रांची। किसान दिवस पर कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग कृषि प्रभाग झारखंड सरकार ने 23 दिसंबर गुरुवार को रामकृष्ण मिशन सभागार मोराबादी रांची में राज्य स्तरीय रबी कर्मशाला आयोजित की। जिसके मुख्य अतिथि कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि अधिक से अधिक किसानों को लाभ पहुंचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दो -तीन प्रतिशत किसानों के इर्द-गिर्द ही कृषि संबंधी योजनाओं का लाभ घूमता रहता है। यह जमीनी हकीकत है। इसे दूर करने की सख्त जरूरत है। इसके लिए उन्होंने दूसरी और तीसरी लाइन के किसानों को तैयार करने पर जोर दिया। मंत्री ने कहा कि मॉडल के रूप में कुछ जिलों और गांवों को जैविक खेती के लिए तैयार करने की जरूरत है। मौके पर कृषि सचिव अबू बकर सिद्दीकी ने कहा कि झारखंड अभी भी रबी फसल के मामले में राष्ट्रीय स्तर में काफी पीछे है। सब्जी और दाल की खेती में स्थिति ठीक है लेकिन इससे खुश होकर बैठने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जन सेवकों को खेती के कार्यों में लगाने की जरूरत है। जन सेवकों को अन्य कार्यों में लगा दिया गया है जिससे खेती के विकास में बाधा पहुंच रही है। कृषि निदेशक निशा उरांव ने रबी कर्मशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कृषि योजनाओं से किसानों को जोड़ने की जरूरत है। किसानों के सुविधा बहाल करने के लिए सामूहिक प्रयास करने की जरूरत है। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति ओंकार नाथ सिंह ने कहा कि रबी फसल किसानों की आमदनी बढ़ाने में सहायक हो सकता है। इस दिशा में बेहतर तालमेल के साथ काम करने की जरूरत है। रामकृष्ण मिशन के सचिव ने झारखंड को जैविक स्टेट बनाने पर जोर दिया। रबी कर्मशाला में कृषि विश्वविद्यालय, आत्मा और कृषि विभाग के अधिकारी विशेषज्ञ और वैज्ञानिक उपस्थित थे। मौके पर तकनीकी सत्र का भी संचालन किया गया।
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