टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, नई दिल्ली के मुख्य वित्तीय पदाधिकारी गयासुद्दीन अहमद ने झारखंड सरकार द्वारा संचालित आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। समीक्षा बैठक में झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी अध्यक्ष छवि रंजन, महाप्रबंधक प्रवीण चंद्र मिश्रा, वरिष्ठ परामर्शी सुनील प्रसाद सिंह, विश्वजीत प्रसाद, वैभव राय सहित संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में योजना की समग्र प्रगति पर चर्चा करते हुए कार्यकारी निदेशक छवि रंजन ने बताया कि झारखंड में लाखों परिवार इस योजना के अंतर्गत आच्छादित हैं और करोड़ों लाभुकों को माध्यमिक एवं तृतीयक स्तर की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं। राज्य में बड़ी संख्या में सरकारी एवं निजी अस्पताल सूचीबद्ध हैं, जहां हजारों प्रकार के उपचार पैकेजों के माध्यम से गंभीर से गंभीर बीमारियों का नि:शुल्क इलाज संभव हो पाया है। समीक्षा के दौरान पोर्टेबिलिटी से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
इसमें यह सामने आया कि झारखंड के मरीज इलाज के लिए किन-किन अन्य राज्यों में अधिक जाते हैं, किन अस्पतालों में बाह्य-राज्य मरीजों का दबाव ज्यादा है और कौन-से उपचार पैकेजों में पोर्टेबिलिटी के मामले सर्वाधिक हैं। कार्यकारी निदेशक ने कहा कि इन आंकड़ों से राज्य में ही उन्नत चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा तय करने में मदद मिलेगी।
निजी अस्पतालों में रोगवार पैकेज उपयोग पर चर्चा के दौरान कार्यकारी निदेशक द्वारा जानकारी दी गई कि कुछ विशिष्ट बीमारियों में दावों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। वहीं सरकारी अस्पतालों में जिलावार पैकेज उपयोग की स्थिति की समीक्षा करते हुए यह आकलन किया गया कि किन जिलों में उपचार सेवाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि मरीजों को बाहर न जाना पड़े।
बैठक में 30 दिनों के भीतर पुन: भर्ती से जुड़े मामलों का भी विस्तार से विश्लेषण किया गया। इसमें उन अस्पतालों और पैकेजों की पहचान की गई जहां री-एडमिशन के मामले अधिक सामने आये हैं। इस पर उपचार की गुणवत्ता, फॉलो-अप व्यवस्था और मानक उपचार प्रोटोकॉल के पालन को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया।
इसके अलावा तकनीकी प्रणाली और डेटा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर भी गहन चर्चा हुई। टीएमएस और राज्य डेटा वेयरहाउस से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर यह रेखांकित किया गया कि पैकेज के संभावित दुरुपयोग पर रोक लगाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित विश्लेषण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यकारी निदेशक ने बताया कि संदिग्ध दावे और बार-बार होने वाली अनियमितताओं की पहचान कर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि चालू वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार से 275 करोड़ रुपये तथा केंद्र सरकार से 178 करोड़ रुपये की राशि झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी को प्राप्त हो चुकी है, जिससे योजना के सुचारु संचालन और दावों के समयबद्ध भुगतान को मजबूती मिली है।
समीक्षा बैठक के अंत में श्री गयासुद्दीन अहमद ने केंद्र और राज्य स्तर पर समन्वय को और मजबूत करने, आईटी सिस्टम को सुदृढ़ करने तथा निगरानी तंत्र को प्रभावी बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना को और पारदर्शी, प्रभावी एवं लाभुक-केंद्रित बनाया जा सकेगा।
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