टीम एबीएन, रांची। झारखंड में जल्द ही दवा निर्माण उद्योग की स्थापना की जाएगी, जिससे राज्य दवा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकेगा। यह घोषणा राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने सोमवार को रांची के नमकुम स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की।
यह कार्यक्रम फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी और आरकेडीएफ फार्मेसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में फार्मेसी के विद्यार्थी, शिक्षक और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि झारखंड राज्य गठन के दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आज तक राज्य में एक भी बड़ा दवा निर्माण उद्योग स्थापित नहीं हो पाया है, जो चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में सामान्य दवाइयाँ जैसे पैरासिटामोल तक राज्य में नहीं बनतीं और डेक्सट्रोज सलाइन जैसी जरूरी चिकित्सा सामग्री भी बाहर से मंगानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि अब इस स्थिति को बदलने का समय आ गया है और राज्य सरकार इस दिशा में ठोस पहल करने जा रही है।
डॉ. अंसारी ने कहा कि दवा निर्माण उद्योग स्थापित होने से न केवल झारखंड में दवाओं का उत्पादन होगा बल्कि फार्मेसी के छात्रों और युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।
उन्होंने बताया कि राज्य में इस समय 123 से अधिक फार्मेसी कॉलेज संचालित हैं और हर वर्ष करीब 7000 छात्र-छात्राएँ फार्मेसी की डिग्री प्राप्त करते हैं। ऐसे में इन युवाओं को राज्य के भीतर ही रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बड़े पैमाने पर नियुक्तियाँ की जाएंगी। उन्होंने घोषणा की कि राज्य में एएनएम और जीएनएम के 7300 से अधिक पदों पर जल्द बहाली प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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