लातेहार : ओरसा बंगलादारा घाटी के भीषण सड़क हादसे में सात की मौत, 50 से ज्यादा घायल

 

ओरसा बंगलादारा घाटी में भीषण सड़क हादसा 

छत्तीसगढ़ से महुआडांड़ आ रही बस पलटी, सात की मौत, 87 घायल 

लोटा-पानी (शादी समारोह) में शामिल होने जा रहे थे यात्री, ब्रेक फेल होने से हुआ हादसा 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, महुआडांड़ (लातेहार)। महुआडांड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत ओरसा बंगलादारा घाटी में रविवार को एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हो गया। घटना रविवार शाम 3;30 बजे शाम की है। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से झारखंड के महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत लोध गांव लोटा-पानी (शादी समारोह) में शामिल होने आ रही एक यात्री बस अनियंत्रित होकर पलट गई, जिससे चार महिलाओं एवं एक पुरुष की मौके पर ही जबकि कुल सात लोगों की दर्दनाक मौत हो गयी, जबकि 87 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गये। कई घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जतायी जा रही है। 

घाटी में ब्रेक फेल, बस बनी मौत का कारण 

प्राप्त जानकारी के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त बस (सीजी 15 एबी 0564) में करीब 100 यात्री सवार थे। यात्रियों ने बताया कि घाटी में उतरते समय अचानक बस का ब्रेक फेल हो गया, जिससे चालक नियंत्रण खो बैठा और बस पलट गयी। हादसा इतना भयावह था कि बस में सवार बच्चे, महिलाएं, वृद्ध और पुरुष सभी बुरी तरह घायल हो गए। कई यात्रियों के हाथ-पैर टूट गये, तो कई के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आयी हैं। 

चीख-पुकार से गूंज उठी घाटी, ग्रामीण बने सहारा 

दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गयी। कई घायल बस के अंदर फंसे रहे। शोर सुनते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बिना किसी भेदभाव के घायलों को बाहर निकालकर एंबुलेंस तक पहुंचाया। ग्रामीणों की तत्परता से कई घायलों की जान बचायी जा सकी। 

प्रशासन और पुलिस ने संभाली मोर्चा 

घटना की सूचना मिलते ही महुआडांड़ एसडीपीओ शिवपूजन बहेलिया एवं थाना प्रभारी मनोज कुमार पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। प्रशासन द्वारा तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया गया और घायलों को एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल भेजा गया। 

स्वास्थ्य विभाग पर भारी पड़ा घायलों का सैलाब 

घायलों की संख्या अत्यधिक होने के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महुआडांड़ एवं कार्मेल हॉस्पिटल में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की गई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महुआडांड़ में 60 से अधिक घायलों का इलाज किया गया। कार्मेल हॉस्पिटल में 27 घायलों का उपचार हुआ  

घायल बचाने में जुटे डॉक्टर, डॉ. अमित खलखो के माथे से बहता रहा पसीना 

घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमित कुमार खलखो के नेतृत्व में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम पूरी तरह अलर्ट मोड में रही। लगातार आ रहे घायलों के इलाज में जुटे डॉ. खलखो के माथे से पसीना बहता रहा, लेकिन उन्होंने बिना थके हर घायल को संभालने का प्रयास किया। घायलों की भीड़ के कारण अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सीमित संसाधनों के बावजूद डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों ने अथक प्रयास कर स्थिति को नियंत्रित किया। बेहतर इलाज के लिये 32 घायल को  सदर अस्पताल गुमला रेफर किया गया। कई घायलों की हालत नाजुक होने के कारण उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा हेतु सदर अस्पताल, गुमला रेफर किया गया। 

मृतकों की पहचान, एक की शिनाख्त बाकी 

हादसे में मृतकों की पहचान छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के पिपरसोट गांव निवासी रेसंती देवी, प्रेमा देवी, सीता देवी एवं सुखना सुईयां के रूप में की गई है। वहीं एक मृत महिला की पहचान समाचार लिखे जाने तक नहीं हो सकी है। 

जनप्रतिनिधियों ने जताया शोक, सहायता में जुटे 

इस हृदयविदारक घटना पर चतरा सांसद कालीचरण सिंह एवं स्थानीय विधायक रामचंद्र सिंह ने गहरी संवेदना व्यक्त की। घायलों के इलाज एवं व्यवस्था में महुआडांड़ अनुमंडल सांसद प्रतिनिधि संजय जायसवाल, प्रखंड उपप्रमुख सह कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष अभय मिंज, भाजपा मंडल पूर्वी अध्यक्ष प्रशांत सिंह, पश्चिमी मंडल अध्यक्ष अमित कुमार जायसवाल, कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष नुरुल अंसारी, कांग्रेस नेता अजीत पाल कुजूर, रामनरेश ठाकुर, युवा कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष आमिर सुहैल, सीताराम प्रसाद सहित कई जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। 

एसडीएम एसडीपीओ, थाना प्रभारी पहुंचे अस्पताल, मदद की अपील 

घटना की जानकारी मिलते ही महुआडांड़ एसडीएम बिपिन कुमार दुबे, एसडीपीओ शिवपूजन बहेलिया, थाना प्रभारी मनोज कुमार, अनुमंडल सांसद प्रतिनिधी संजय जायसवाल आदि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और घायलों से मुलाकात की। उन्होंने स्थानीय लोगों से कंबल दान कर मदद करने की अपील की। ठंड को देखते हुए अनुमंडल सांसद प्रतिनिधि संजय जायसवाल ने घायलों के बीच चार कंबलों का वितरण किया। 

मानवता बनी उम्मीद की किरण 

इस भीषण हादसे में ग्रामीणों की मदद, डॉक्टरों की निष्ठा, प्रशासन की तत्परता और सामाजिक सहयोग से कई घायलों की जान बचायी जा सकी। संकट की इस घड़ी में महुआडांड़ ने मानवता और सामूहिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश की।

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