एबीएन बिजनेस डेस्क। दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच निवेशकों का रुझान एक बार फिर सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ता दिख रहा है। इसी कड़ी में सोने की कीमतों ने नया इतिहास रच दिया है। रविवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना पहली बार 5,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गया।
कारोबार के दौरान इसकी कीमत 5,026 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। सोने के साथ-साथ चांदी में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली। शुक्रवार को चांदी की कीमत पहली बार 102 डॉलर प्रति औंस से ऊपर चली गई थी। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से ही कीमती धातुओं के भाव लगातार मजबूत बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की आक्रामक विदेश नीति, खासतौर पर ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के बयानों और फेडरल रिजर्व पर बढ़ते राजनीतिक दबाव ने बाजारों में बेचैनी बढ़ा दी है। इसके चलते निवेशक डॉलर और बॉन्ड से दूरी बनाकर सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इसके अलावा बीते दो वर्षों से कमजोर अमेरिकी डॉलर, केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़े पैमाने पर सोने की खरीद और लगातार ऊंची बनी महंगाई ने भी सोने की कीमतों को मजबूत सहारा दिया है। जनवरी 2024 में जहां सोना करीब 2,000 डॉलर प्रति औंस पर था, वहीं अब यह ढाई गुना से ज्यादा बढ़ चुका है।
हाल ही में ट्रंप द्वारा कुछ यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकियों से पीछे हटने के बावजूद अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव कम नहीं हुआ है। ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी रुख ने व्यापार युद्ध की आशंकाओं को फिर से हवा दे दी है। इसका सीधा असर डॉलर पर पड़ा, जो यूरो के मुकाबले चार महीने के निचले स्तर पर आ गया। वहीं, सोने की कीमतों में और तेजी आई।
सैक्सो यूके के निवेश रणनीतिकार नील विल्सन का कहना है कि जैसे-जैसे वैश्विक राजनीति में तनाव बढ़ा है, वैसे-वैसे सोना नए रिकॉर्ड बनाता चला गया। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड में संभावित अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को अब बाजार पहले की तरह नजरअंदाज नहीं कर रहा।
इस हफ्ते होने वाली अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की नीति बैठक को लेकर भी बाजार सतर्क हैं। हाल ही में फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल को भेजे गए कानूनी नोटिस के बाद बैंक की स्वतंत्रता पर सवाल उठने लगे हैं। ट्रंप पहले भी कई मौकों पर पॉवेल की नीतियों और महंगाई को लेकर उनकी टिप्पणियों की आलोचना कर चुके हैं।
हालांकि, दुनिया के कई बड़े केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों ने फेड और पॉवेल के समर्थन में बयान दिए हैं। स्वतंत्र विश्लेषक स्टीफन इन्स के मुताबिक, केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को लेकर बनी अनिश्चितता ने सोने की कीमतों को दीर्घकालिक मजबूती दी है।
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