एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। रमजान महीना के 30 रोजा पूर्ण करने के बाद ईद का त्यौहार मनाया जाता है। रमजान अपने आराध्य अल्लाह के प्रति समर्पण, प्रार्थना, संयम (उपवास) और आत्म-शुद्धि का महीना होता है।
पूरे एक महीना तक रोजा का व्रत रखते हुए रोजेदार अपनी शारीरिक, मानसिक और जज्बात के ऊपर नियंत्रण स्थापित करता है। अपने आचार, विचार एवं व्यवहार का परिशोधन करता है। जमात में नमाज अदा करना, एक दूसरे को मुबारकबाद देना और खुशियों को बांटना रमजान तथा ईद का आवश्यक अंग है जो सामाजिक समरसता का संदेश देता है।
किसी भी व्रत त्योहार में अध्यात्म अंतर्निहित तो होता ही होता है जबकि वास्तविक आनंद अपनी खुशियों को साझा करने में होता है। ईद का यह त्यौहार व्यक्तिगत खुशी के साथ ही साथ सामाजिक खुशी का संदेश प्रसारित करता है।
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