एबीएन सेंट्रल डेस्क। संजय दत्त की जिंदगी उथल-पुथल भरी रही। 1980 के दशक में मादक पदार्थों की लत के कारण वह सुर्खियों में रहे और उसके बाद 1993 मुंबई बम धमाकों के मामले में उनपर विशेष टाडा केस चला। सुनवाई 30 जून 1995 को शुरू हुई थी। जिस मामले में करीब 12 साल बाद 18 मई 2007 को इस मामले की सुनवाई खत्म हुई थी। इस केस में संजय दत्त टाडा के आरोपों से तो बरी हो गए, पर उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत 6 साल की सजा सुनाई गई थी। संजय दत्त का अच्छा-खासा वक्त जेल में बीता। उन्होंने करीब पांच साल जेल में सजा काटी और अच्छे बर्ताव के कारण उन्हें तय सजा से आठ महीने पहले ही जेल से रिहा कर दिया गया था। जेल में उन्होंने आम कैदी की तरह समय बिताया। उन्होंने जेल में थैलियां बनाई। अपने एक पुराने इंटरव्यू में संजय दत्त ने बताया था कि कैसे उन्होंने जेल में श्रम के जरिए 500 रुपये कमाये थे। संजय दत्त का कहना था कि उन्होंने पुराने अखबारों से पेपर बैग बनाकर जेल के अंदर पैसे कमाये थे। उनका कहना था, हम वहां अखबारों से पेपर बैग बनाते थे। मुझे प्रति बोरी 20 पैसे मिलते थे। संजय दत्त का कहना था कि वह जेल में रोजाना 50 से 100 बैग बनाते थे। संजय दत्त ने अपने इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने जेल में रहने के दौरान करीब 400 से 500 रुपये कमाये थे। अभिनेता ने कहा था कि वह सारे पैसे उन्होंने अपनी पत्नी मान्यता को दिये थे। संजय दत्त ने कहा कि जब वह साल 2016 में जेल से बाहर आये तो उन्होंने यह पैसे मान्यता को दिये थे। उन्होंने यह भी कहा था कि मेरे लिये उन 500 रुपये की कीमत 5000 करोड़ रुपये के बराबर है। संजय दत्त ने 2013 से लेकर 2016 तक पुणे की यरवदा सेंट्रल जेल में सजा काटी थी।
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