हेमंत सरकार के दो साल पूरे होने के बाद खिलाफत पर उतरेगा भाजमो

 

जमशेदपुर। वर्तमान में निर्दलीय विधायक एवं पूर्व मंत्री सरयू राय द्वारा प्रवर्तित क्षेत्रीय राजनीतिक दल भारतीय जनतंत्र मोर्चा (भाजमो) का झंडा और उसका प्रतीक चिह्न यहां धालभूम क्लब में आयोजित पंडित दिन दयाल उपाध्याय जयंती समारोह में कार्यकर्ताओं के सामने विधिवत लांच किया गया। इसके साथ ही झारखंड प्रदेश स्तर पर पार्टी का वृहद सदस्यता अभियान का श्रीगणेश पार्टी ध्वज कार्यकर्ताओं को समर्पित कर किया गया। पार्टी ध्वज हरा, नीला सफेद और केशरिया रंग की पट्टी वाला है। बीच में गोलाकार पीला रंग की पृष्ठभूमि में केशरिया रंग वाले दो त्रिभुज बने हुए हैं। पार्टी को चुनाव आयोग में पहले ही पंजीकृत कराया जा चुका है। सरयू राय ने कहा कि झारखंड में सुशासन रहे और भ्रष्टाचार न रहे यह सुश्चित करना हमारा ध्येय है। मैं अब तक वर्तमान सरकार को 20 से अधिक चिठ्ठियां लिख कर इस दिशा में बरती जा रही खामियों की ओर ध्यान दिला चुका हूं। सरकार के साल पूरे होने के बाद इन चिठ्ठियों को लेकर मैं जनता के बीच जाउंगा और बताउंगा कि कैसे सत्ता में बैठे लोग सुशासन की जगह वन मैन आर्मी की तरह सरकार चला रहे हैं। सत्ता के कालनेमियों को उजागर करना मेरा फर्ज होगा। सरयू राय ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी जन संघ के संस्थापक पं दीन दयाल उपाध्याय के बताये मार्ग का अनुशरण करते हुए अंत्योदय और एकात्म मानववाद के सिद्धांतों पर ही कदमताल करेगी। राय ने यह भी संकेत दिया कि इस सिद्धांत का सही रुप से पालने करने वाली अथवा आम जनता और मध्यम वर्ग के हित में खड़ा होने वाली पार्टी के साथ निकट भविष्य में राजनीतिक समझौते पर विचार कर सकती है। भाजमो के प्रवर्तक सरयू राय ने पार्टी की नीतियों और सिद्धांत के साथ यह भी स्पष्ट किया कि झारखंड और यहां के संसाधनों पर आदिवासियों, मूलवासियों और प्रवासियों का समान रुप से हक है जो 1 5 नवंबर 2000 झारखंड बनने के दिन तक यहां कार्यरत थे,सेवारत थे और व्यापाररत अथवा अध्ययनरत थे। इसलिए भाजमो झारखंड की पहली पार्टी होगी जो आदिवासियों, मूलवासियों और प्रवासियों के बीच समन्वय एवं सद्भावपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देते हुए झारखंड का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करेगी। सरयू ने याद दिलाया कि झारखंड राज्य के आंदोलन को स्थानीय क्षेत्रीय दल बेचते और समझौता करते आये हैं किन्तु अलग राज्य तब बना जब गैर आदिवासी दल के पीएम अटल बिहारी वाजपेयी पीएम थे और झारखंड के साथ उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ राज्य के गठन का प्रस्ताव तत्कालीन गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने प्रस्तुत किया। अलग झारखंड राज्य के प्रस्ताव के खिलाफ एक दल के प्रमुखने कह ा था कि झारखंड उनकी लाश पर बनेगाजबकि कांग्रेस पार्टी झारखंड आंदोलन को खरीदती आयी है। आज इन दोनों दलों के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा की हेमंत सरकार चल रही है। सरयू ने भाजमो के तमाम कार्यकर्ताओं को गरीबों, छात्रों और बेरोजगारों के पक्ष में खड़ा होने और पानी, बिजली, सड़क जैसी मूलभूत समस्याओं को लेकर सत्ता पक्ष के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया। मौके पर महानगर अध्यक्ष सुबोध श्रीवास्तव, महिला मोर्चा की अध्यक्ष श्रीमती मंजू सिंह समेत अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।

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