एबीएन बिजनेस डेस्क। शेयर बाजार में आज, 14 जनवरी को गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 244 अंक गिरकर 83,382 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी करीब 66 अंकों की गिरावट के साथ 25,665 के स्तर पर बंद हुआ।
शेयर बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से आ रहा है। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को एफआईआईएस ने 1,499.81 करोड़ के शेयर बेचे। यह जनवरी में लगातार 7वां दिन रहा जब विदेशी निवेशकों ने शुद्ध बिकवाली की। डीलरों के मुताबिक, विदेशी फंड्स की यह लगातार निकासी खासतौर पर लार्ज-कैप शेयरों पर असर डाल रही है, जिससे बाजार में मजबूती नहीं बन पा रही है।
एशियाई बाजारों से भी निवेशकों को कोई खास सहारा नहीं मिला। चीन का शंघाई एसएसई कंपोजिट इंडेक्स गिरावट में रहा। अमेरिकी बाजार भी रातभर कमजोरी के साथ बंद हुए और वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, जिससे अमेरिका में कमजोर शुरूआत के संकेत मिले।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, टैरिफ को लेकर अनिश्चितता और ऋकक बिकवाली की वजह से वैश्विक माहौल फिलहाल अनुकूल नहीं है। इसी कारण भारतीय बाजार पर भी दबाव बना हुआ है।
निवेशकों की चिंता अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर भी बनी हुई है। 14 जनवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में उन टैरिफ पर फैसला आने की संभावना है, जिन्हें पिछले साल अप्रैल में ट्रंप प्रशासन ने लागू किया था। ये टैरिफ 10% से 50% के बीच हैं और कई बड़े देशों पर लगाए गए थे।
इन टैरिफ को अदालत में यह कहकर चुनौती दी गई है कि ये राष्ट्रपति की अधिकार सीमा से बाहर हैं। अगर टैरिफ बने रहते हैं, तो इससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है और उभरते बाजारों, जैसे भारत, में पूंजी निवेश प्रभावित हो सकता है।
इसके अलावा, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा है कि जो देश ईरान के साथ व्यापार करेंगे, उन पर अमेरिका 25% टैरिफ लगा सकता है। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों को फांसी दी गयी, तो अमेरिका सख्त कदम उठायेगा। इन बयानों से निवेशकों की चिंता और बढ़ गयी है।
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