ख्रीस्त जयंती महोत्सव की सामाजिक व आध्यात्मिक तैयारी की अवधि है आगमन काल : फादर सुशील टोप्पो

 

रांची। आगमन का शाब्दिक अर्थ है आना। ख्रीस्तीयों के जीवन में आगमन काल एक महत्वपूर्ण अवधि होने के साथ विशेष मायने रखता है। इसकी शुरूआत प्रति वर्ष ठीक ख्रीस्त राजा पर्व के बाद के रविवार से होती है। आगमन के प्रथम रविवार से ही ख्रीस्तीय विश्वासी नए पूजन वर्ष में प्रवेश करते है। जिसका समापन ख्रीस्त राजा पर्व के साथ होता है। वास्तव में आगमन काल ख्रीस्त जयंती महापर्व की आध्यात्मिक तैयारी का है। मसीही विश्वासियों के लिए ख्रीस्त जयंती महोत्सव की सामाजिक व आध्यात्मिक दोनों तैयारी की अवधि है आगमन काल। उक्त बातें रांची के आर्चबिशप फेलिक्स टोप्पो एसजे के सचिव फादर सुशील टोप्पो ने कही। आगमन काल के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि आगमन काल में 16 दिसंबर से 24 दिसंबर वह खास अवधि होती है जिसमें मसीही येसु मसीह के आगमन पर मनन-चिंतन करते हुए उनके स्वागतार्थ आध्यात्मिक तैयारी करते है। चार सप्ताह के इस आगमन काल का समापन 25 दिसम्बर को सोल्लास येसु ख्रीस्त का जन्मोत्सव मनाकर किया जाता है। फादर सुशील टोप्पो ने बताया कि सामाजिक व आध्यात्मिक ये दोनों क्रिसमस की तैयारी के दो पक्ष है। सामाजिक तैयारी के तहत लोग ख्रीस्त के आगमन पर बतौर उनके स्वागत अपने घर-द्वार की साफ-सफाई, कर उसका रंग रोगन करता हैं। इसके साथ ही घर को हर संभव तरीके से सुसज्जित किया जाता है ताकि उनका घर बालक येसु के लिए अनुकूल चरनी बने। वहीं दूसरी ओर आध्यात्मिक तैयारी के तहत प्रत्येक मसीही मन, वचन और कर्म की शुद्धता से येसु के आगमन की बाट जोहता है। इसके लिए विश्वासी अंत:करण की शुद्धि में बढ़ते हुए विश्वास, भरोसा और प्रेम से अपने हृदय को सजाते संवारते है। फादर सुशील टोप्पो ने बताया कि हमारी माता कलीसिया आगमन की अवधि में आध्यात्मिक तैयारी हेतु आमंत्रित करती है। यही वजह है किआगमन काल की अवधि में परिवार हो या समुदाय, पल्ली हो या धर्मप्रांत किसी भी तरह के बड़े-बड़े कार्यक्रर्मों आयोजन नहीं किया जाता है। जैसे विवाह, प्रीतिभोज, पार्टिया,सम्मलेन आदि वर्जित है। इसमें ख्रीस्त विश्वासी अपना समय गरीबों और जरुरत मंदों की सेवा में, प्रार्थना में, रिट्रीट में, अपने जीवन का आत्मंथन करने में तथा हर नजरिए से अपने जीवन को ख्रीस्तीय मूल्यों के साथ बेहतर बनाने में, मिस्सा पूजा में शामिल होने, पाप स्वीकार संस्कार ग्रहण करने तथा परोपकार कार्य करने में बिताते है। फादर सुशील टोप्पो ने बताया कि क्रिसमस की आध्यात्मिक तैयारी हमें उस रहस्यात्मक घटना का स्मरण कराती है जिसमें शाश्वत ईश्वर का पुत्र, प्रतिज्ञात मसीह और मानवजाति के मुक्तिदाता शरीर धारण करता है। मानव जाति के इतिहास में यह महानतम, अनुपम और अद्वितीय घटना है। अकल्पनीय वरदान और अपार आनन्द का कारण है। आगमन का काल मसीहियों को यह स्मरण कराता है कि वे पापी हैं और वे अपने आप पाप से उबर नहीं सकते है इसके लिए सभी एक मुक्तिदाता के लिए तरसते है। एक मुक्तिदाता की आशा करते है। साथ ही मुक्तिदाता के आगमन के लिए अनुनय-विनय करते है। उन्होंने कहा कि मसीही विश्वास के अनुसार ईश्वर ने हमें इतना प्यार किया कि उसने अपने एकलौते पुत्र को इस संसार को दे दिया ताकि जो कोई उसपर विश्वास करे उसका सर्वनाश न हो, बल्कि उसे अनन्त जीवन प्राप्त हो। आगमन काल में चार रविवार हैं। जिसमें हमारी कलीसिया क्रमश: चार बिन्दुओं आशा, शांति, आनंद और प्रेम पर ध्यान केंद्रित करती है। प्रत्येक विश्वासी इन्ही मूल बातों पर मनन करते हुए प्रभु के जन्म (क्रिसमस) की तैयारी करते है। उन्होंने बताया कि प्रभु का आगमन हमें याद दिलाता है कि जब हम प्रार्थना के लिए एकत्रित होते है तो हमारे प्रभु विराजते है। जब पवित्र धर्मग्रंथ बाईबल का पाठ करते है तो प्रभु वचन सुनते हैं। हमारे दिलों में प्रभु का आगमन होता है। जब जब हम पवित्र मिस्सा, पवित्र बलिदान में भाग लेते है, तब तब हमारे जीवन में प्रभु का आगमन होता है।

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