टीम एबीएन, रांची। 2 फरवरी 2026 को देशभर में बड़े पैमाने पर हड़ताल और भारत बंद का आह्वान किया गया है। यह आह्वान 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने मिलकर किया है। यूनियनों का दावा है कि इस आंदोलन में करीब 30 करोड़ मजदूर और किसान भाग ले सकते हैं। हड़ताल का असर अलग-अलग राज्यों में अलग स्तर पर देखने को मिल सकता है।
सरकारी बैंक कर्मचारियों की कई यूनियनों ने इस हड़ताल को समर्थन दिया है। इसमें रइक, बैंक आॅफ बड़ौदा और कऊइक जैसे बड़े बैंक शामिल हैं। बैंक शाखाएं पूरी तरह बंद नहीं होंगी, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण काउंटर सेवाएं, नकद लेनदेन और चेक क्लियरेंस जैसी सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, एटीएम, नेट बैंकिंग और यूपीआई जैसी डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से काम करती रहेंगी।
कई राज्यों में बस और ट्रक यूनियनों ने भी बंद का समर्थन किया है। ओडिशा, केरल और असम जैसे राज्यों में सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। कुछ स्थानों पर चक्का जाम की स्थिति भी बन सकती है। इससे लोगों को यात्रा में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
कुछ शहरों और कस्बों में व्यापारी संगठनों ने भी बंद का समर्थन किया है, जिससे बाजार और दुकानें बंद रह सकती हैं। वहीं सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू) और कुछ सरकारी विभागों में कामकाज धीमा रहने की संभावना है।
अब तक स्कूलों को बंद करने का कोई देशव्यापी आदेश जारी नहीं हुआ है। हालांकि जिन राज्यों में बंद का ज्यादा असर हो सकता है, वहां स्थानीय प्रशासन एहतियातन स्कूल और कॉलेज बंद रखने का फैसला ले सकता है। चूंकि इस समय बोर्ड परीक्षाओं का दौर चल रहा है, इसलिए अधिकतर स्कूल खुले रहने की संभावना है। फिर भी छात्रों को परिवहन की समस्या के कारण परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई हो सकती है। अभिभावकों और छात्रों को सलाह दी गयी है कि वे सुबह घर से निकलने से पहले स्कूल की ओर से जारी सूचना जरूर जांच लें।
आपातकालीन सेवाएं जैसे अस्पताल, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और मेडिकल स्टोर सामान्य रूप से खुले रहेंगे। एयरपोर्ट पर उड़ानें निर्धारित समय के अनुसार संचालित होंगी, लेकिन सड़क जाम की आशंका को देखते हुए यात्रियों को पहले से अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गयी है।
ट्रेड यूनियनों का कहना है कि सरकार द्वारा लागू किये गये नये लेबर कोड मजदूरों के हित में नहीं हैं। ये कोड पहले के 29 श्रम कानूनों की जगह लाये गये हैं। यूनियनों का आरोप है कि इससे श्रमिकों के अधिकार कमजोर होंगे। वहीं किसान संगठनों ने कुछ अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का विरोध जताया है। इसके अलावा आंदोलनकारी मनरेगा योजना को मजबूत करने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने और सरकारी उपक्रमों के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।
हड़ताल के दिन घर से निकलने से पहले अपने शहर की स्थिति की जानकारी जरूर लें। जरूरी कामों को पहले निपटाने की कोशिश करें और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करें। यात्रा की योजना बनाते समय अतिरिक्त समय रखें।
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