65 वर्ष बाद अब चीनी नहीं खिलायेगा अंतिम वाष्प इंजन...

 

एबीएन डेस्क। 65 साल सेवाएं देने के बाद अब पानीपत शुगर मिल को चलाने वाले रेलवे के भाप इंजन अपने आखिरी सफर पर चल दिए हैं। आठ नवंबर से पानीपत शुगर मिल का नया पिराई सत्र शुरू होना है। इस सत्र के खत्म होते ही गांव डाहर में बनी शुगर मिल शुरू हो जाएगी और पुरानी मिल को बंद कर दिया जाएगा। नये शुगर मिलों में इस तरह के भाप इंजन नहीं लगाए जाते हैं। पानीपत के पुराने शुगर मिल की पिराई क्षमता अभी 18 हजार क्विंटल प्रतिदिन की है, लेकिन नये शुगर मिल की पिराई क्षमता 50 क्विंटल रोजाना की होगी और उसको 75 हजार क्विंटल तक बढ़ाया भी जा सकता है। पानीपत शुगर मिल के 65वें पिराई सत्र का 8 नवंबर को सहकारिता मंत्री बनवारी लाल शुभारंभ करेंगे। रेलवे के लिए भाप के इंजन बेशक बीते दिनों की बात हो गई है, लेकिन पानीपत की शुगर मिल रेलवे के भाप इंजनों का इतिहास अभी तक संजोये हुए थी। 1956 में मिल की स्थापना के समय रेलवे के दो भाप इंजनों को खरीद कर लगाया गया था। दोनो भाप इंजन 350-350 हॉर्स पॉवर (एचपी) के है। इन भाप इंजनों की मदद से मिल में बड़े रोलर चलते है और रोलरों द्वारा गन्ने का रस निकाला जाता है। इन दोनों भाप इंजनों द्वारा शुगर मिल में इस साल लगातार 65वें वर्ष गन्ने का रस निकाला जाएगा। हरियाणा ही नहीं देश व एशिया के किसी अन्य शुगर मिल में इस तरह के भाप इंजन नहीं है। बता दें कि यमुनानगर के प्राइवेट शुगर मिल में पहले इस तरह के भाप इंजन होते थे, लेकिन 12-13 वर्ष पहले उनको बंद किया जा चुका है। पहले रेलवे के भाप इंजनों को चलाने के लिए कोयले का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब गन्ने की सुखी खोई को जलाया जाता है। उससे जो स्टीम बनती है, उससे रोलर चलाए जाते हैं। इन इंजनों के चलाने व रखरखाव में ज्यादा खर्च आता है। हर इंजन के लिये एक मेकेनिक व सहायक की जरूरत पड़ती है। वहीं गर्मी के मौसम में तो 48-50 डिग्री के तापमान में काम करना मुश्किल होता है, लेकिन तमाम परेशानियों व ज्यादा खर्च होने के बावजूद भी पानीपत शुगर मिल में ये दोनों भाप इंजन इतिहास रच रहे है। अब दोनों ही अपने अंतिम सफर की ओर निकल पड़े हैं। पानीपत शुगर मिल के एमडी नवदीप सिंह ने बताया कि एशिया की किसी भी शुगर मिल में अब इस तरह के भाप इंजन नहीं हैं। इनको चलाने व रखरखाव पर ज्यादा खर्च होता है और न ही अब इनके स्पेयर पार्ट्स मिलते हैं। इसलिये जिन पुराने शुगर मिलों में पहले इस तरह के भाप इंजन होते थे तो उन्होंने अपने शुगर मिलों को मोडिफाई करके इनको दशकों पहले ही बंद कर दिया है। एमडी ने बताया कि पानीपत शुगर मिल में ये दोनो भाप इंजन इतिहास संजोये हुए हैं। इसलिये इन भाप इंजनों को पानीपत के गांव डाहर में बन रहे नये शुगर मिल में यादगार के तौर पर रखा जाएगा। इन दोनों भाप इंजनों सहित पुराने शुगर मिल की एक डाक्यूमेंटरी फिल्म भी बनाई जाएगी ताकि भविष्य में यादगार जिंदा रह सके।

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