एबीएन सेंट्रल डेस्क। जब दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं जंग, महंगाई और सुस्त ग्रोथ से जूझ रही हैं, ऐसे समय में 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाला केंद्रीय बजट 2026-27 भारत के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत दिख रही है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं।
एक्सिस डायरेक्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, एफवाई 26 में भारत की जीडीपी ग्रोथ करीब 7.4% रहने का अनुमान है। इस रफ्तार के पीछे सबसे बड़ी ताकत है सरकार का कैपेक्स यानी पूंजीगत खर्च, सर्विस सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन और धीरे-धीरे सुधरता निजी निवेश। लेकिन सवाल यही है- क्या यह रफ्तार आगे भी बनी रह पायेगी?
बजट 2026-27 में सरकार का सबसे बड़ा फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार 12 से 13 लाख करोड़ रुपये का कैपेक्स रख सकती है, जो पिछले साल से 10-15% ज्यादा हो सकता है। सड़कें, रेलवे, लॉजिस्टिक्स, डिफेंस, शहरी विकास, हाउसिंग, पावर ट्रांसमिशन, रिन्यूएबल और ग्रीन एनर्जी- इन सभी सेक्टर्स में खर्च बढ़ने की संभावना है। सरकार का मकसद साफ है- नौकरियां पैदा करना, निवेश खींचना और लंबी अवधि की ग्रोथ सुनिश्चित करना।
हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। रिपोर्ट बताती है कि शहरी खपत में सुस्ती बनी हुई है और ग्रामीण मांग अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुई है। ऐसे में सरकार के सामने बड़ी चुनौती है- कैपेक्स और कंजम्पशन के बीच सही संतुलन बनाना। बजट में ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, खेती, रोजगार योजनाओं, स्किलिंग प्रोग्राम और टार्गेटेड वेलफेयर स्कीम्स के जरिये मांग को सहारा देने की कोशिश की जा सकती है।
बाजार सरकार से फिस्कल अनुशासन की उम्मीद लगाए बैठा है। रिपोर्ट के मुताबिक, एफवाई 27 में फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 4.2-4.4% के दायरे में रखने का लक्ष्य हो सकता है। इसका सीधा असर बॉन्ड यील्ड, ब्याज दरों और महंगाई पर पड़ेगा। सरकार अगर इस लक्ष्य पर खरी उतरती है, तो घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा।
सरकार के सामने एक और बड़ी चुनौती है- नॉन-टैक्स रेवेन्यू जुटाना। रिपोर्ट के मुताबिक, बजट में 50,000 से 70,000 करोड़ रुपये डिसइनवेस्टमेंट और एसेट मॉनेटाइजेशन से जुटाने का लक्ष्य रखा जा सकता है। हालांकि बीते सालों में इस मोर्चे पर लक्ष्य पूरे नहीं हो पाये हैं। ऐसे में बाजार सरकार से स्पष्ट और समयबद्ध रोडमैप की उम्मीद कर रहा है।
बड़े टैक्स कट की उम्मीद फिलहाल कम है। रिपोर्ट कहती है कि सरकार टैक्स दरें घटाने की बजाय टैक्स सिस्टम को सरल बनाने, मुकदमेबाजी कम करने और रिफंड तेजी से देने पर फोकस कर सकती है। मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी और इनोवेशन को टागेर्टेड टैक्स इंसेंटिव मिल सकते हैं
बजट के गणित में आरबीआई से मिलने वाला डिविडेंड अहम भूमिका निभा सकता है। एफवाई 26 में रिकॉर्ड सरप्लस मिलने के बाद एफवाई 27 में भी सरकार को आरबीआई से मजबूत डिविडेंड मिलने की उम्मीद है। इससे सरकार को उधारी कम करने और ग्रोथ खर्च बनायेरखने में मदद मिल सकती है।
रिपोर्ट साफ कहती है कि बाजार सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि सुधारों के संकेत भी देखेगा। ईज आॅफ डूइंग बिजनेस, लेबर रिफॉर्म्स, लॉजिस्टिक्स सुधार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कानूनी और रेगुलेटरी सरलीकरण। ये वो फैक्टर हैं जो लंबे समय में भारत को ग्लोबल इन्वेस्टर्स के लिए और आकर्षक बना सकते हैं
रिपोर्ट के मुताबिक, बजट से इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग, सीमेंट, पावर, डिफेंस, हेल्थकेयर, फार्मा, टेलीकॉम, एश्, रिन्यूएबल एनर्जी और मेटल्स सेक्टर को फायदा मिल सकता है। वहीं, कुछ सेक्टर्स में नीतिगत समर्थन पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
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