित रहे और बेहतर बने। इससे समय और धन दोनों का सदुपयोग हो पाता है और करियर बेहतर बनता है। मानसिक शक्ति कितना जरुरी : अंग्रेजी में एक शब्द है मेंटल कमिटमेंट। इसे हम हिंदी में मानसिक शक्ति भी कहते है। यह सफलता के लिए बेहद आवश्यक गुण है। अगर आपमें मानिकस शक्ति, या ठहराव नहीं है तो आप लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकते। आखिर यह मेंटल कमिटमेंट है क्या? मेरे कार्यालय में जब हम दोपहर में भोजन करते हैं तब हमारे मुस्लिम सहयोगी हमारे साथ होने के बाद भी एक बूंद पानी तक नहीं पीते हैं उनकी भोजन में कोई रूचि नहीं होती है। उनकी खाने के प्रति जो रोजा के दिनों में अरूचि होती है वह मेंटल कमिटमेंट का एक बड़ा उदाहरणहै। यह कमिटमेंट शतप्रतिशत होना चाहिए यानि 100 प्रतिशत। अगर हमारी दृढ़ता में दो प्रतिशत की कमी हो जाए और यह 98 प्रतिशत भी जो जाए तो परिणाम में भारी अंतर आ जाएगा। अगर आप अपनी दृढ़ता से समझौता करेंगे तो आप कभी भी सफल नहीं हो सकते हैं। अगर यही हाल रहा और बार-बार आप अपने कमिटमेंट से समझौता करते रहे तो परिणाम शून्य हो जाएगा। जिनकी मानसिक शक्ति उच्च शिखर पर होती है विपरीत स्थिति में यही मानसिक शक्ति उनके जीवन में बड़ा काम का साबित होता है। जिस प्रकार रोजदार अपने नियमों के प्रति दृढता के साथ होता है वैसे हम सभी को अपनी सफलता के लिए दृढ़ रहना चाहिए। यह दृढ़ता सौ प्रतिशत होना चाहिए। सौ फिसदी दृढ़ता और 99 प्रतिशत दृढ़ता में अंतर होता है। विशेषकर युवाओं को अपने जीवन में उंचें सपने पालते हैं उन्हें यह बात समझ लेना चाहिए कि आपने अगर एक बार भी समझौता किया तो संभव है कि आपको बार-बार समझौता करना होगा। (लेखक उर्सूलाइन इंटर कॉलेज की प्राचार्या हैं।)
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse