एबीएन सेंट्रल डेस्क। ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते बढ़ते ऊर्जा संकट का असर अब डेयरी उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। महाराष्ट्र के कई डेयरी संचालकों ने चेतावनी दी है कि एलपीजी की कमी के कारण दूध की प्रोसेसिंग, पाश्चुरीकरण और पैकेजिंग का काम प्रभावित हो रहा है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में दूध की सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
दूध को सुरक्षित रखने के लिए उसे एक निश्चित तापमान पर गर्म यानी पाश्चुरीकरण करना जरूरी होता है, जिसके लिए बड़ी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। गैस की अनियमित सप्लाई के कारण खासतौर पर छोटी और मध्यम स्तर की डेयरियों के लिए दूध को खराब होने से बचाना मुश्किल होता जा रहा है।
डेयरी उद्योग के सामने एक और बड़ी समस्या दूध के पैकेट और कार्टन की कमी बनकर सामने आयी है। दूध के पैकेट बनाने वाली फैक्ट्रियों को पर्याप्त गैस नहीं मिल पा रही है, जिससे उत्पादन धीमा हो गया है।
गोवर्धन डेयरी के संस्थापक देवेंद्र शाह के अनुसार फिलहाल उनके पास पैकेजिंग सामग्री का स्टॉक सिर्फ करीब 10 दिनों के लिए बचा है। अगर जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो दूध की डिलीवरी प्रभावित हो सकती है। चेंबूर स्थित सुरेश डेयरी के मैनेजर शरीब शेख ने भी कहा कि अगर अगले 10 दिनों में स्थिति नहीं सुधरी तो डेयरी उद्योग बड़े संकट में फंस सकता है।
गैस की कमी का असर दूध की मांग पर भी पड़ रहा है। होटल और रेस्टोरेंट खुद एलपीजी संकट से जूझ रहे हैं, इसलिए उन्होंने दूध के आॅर्डर कम कर दिये हैं। बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सीके सिंह के मुताबिक हाल ही में भैंस के दूध के तीन बड़े आॅर्डर रद्द हो गये। छोटे डेयरी संचालकों के पास स्टोरेज की सुविधा सीमित है, इसलिए वे दूध कम कीमतों पर बेचने को मजबूर हैं।
राहत की बात यह है कि बड़ी डेयरी कंपनियों पर फिलहाल इस संकट का ज्यादा असर नहीं पड़ा है। अमूल के एमडी जयेन मेहता के अनुसार उनकी करीब 80% गैस जरूरतें पूरी हो रही हैं, जबकि बाकी जरूरतें डीजल और अन्य ईंधनों से पूरी की जा रही हैं। इसी तरह मदर डेयरी भी अपने प्रोसेसिंग सेंटर्स पर पीएनजी और अन्य वैकल्पिक ईंधनों का इस्तेमाल कर रही है, जिससे फिलहाल उनकी दूध सप्लाई सामान्य बनी हुई है।
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