आईआईएम रांची में हुई विचारोत्तेजक प्रमुख जन गोष्ठी

 

टीम एबीएन, रांची। रांची स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) परिसर में आज एक भव्य एवं विचारोत्तेजक प्रमुख जन गोष्ठी आयोजित की गयी। इस गरिमामयी कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों—शिक्षा, प्रशासन, चिकित्सा, मीडिया एवं सामाजिक जीवन—से जुड़े बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन सम्मिलित हुए। 

कार्यक्रम का प्रारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसके पश्चात अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया गया। प्रारंभिक संबोधन में राजीव कमल बिट्टू, प्रांत संपर्क प्रमुख ने इस गोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना समय की आवश्यकता है, ताकि राष्ट्र निर्माण में सभी की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित हो सके। 

अपने विस्तृत और प्रेरणादायी उद्बोधन में सुनील आंबेकर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्षों की यात्रा, उसकी कार्यपद्धति, विचारधारा एवं समाज में उसकी भूमिका पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्ष 1925 में विजयादशमी के पावन अवसर पर एक छोटे से प्रयास के रूप में प्रारंभ हुआ संघ आज एक विशाल सामाजिक-सांस्कृतिक शक्ति के रूप में विकसित हो चुका है। 

उन्होंने बताया कि संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के साथ ही पूरे देश में उसके कार्य और विचार को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। पहले जहां संघ के बारे में जानकारी सीमित दायरे में ही रहती थी, वहीं आज समाज का सामान्य नागरिक भी संघ के सकारात्मक पक्ष को जानने और समझने के लिए उत्सुक है। उन्होंने कहा कि देशभर में आयोजित हो रहे ऐसे कार्यक्रमों में विभिन्न पृष्ठभूमियों के लोग बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं और संघ के विचार को प्रत्यक्ष रूप से समझने का प्रयास कर रहे हैं। 

श्री आंबेकर ने कहा कि संघ केवल एक संगठन नहीं है, बल्कि यह एक अनुभूति का विषय है। उन्होंने वर्तमान सरसंघचालक के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ को शब्दों में पूर्ण रूप से व्यक्त करना कठिन है, इसे अनुभव के माध्यम से ही समझा जा सकता है। उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और उनके राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत व्यक्तित्व का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि डॉ हेडगेवार जन्म से ही राष्ट्र के प्रति समर्पित थे। बाल्यकाल से ही उनके मन में देशभक्ति की भावना प्रबल थी। 

उन्होंने अंग्रेजों के शासनकाल में भारतीय समाज और संस्कृति पर पड़े प्रभाव को निकट से देखा और अनुभव किया, जिससे उनके मन में राष्ट्र के पुनर्निर्माण का संकल्प जागृत हुआ। उन्होंने आगे बताया कि डॉ हेडगेवार ने अपने जीवन के अनुभवों से यह निष्कर्ष निकाला कि भारत की पराधीनता का मुख्य कारण समाज की असंगठित स्थिति थी। जाति, पंथ, भाषा और क्षेत्र के आधार पर विभाजित समाज को संगठित किये बिना राष्ट्र की स्वतंत्रता और उन्नति संभव नहीं है। 

इसी विचार के आधार पर उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की, जिसका मूल उद्देश्य समाज को संगठित करना और राष्ट्र को सशक्त बनाना है। 
श्री आंबेकर ने संघ की कार्यपद्धति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ ने व्यक्ति निर्माण को केंद्र में रखा है। शाखा के माध्यम से अनुशासन, संस्कार, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित की जाती है। 

आज देशभर में हजारों शाखाएं संचालित हो रही हैं, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रही हैं। उन्होंने कहा कि संघ ने हमेशा सामान्य व्यक्तियों की शक्ति पर विश्वास किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाज परिवर्तन के लिए किसी विशेष वर्ग या व्यक्तियों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है। 

अपने उद्बोधन में उन्होंने पंच परिवर्तन के संकल्प का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर समाज के समक्ष पांच महत्वपूर्ण विषयों को रखा गया है : कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध, नागरिक कर्तव्य बोध। उन्होंने बताया कि कुटुंब प्रबोधन के अंतर्गत परिवार को संस्कारों का केंद्र बनाने पर बल दिया गया है, जहां बच्चों में नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों का विकास हो। 

सामाजिक समरसता के माध्यम से जाति और भेदभाव से ऊपर उठकर एकता और बंधुत्व की भावना को सुदृढ़ करने का आह्वान किया गया है। पर्यावरण संरक्षण के विषय में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जीवनशैली को प्रकृति के अनुकूल बनाना अत्यंत आवश्यक है। जल, वन, भूमि और ऊर्जा के संतुलित उपयोग से ही सतत विकास संभव है। 

स्व के बोध पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों के प्रति गर्व की भावना विकसित करना आवश्यक है। साथ ही नागरिक कर्तव्य बोध के अंतर्गत प्रत्येक व्यक्ति को अपने दायित्वों के प्रति सजग रहकर समाज और राष्ट्र के हित में कार्य करने का संकल्प लेना चाहिए। 

उन्होंने यह भी कहा कि संघ केवल तात्कालिक मुद्दों पर कार्य करने वाला संगठन नहीं है, बल्कि यह दीर्घकालिक दृष्टि से राष्ट्र निर्माण में लगा हुआ है। संघ का कार्य शताब्दियों की योजना के साथ चलता है और इसका उद्देश्य एक सशक्त, संगठित और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण करना है। 

कार्यक्रम में प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा जी गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ायी। इसके अतिरिक्त समाज के विभिन्न क्षेत्रों से अनेक प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित रहे, जिनमें दीपक श्रीवास्तव (निदेशक, ककट), प्रो. एस. पी. अग्रवाल (कुलपति, साईं नाथ विश्वविद्यालय), डॉ. गोपाल पाठक, सुनील बादल (संपादक, राष्ट्रीय नवीन मेल), सुमन श्रीवास्तव, संजय कुमार, डॉ. अजीत सिन्हा, डॉ. रश्मि, डॉ. जिज्ञासा ओझा, पिंकी खोया, राजीव कमल बित्तू, डॉ. त्रिवेणी नाथ साहू, डॉ. सहदेव राम, डॉ. डी. के. सिंह (कुलपति, खवळ), मंटू कुमार (विभाग प्रचारक), विशाल कुमार(महानगर प्रचारक), दीपक पांडेय (महानगर कार्यवाह) विजय कुमार ( प्रांत सह प्रचार प्रमुख), स्निग्ध कुमार रंजन (महानगर प्रचार प्रमुख), रवींद्र (महानगर संपर्क प्रमुख), संतोष कुमार, रवि भूषण, डॉ ज्योति प्रकाश सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की सहभागिता रही। 

कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित जनों ने विभिन्न विषयों पर अपने प्रश्न रखे और सुझाव प्रस्तुत किये। आंबेकर ने सभी प्रश्नों का सरल एवं सारगर्भित उत्तर देते हुए संवाद को और अधिक सार्थक बनाया।

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse