एबीएन सेंट्रल डेस्क। ऋतुराज बसंत इन दिनों पूरे शवाब पर है। एक ओर जहां जंगलों और सड़क के किनारे सूर्ख लाल वन ज्योति (पलाश के फूल) और सेमल के फूल प्राकृतिक सौंदर्य को चार चांद लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आम की टहनियों पर खिले आम के मंजर इस बात का एहसास दिला रहे हैं कि इस बार आम की बंपर पैदावार होगी।
पेड़ों पर लदे आम के मंजरों को देखकर किसानों के चेहरे भी खिल गये हैं। आम उत्पादक किसानों को भरोसा है कि इस बार आम की भरपूर फसल होगी। तोरपा प्रखंड के किसान उत्पादक फगुवा सिंह कहते हैं कि मौसम अनुकूल रहा और मार्च-अप्रैल में थोड़ी बहुत बारिश हो गई, तो पिछल वर्ष की तुलना में आम की उपज अच्छी होगी। उनका कहना है कि मदमस्त बसंती बयार यदि आंधी में तब्दील हो गई, तो आम के मंजर झड़ जायेंगे। किसानों का कहना है कि लाही और मधुवा रोग का प्रकोप अभी से दिखने लगा है।
खूंटी जिले में बीजू आम के साथ ही मालदा, दशहरी सहित अन्य वैरायटी के आम की भरपूर पैदावार होती है। किसान अभी से मंजरों पर दवा का छिड़काव करने लगे हैं। जिला प्रशासन ने बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत जिले के छह प्रखंडों खूंटी, तोरपा, कर्रा, रनिया, मुरहू और अड़की प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में छह हजार एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में आम की बागवानी की है।
तोरपा के ही सुंदारी गांव के आम उत्पादक किसान और जिला परिषद के पूर्व सदस्य प्रेमजीत भेंगरा कहते हैं कि झारखंड खासकर खूंटी जिले की जलवायु और भौगोलिक स्थिति आम की फसल के लिए काफी उपयुक्त है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां उद्यानिक खेती की आपार संभावनाएं हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र के किसान परंपरागत खेती के अलावा आम, ड्रैगन फ्रूट, लीची, अमरूद स्ट्रोबेरी जैसे फलों और सुंगध फूलों की खेती के अलावा लेमनग्रास आदि के उत्पादन में रुचि ले रहे हैं। भेंगरा ने कहा कि आम की फसल में मेहनत और लागत कम होने के कारण किसान इसकी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
तोरपा के 3600 किसान कर रहे आम की बागवानी : जिले में कार्यरत स्वयंसेवी संस्था प्रदान के अधिकारी रवि रंजन कुमार बताते हैं कि यहां कि मिट्टी आम ही नहीं, अन्य फलों और फूलों की खेती के लिए काफी अनुकूल है। उन्होंने कहा कि सिर्फ तोरपा प्रखंड में पिछले छह वर्षों में बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत बड़े पैमाने पर आम की बागवानी की गई है।
तोरपा एक ऐसा प्रखंड है, जिसमें बिरसा हरित ग्राम योजना के अंतर्गत पूरे झारखंड में सबसे अधिक आम बागवानी हुई है। आम बागवानी से 3600 किसान जुड़े हैं। तोरपा में इस वर्ष पांच से छह सौ एकड़ में आम की बागवानी की गयी है।
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