राज्य सूचीबद्धता समिति की बैठक में बड़े फैसले, एचईएम 2.0 अनुपालन पर सख्ती

 

तकनीकी त्रुटियों पर अस्पतालों के रिक्वेस्ट रद्द, अपग्रेडेशन पर रोक और आवश्यक दस्तावेजों के बिना मंजूरी नहीं 

टीम एबीएन, रांची। दिनांक 10 फरवरी 2026 को आहूत राज्य सूचीबद्धता समिति की बैठक में समिति के सभी सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। बैठक की अध्यक्षता झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक छवि रंजन ने की। बैठक में सूचीबद्ध निजी अस्पतालों से संबंधित विभिन्न मामलों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। 

तकनीकी समस्या अथवा मानवीय भूल के कारण एचईएम 2.0 पोर्टल पर अपडेट किये गये कुछ विद्ड्रॉल रिक्वेस्ट के संबंध में अस्पतालों के ईमेल एवं संबंधित जिला सिविल सर्जन की अनुशंसा के आधार पर चार अस्पतालों के रिक्वेस्ट को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। 

इनमें हजारीबाग का न्यू झारखंड नर्सिंग होम, पूर्वी सिंहभूम का टाटा मोटर्स हॉस्पिटल प्लांट, पलामू का श्री नारायण मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल तथा पलामू का मय्यन बाबू अस्पताल शामिल हैं। 

बैठक में यह भी पाया गया कि कई सूचीबद्ध निजी अस्पतालों द्वारा एचईएम 2.0 पोर्टल पर अपग्रेड रिक्वेस्ट के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की गाइडलाइन एवं दिशा-निदेर्शों के अनुरूप आवश्यक वैधानिक लाइसेंस एवं दस्तावेज अपलोड नहीं किये गये हैं। 

विशेष रूप से रांची म्युनिसिपल कॉरपोरेशन, डीआरडीए अथवा बीडीओ द्वारा अनुमोदित बिल्डिंग प्लान से संबंधित दस्तावेजों की अनुपलब्धता सामने आयी। साथ ही, अस्पतालों द्वारा आउटसोर्स की गयी सुविधाओं जैसे फार्मेसी, ब्लड बैंक और रेडियोलॉजिकल सुविधाएं (एक्स-रे, सीटी स्कैन) के लिए स्टांप पेपर पर इकरारनामा तथा संबंधित वैधानिक लाइसेंस जैसे फामेर्सी लाइसेंस, ब्लड बैंक लाइसेंस एवं एईआरबी सर्टिफिकेट को एचईएम 2.0 पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। 

इन कमियों को ध्यान में रखते हुए पूर्व में लिए गए निर्णयों के आधार पर तीन सूचीबद्ध निजी अस्पतालों के अपग्रेडेशन रिक्वेस्ट के अनुमोदन पर रोक लगाने का फैसला किया गया। इसके अलावा, जिन अस्पतालों ने सीटीई, सीटीओ और फायर सेफ्टी एनओसी के लिए आवेदन किया है, उनकी सूची झारखंड स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड एवं फायर सेफ्टी आफिस के नोडल अधिकारियों को भेजने का निर्णय भी लिया गया। 

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि एचईएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेशन के बिना किसी भी डॉक्टर या स्पेशलिस्ट को जोड़ने की अनुमति नहीं होगी। सभी सूचीबद्ध निजी अस्पतालों के लिए एचईएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेट होना अनिवार्य कर दिया गया है। 

इन निर्णयों से राज्य में आयुष्मान भारत-मुख्य मंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना एवं अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत सूचीबद्ध अस्पतालों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और नियमों के सख्त अनुपालन को सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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