झारखण्ड के प्रमुख त्योहारों में से एक है सोहराई पर्व : सतीश महतो

 

एबीएन डेस्क, रांची। सोहराई पर्व झारखंड प्रदेश के मुख्य त्योहारों में एक प्रमुख पर्व है, जो दीपावली के एक दिन बाद मनाया जाता है। झारखंड में सोहराय पर्व का अपना ही महत्व है। इस पर्व में गाय, बैल, बकरी, भैंस समेत अन्य जानवरों की पूजा की जाती है। उक्त बातें झारखंड प्रदेश रांची महानगर भाजपा प्रबुद्ध प्रकोष्ठ कार्यालय के किसान मोर्चा मंत्री सतीश महतो ने कही। उन्होंने कहा कि दीपावली की सुबह उठकर किसान अपने जानवरों को नदी तालाब आदि विभिन्न जल स्रोतों में ले जाकर नहा लाते हैं। उसके बाद घर लाकर उनका श्रृंगार करते हैं। जानवरों की सींग में पुदीना, गले में हार और शरीर में रंगोली बनाते हैं। उसके बाद गौशाले में ले जाकर मवेशियों के अंगों में तेल लगाया जाता है। खाने के लिए उरद की सामग्री (क्षेत्रीय भाषा कोहरी) दी जाती है। जानवरों के खाने के दौरान ही उनके खाने के बर्तन से कुछ सामान निकालकर किसान खुद एवं पूरे परिवार के साथ थोड़ा-थोड़ा खाते हैं, जिसे बड़ा शुभ माना जाता है। उसके बाद गौशाले में मुर्गा रंगवा की बलि और तपावन हरिया देने की भी परम्परा है। बाद में ढोल, नगाड़ा, पटाका बजाकर मवेशियों के साथ अठखेलियां भी की जाती है।सोहराई पर्व शहर के विकास के साथ ही विलुप्त होती जा रही है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में सोहराय पर्व आज भी बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। सभी झारखंडवासियों को सोहराई और दिवाली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं...

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