एबीएन डेस्क (अवंतिका राज चौधरी)। स्टार्टअप्स जैसे-जैसे लोगों की सोच में परिवर्तन आता है, वैसे युग परिवर्तित होता है। आज के युग में लोग स्टार्टअप की सोच के साथ सामने आ रहे हैं। आज के युवा अपनी अच्छी खासी पैकेज वाले नौकरियों को त्याग कर स्टार्टअप करने की ओर आगे बढ़ रहे हैं। स्टार्टअप बिजनेस करने का एक नया तरीका है। अपनी सोच से समाज में कुछ बदलाव लाने का प्रयास किया जाता है। यह कह सकते हैं कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने का स्टार्टअप एक अच्छा तरीका है। लोग अपनी विवेक, शिक्षा, बुद्धि का इस्तेमाल कर कम लागत में अधिक मुनाफा कमाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की स्टार्टअप इकाइयों को नये भारत का आधार-स्तंभ बताते हुए शनिवार को कहा कि सरकार ने 16 जनवरी को राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों के स्टार्टअप कारोबारियों को वर्चुअल तरीके से संबोधित करते हुए कहा, स्टार्टअप की यह संस्कृति देश के दूर-दराज क्षेत्रों तक पहुंचे, इसके लिए 16 जनवरी को अब राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया गया है। मोदी ने कहा, ह्यमैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आपके सभी सुझावों, विचारों और नवाचारों को सरकार से पूरा समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप नए भारत का आधार-स्तंभ बनेंगे और देश भारत के लिए नवोन्मेष और ह्यभारत से नवोन्मेष के मंत्र के साथ आगे बढ़ेगा। प्रधानमंत्री ने कहा, वर्ष 2013-14 में जहां चार हजार पेटेंट को स्वीकृति मिली थी, वहीं पिछले वर्ष इनकी संख्या 28 हजार से ज्यादा हो गई। उन्होंने कहा कि आज देश में 60,000 से अधिक स्टार्टअप इकाइयां हैं। इनमें से 42 यूनिकॉर्न (एक अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन) हैं। मोदी ने कहा, भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश सरकार की प्राथमिकता है। स्टार्टअप दिवस के मौके पर आज हम बात करने वाले हैं रांची के एक ऐसे ही स्टाटेअप कंपनी शिल्पकारी की। शिल्पकारी का शॉप रांची के पिस्का मोड़ के नारायण मार्केट में है। शिल्पकारी ऐसे सोच के साथ सामने आया, जिससे झारखंड की लुप्त होती संस्कृति का संरक्षण हो सके। शिल्पकारी के फाउंडर सेंट्रल यूनिवर्सिटी आॅफ झारखंड के छात्र अतुल शौर्य हैं। अतुल ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी आॅफ झारखंड से नैनोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई की है। शिल्पकारी एक ऐसा हैंडीक्राफ्ट शॉप है जहां झारखंड की लोक कला डोकरा, बंबू एंड वुड आर्ट, और सोहराय पेंटिंग पर काम किया जाता है ।यह सभी प्रोडक्ट आॅनलाइन व आॅफलाइन दोनों मोड से बिक्री किए जाते हैं। शिल्पकारी ना सिर्फ झारखंड तक सीमित है बल्कि यह देश के अन्य राज्यों तक भी अपनी प्रोडक्ट्स पहुंचाते हैं। शिल्पकारी से झारखंड के लगभग 800 शिल्पकार और कलाकार जुड़े हैं। यह स्थानीय लोगों के लिए भी रोजगार का एक जरिया है। शिल्पकारी ने सोहराय आर्ट को जीआई टैग दिलवाने में अहम भूमिका निभाई है। जीआई टैग, किसी उत्पाद का किसी दिए स्थान पर उत्पन्न होने के रूप में पहचान होता है। अतुल शौर्य ने शिल्पकारी की नींव जिस सोच के साथ रखी थी 3 साल बाद वह सही ट्रैक पर आगे बढ़ रही है। अतुल इसे और आगे तक ले जाना चाहते हैं अगले 5 सालों में यह शिल्पकारी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना चाहते हैं।
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