15वें वित्त आयोग की स्वास्थ्य योजनाओं में शून्य प्रगति पर कार्रवाई के संकेत

 

  • स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति पर सख्ती: 15वें वित्त आयोग में शून्य प्रगति वाले जिलों पर कार्रवाई के संकेत

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 2 फरवरी 2026 को अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आईपीएच सभागार, नामकुम में सभी जिलों के सिविल सर्जनों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गयी।

बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), मुख्यमंत्री अस्पताल रखरखाव योजना, 15वां वित्त आयोग तथा पीएम-अभीम की वर्तमान स्थिति का विस्तृत आकलन किया गया।
बैठक में एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, अपर सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज, संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला तथा निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. सिद्धार्थ सान्याल सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी एवं सभी जिलों के सिविल सर्जन उपस्थित थे।

अपर मुख्य सचिव ने एनएचएम अंतर्गत किये गये खर्च और संभावित व्यय की रिपोर्ट लेते हुए अतिशीघ्र विपत्र तैयार कर भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि समय पर भुगतान के लिए सभी संबंधित अधिकारियों एवं स्टेकहोल्डर्स के साथ आवश्यक बैठकें आयोजित की जाएं।मुख्यमंत्री अस्पताल रखरखाव योजना के अंतर्गत अस्पतालों में मरम्मत एवं रंग-रोगन की अद्यतन स्थिति की भी समीक्षा की गई। उन्होंने निर्देश दिया कि जहां भी छोटी-मोटी कमियां रह गई हों, उन्हें शीघ्र दुरुस्त किया जाए।

15वें वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध राशि की समीक्षा करते हुए श्री सिंह ने कहा कि सभी अस्पतालों में आवश्यक मशीनें उपलब्ध कराई जाएं। यदि कहीं अतिरिक्त राशि की आवश्यकता हो तो उसे तत्काल उपलब्ध कराया जायेगा। कम खर्च पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने जिन जिलों में प्रगति शून्य पाई गई, वहां कारण-पृच्छा करने का निर्देश दिया। साथ ही चेतावनी दी कि स्थिति में सुधार नहीं होने पर संबंधित सिविल सर्जनों के वेतन पर रोक और कड़ी कार्रवाई की जायेगी। बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों की उन्होंने प्रशंसा की और पिछड़े जिलों को उनसे अनुसरण करने का निर्देश दिया।

बैठक में यह भी सामने आया कि उप विकास आयुक्त एवं नगर परिषद को भी 15वें वित्त आयोग की राशि आवंटित की गई है, जहां खर्च की गति धीमी है। इस पर अपर मुख्य सचिव ने सभी सिविल सर्जनों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने और 13 फरवरी तक नगर परिषद एवं उप विकास आयुक्त द्वारा खर्च की गई राशि का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट जमा करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में न्यूनतम 60 प्रतिशत राशि का उपयोग अनिवार्य है।

अपर मुख्य सचिव ने यह भी बताया कि अटेंडेंस सिस्टम को वेतन से जोड़ने की प्रक्रिया पर कार्य किया जा रहा है, ताकि अस्पताल कर्मियों का वेतन उपस्थिति के आधार पर सुनिश्चित किया जा सके। सहियाओं को मिलने वाले इंसेंटिव को भी ऑन करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे, जिसके लिए आवश्यक होने पर कैबिनेट स्तर पर प्रस्ताव ले जाया जायेगा।

बैठक के दौरान कुछ सिविल सर्जनों ने जिले में एंबुलेंस संचालन में आ रही समस्याओं की ओर ध्यान आकृष्ट कराया। इस पर अपर मुख्य सचिव ने सुझाव दिया कि 108 एंबुलेंस सेवा को एकीकृत संचालन के तहत सौंपा जाए, ताकि सुरक्षित और सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।

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