कोडरमा (मनोज कुमार पांडेय)। टेलीविजन, एलईडी, एलसीडी और इंटरनेट के जमाने के लोग भले ही रेडियो को गुजरे जमाने की चीज समझें पर इसका क्रेज आज भी बरकरार है। ऐसा मानना है रेडियो प्रेमी चमन राम जी का। चमन राम के दैनिक जीवन की शुरुआत रेडियो से ही होती है। सुबह उठकर राम चरित मानस का पाठ सुनना उन्हें काफी भाता है। जहां एक ओर चमन के घर के अन्य लोग टीवी से चिपके रहते हैं वहीं दूसरी ओर रेडियो से जुडी पुरानी यादों को अपने सीने में समेटे चमन राम रेडियो को अपना सबसे बड़ा इंटरटेनर बताते हंै। चाहे विविध भारती के गीत हों या विनाका गीत माला के बड़े एंकर अमीन सायनी की आवाज या फिर आकाशवाणी पटना के उद्घोषक बद्री प्रसाद यादव की जादू भरी आवाज। रेडियो की पुरानी स्मृतियां आज भी ताजा हो उठती हो। ठुमरी हो, राग दादरी या लोक गीतों की गूंज। इन सबों को लोगों तक पहुचाने वाले रेडियो को लोग आज तक नहीं भूल पाये हैं। भारतीय संस्कृति से जुड़ी लोक गीतों की अनुगूंज टीवी नहीं बल्कि रेडियो पर ही सुनाई पड़ती है। फगुआ, चैतारी और भोजपुरी लोक गीत जिसमें भारतीय ग्रामीण संस्कृति के गुण हों, रेडियो इन सबों का संरक्षक और पोषक है। चमन राम आज भी रेडियो को समाचार और मनोरंजन का सबसे अच्छा साधन मानते हैं।
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