एबीएन एडिटोरियल डेस्क (प्रो पीके आर्य)। नवोन्मेष के वर्तुल लहक रहे हैं, पुनश्च: एक और वर्ष स्वागत की दहलीज पर खड़ा मुस्कुरा रहा है। हम सब उसके लिए गहरे अहोभावों से पूरित हैं, आशाओं की कोंपलें फूट रही हैं। पुराने और अप्रिय को विस्मृत करने को मन उतावला है, नूतन के प्रति नए रोमांच का संचार जीवन के प्रति पुलक पैदा करता है। निजी जीवन से इतर समाज और राष्ट्र के बारे मिलने वाले संदेश हृदय को आह्लादित करते हैं कि चलो कुछ भी हो हमारा भविष्य नवोत्थान के स्वर्णिम शिखरों की ओर देखकर प्रसन्न और आनंदित तो है। हर जाता हुआ वर्ष कुछ शुभ कुछ अशुभ छोड़ता ही है। 2021 भी अपवाद न था, लेकिन कोविड की दूसरी लहर जिसमें आॅक्सीजन की किल्लत मची, लंबे अरसे तक भूलेगी नहीं। कोविड के सभी प्रकोपों ने हर बार जीवन को नए सिरे से समझने में मदद की है। इस आपदा का एक सुखद पक्ष यह है कि यह हमें आत्मावलोकन का अवसर दे रहा है। जिंदगी आज भी अपने विविध रंगों में पूरे वेग से चल रही है। कोविड के प्रहार का अर्थव्यवस्था पर भी असर है। लंबे अरसे से अपने स्वरूप के उद्धार को प्रतीक्षारत अयोध्या और बनारस के भाग्य जगे हैं। देश अपने स्वरूप और स्वाभिमान की एक स्वर्णिम यात्रा पर चल निकला है। नरों में कुछ इंद्र अपनी सार्थकता को उपलब्ध हुए हैं तो कुछ योगियों की साध तपकर प्रकट हो रही है। अंग्रेजी में एक कहावत है मैन बिहाइंड द कैमरा अब आने वाला समय तय कर देगा कि मैन बिहाइंड द पॉलिटिक्स भारत अपनी स्थिति और शक्ति के एक नए आयाम को संस्पर्श कर रहा है। आते वर्ष में भारत का प्रभुत्व समग्र रुपेण विस्तारित होता दिख रहा है। देश नव उत्थान के नूतन शिखरों की ओर पूरी शान से बढ़ रहा है। अवधेश कुमार का लेख : शीर्ष देश बनने की उम्मीद जाते वर्ष में नरेंद्र मोदी एक दूरदर्शी नेता के रूप में उभरे हैं। इस वर्ष बोए गए बीज आते वर्ष में पुष्पित पल्लवित होने प्रारम्भ होंगे। अमेरिका के साथ अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बिगड़ते रिश्तों में भारतीय कूटनीति छिपी है। वियतनाम के साथ भारत का गठजोड़ चीन पर दबाव बनाने के लिए काफी है। प्राय: ऐसा होता है कि विश्व में सभी देशों की सभी देशों से नहीं पटती पहली बार यह देखने को मिल रहा है कि भारत का चीन और पाकिस्तान को छोड़कर कोई शत्रु नहीं। वैश्विक पटल पर भारत की स्वीकार्यता सभी देशों के मध्य एक नए वैश्विक सम्बंध का ताना-बाना बुनती दिखाई दे रही है। बहुत से कयासों को पीछे छोड़ते हुए कोरोना के मामले में भी भारत अन्य अनेक विकसित देशों से अच्छी स्थिति में है। भारत ने दवाई बनाने से लेकर उसके प्रयोग तक में अनेक कीर्तिमान स्थापित किए हैं। बहुत मामूली से नुकसान के साथ हमें हंसता देख समूचा विश्व हतप्रभ है। वियतनाम ने चीन के दक्षिणी छोर पर तेल निकालना शुरू कर दिया है। यह तेल भारत को भेजा जाता है। भारत की रिलायंस कंपनी वहां कार्यरत है। अमेरिका का वियतनाम पर बढ़ता वर्चस्व भारत के लिए सुखद संकेत है। भारत की सीमाओं पर खासकर चीनी क्षेत्र में भारतीय सैन्य दबदबा बढ़ा है। 1962 के बाद पहली बार लिपुलेख दर्रे तक भारतीय सड़क मार्ग एकदम दुरुस्त है। जो किसी भी चीनी हिमाकत का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पर्याप्त है। कैलाश मानसरोवर मार्ग विशेषकर उत्तराखंड, तिब्बत और नेपाल सीमा पर भारत की आज जो स्थिति है, वह पहले कल्पना की बात थी। जब लाकडाउन में सभी गतिविधियां लगभग स्िथर थी तब हमारे सैनिक वहां नवनिर्माण के नए अध्याय रच रहे थे। प्रमोद जोशी का लेख : उम्मीदों पर हावी असमंजस चीन ने सियाचिन दर्रे पर मानवीय दल को हटाकर अपने रोबोट दस्ते नियुक्त किए हैं, जबकि भारतीय सैनिक माइनस 40 तापमान में भी वहां गिद्धा पा रहे हैं। चीन और अमेरिका का भारत में 15 अरब डालर निवेशित है। भारत के लिए यह एक विन विन स्थिति है। जबकि पाकिस्तान अपनी गरीबी की पराकाष्ठा पर है। अफगनिस्तान की सीमा के निकट ईरान में भारतीय सेना ने जो पोर्ट बनाया है वह बहुआयामी उद्देश्यों की पूर्ति करेगा। अब ईरान भारत से सीधे व्यापार और अन्य कार्यों हेतु स्वतंत्र है। भारत ने सऊदी अरब की मदद से पाकिस्तान में सेक्शन 2ए और 3 ए रद्द कराके पुन: पाकिस्तान को विभाजन के कगार पर ला खड़ा किया है। अब पाक चार हिस्सों में विभक्त होगा। सबसे पहले पीओके भारत में विलय होगा। रूस और जापान जैसी दो महाशक्तियों का भारत से जुड़ाव गहराया है, इसका परिणाम यह निकलेगा कि भारत पहले एशिया और बाद में दुनिया के सर्वाधिक शक्तिशाली देशों में गिना जाएगा। यदि चीन हांगकांग में अपनी शक्ति दिखाता है तो भारत चीन अधिकृत कश्मीर को कब्जे में करने को तैयार है, ताकि उसकी सीपीईसी योजना को बाधित किया जा सके। अमेरिका भारत को सहर्ष एमटीसी आर समूह में शामिल कर चुका है, अब जल्दी ही भारत परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह को अपने प्रभुत्व में ले लेगा। बुरे से बुरे वक़्त में भी कुछ न कुछ अच्छा और श्रेष्ठ होता ही है। यह नियति का नियम है। जिस समय हिंदुत्व पर कुल्हाड़ा चल रहा था और प्रतिदिन सैकड़ों किलो जनेऊ और चोटियां तोलकर धर्मांतरण किया जा रहा था, उसी समय हनुमान चालीसा और रामचरितमानस की रचना हुई। कोविड काल में जब अन्य अनेक देश अपने अस्तित्व और भविष्य से जूझ रहे थे उसी समय भारत में नव आधुनिकीकरण की ठंडी बयार बह रही थी। सीमाओं और नगरों में शानदार सड़कों और सुविधाओं का निर्माण हो रहा था। आते वर्ष में विकास कार्यों की यह गति बरकरार रही तो हमें शीघ्र ही उन्नत राष्ट्र के नागरिक होने का सुखद एहसास होगा। भारत पर 200 साल तक राज करने वाले ब्रिटेन में आहूत 53 देशों की सभा में भारत के प्रधानमंत्री को महाध्यक्ष बनाना बहुत बड़े परिवर्तन की ओर संकेत करता है। यूएन मानवाधिकार परिषद में सदस्यता हेतु भारत को मात्र 97 मतों की आवश्यकता थी मिले 188 यह पहले कभी संभव न था। शादी और सियासत के बीच घमासान जब दुनिया के सर्वाधिक शक्तिशाली देशों की सूची जारी हुई तो भारत उसमें चौथे नम्बर पर आया, हमसे आगे अमेरिका, रूस और चीन हैं। जिस जीएसटी को लेकर इतना हो हल्ला था उसका मासिक कलेक्शन एक लाख करोड़ को पार कर गया। नए ऊर्जा सौर संयंत्र लगाने में अमेरिका और जापान को पीछे छोड़कर भारत आगे आन खड़ा हुआ। भारत की जीडीपी 8.2 है जबकि चीन की 6.7 और अमेरिका की 4.2 ही है। जल थल और गगन तीनों क्षेत्रों में सुपरसोनिक मिसाइल दागने वाला पहला देश बना भारत। इन उपलब्धियों की सूची बहुत लम्बी है जो भारत को उसके उन्नत शिखर की ओर अग्रसर कर रही है। हम सुनते आए हैं कि भारत विश्वगुरु था। अब हम पुन: उसी ओर अग्रसर हैं। इतनी विषमताओं के बीच भी भारत जिस तरह से उभर रहा है उसे देखकर सारी दुनिया ठगी सी खड़ी है। आते वर्ष में जनसंख्या नियंत्रण समेत अन्य अनेक महत्वपूर्ण बिल देश को एक नयी दिशा देंगे। इन्हीं सुखद नवीनताओं की पदचाप के साथ सभी को नववर्ष शुभ और अतिशय मंगलकारी हो! ॐ स्वस्ति अस्तु...
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