मकर संक्रांति : गंगा में 6.5 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

 

एबीएन डेस्क। संगम नगरी प्रयागराज में मकर संक्रांति के साथ माघ मेला शुक्रवार से प्रारंभ हो गया। कोरोना के बढ़ते मामलों और कड़ाके की ठंड के बावजूद शाम 6 बजे तक करीब 6.5 लाख लोगों ने यहां गंगा और संगम में डुबकी लगाई। एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी । मेला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि श्रद्धालुओं का भोर से ही मेला क्षेत्र में आगमन जारी है और शाम 6:00 बजे तक करीब 6.5 लाख लोगों ने गंगा में स्नान किया जिसमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी संजय खत्री, मेलाधिकारी शेषमणि पांडेय और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय कुमार ने मकर संक्रांति के स्नान पर्व पर वीआईपी घाट, संगम नोज, अरैल घाट सहित अन्य प्रमुख घाटों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारी ने बताया कि मेला क्षेत्र में 65,000 श्रद्धालुओं को मास्क वितरित किया गया। इस बीच, माघ मेले में अरैल क्षेत्र में स्थित एक छोटे तंबू (छोलदार) में गैस सिलेंडर लीक होने से आग लग गई जिससे क्षेत्र में अफरा तफरी मच गई। हालांकि आग पर तुरंत काबू पा लिया गया जिससे कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। अग्निशमन दल की अरैल इकाई के अग्निशमन अधिकारी राम कुमार रावत ने बताया कि करछना क्षेत्र के ग्रांम मुगारी निवासी बिट्टन देवी ने कल्पवास करने के लिए शिविर लगाया गया था। उन्होंने बताया कि सिलेंडर से गैस रिसाव होने के कारण अचानक आग लग गई और वहां रखे बिस्तर और कुछ कपडे तथा छोलदार का कुछ हिस्सा जल गया। मेला क्षेत्र में देश के कोने कोने से आने वाली भीड़ के बीच कोविड नियमों का पालन कराना मेला प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। ड्यूटी में आए कई पुलिसकर्मी मेला शुरू होने से पहले ही कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। हर वर्ष माघ मेला में शिविर लगाने वाले स्वामी अधोक्षजानंद ने मकर संक्रांति के महत्व के बारे में कहा, ज्योतिष की गणना में जो कालचक्र संचालित होता है, उसमें एक साल में सूर्य 12 राशियों में घूमता है और लगभग एक महीना प्रत्येक राशि में रहता है। उन्होंने कहा कि मकर राशि का अत्यधिक महत्व है और जब सूर्य मकर राशि में आते हैं, वह विश्व का उत्तम समय होता है क्योंकि यह उत्तरायण काल कहलाता है। उन्होंने बताया कि सूर्य छह माह दक्षिणायन रहते हैं और छह माह उत्तरायण रहते हैं और उत्तरायण का प्रारंभ मकर संक्रांति से होता है और यह हर कार्य के लिए शुभ माना जाता है। इससे पहले अधिकारी ने बताया कि मेला प्रशासन ने मेला क्षेत्र को पांच सेक्टरों में विभाजित किया है। इन सभी सेक्टरों में बसने वाली 3200 से अधिक संस्थाओं तथा शिविरों में निवास करने वाले लोगों को मेला क्षेत्र में 12 स्नान घाटों तक सुगमता पूर्वक आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पांच पंटून पुलों को तैयार किया गया है। अधिकारी ने बताया कि मेला क्षेत्र में आने वाले कल्पवासियों, श्रद्धालुओं एवं साधु-संतो को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 50 बेड के दो अस्पताल -गंगा एवं त्रिवेणी, 12 स्वास्थ्य शिविर एवं 10 उपचार केन्द्र तैयार किए गये हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी 16 प्रवेश द्वारों एवं पार्किंग स्थलों पर श्रद्धालुओं की थर्मल स्क्रीनिंग की गई।

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