रांची। बुधवार को भारतीय किसान संघ राज्यभर के उपायुक्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक ज्ञापन सौंपेगा, जिसके माध्यम से किसानों को उनकी उपज की लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य सुनिश्चित कराने की मांग की जायेगी। उक्त जानकारी संघ के प्रदेश प्रवक्ता सह भारतीय एग्रो इकोनॉमिक्स रिसर्च के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश कुमार सिंह ने दी। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान संघ ने 11 अगस्त 2021 को एक ज्ञापन सौंपा था, जिसपर प्रधानमंत्री कार्यालय से पत्र के संदर्भ में कोई भी जवाब नहीं आना निराशाजनक रहा। पीएम से आग्रह किया गया था कि केंद्र सरकार अलग-अलग प्रकार की कई योजनाएं चला रही हैं, परंतु मुख्य विषय जो किसानों में अशांति का कारण बना हुआ है, वह ह ैकिसानों को उनकी उपज का लागत आधारित लाभकारी मूल्य नहीं मिलना। न्यूनतम समर्थन मूल्य तय होने के बावजूद मंडियों में किसानों की उपज उससे कम मूल्य पर बिकती हैं। कृषि उत्पादों के मूल्य को हमेशा नियंत्रित रखा गया जिससे स्वतंत्र बाजार व्यवस्था विकसित नहीं हो सकी और अब कृषि आदान तो महंगी होते जा रहे हैं। परंतु न्यूनतम समर्थन मूल्य बहुत पीछे छूट गया है। किसानों को आदान पूर्तिकर्ता, उनकी उपज का व्यापार करनेवाले तथा उद्योग चलाने वाले सभी तो फल फूल रहे हैं। संपन्न हो रहे हैं, लेकिन स्वयं किसान कर्जदार व गरीब से और गरीब होता जा रहा है। देश के सभी कृषि वैज्ञानिक/ संस्थान केवल उत्पादन बढ़ाने में लगे हैं। अब समय आ गया है कि किसान की आय बढ़ाने या लागत घटाने पर भी प्राथमिकता से कार्य किया जाना चाहिए। बाजार भाव एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य में प्रति क्विंटल से सैकड़ों रुपए का अंतर है। न्यूनतम समर्थन मूल्य का केवल एक दो प्रांतों को ही लाभ मिल पाता है और शेष देशभर के किसान वंचित रह जाते हैं ऐसे में कोई तो समाधान जरूरी हो ही जाता है अत: निम्न बिंदुओं पर सकारात्मक कार्रवाई कर किसानों को आर्थिक संकट से निकाला जाए। 1. किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के बजाय लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य देना होगा। 2. एक बार घोषित मूल्य के बाद उसके आदानों में होनेवाली महंगाई का भुगतान के समय समायोजन करते हुए महंगाई के अनुपात में वास्तविक मूल्य चुकाना होगा। 3. घोषित मूल्य पर किसान की उपज का बेचना सुनिश्चित हो, फिर चाहे वह मंडी में बेचे, चाहे मंडी के बाहर या फिर चाहे सरकार खरीदे, लेकिन घोषित मूल्य से कम मूल्य पर क्रय-विक्रय को अपराध मानना होगा। यह सब केवल और केवल तभी संभव है जब इस बाबत कठोर कानून बनेगा, ऐसे में लागत आधारित Ñलाभकारी मूल्य की गारंटी कानून बनाया जाए। भारत का किसान अपने राष्ट्रीय दायित्व को भी भली-भांति समझता है, इसीलिए इस ज्ञापन के माध्यम से सरकार को आगाह किया जाता है कि संदर्भित पत्र दिनांक 11 अगस्त 2021 पर सकारात्मक कार्यवाही की अपेक्षा से किसानों ने 31 अगस्त तक इंतजार किया। लेकिन खेद है कि इसपर कोई जवाब नहीं आया। ऐसे में भारतीय किसान संघ द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार 8 सितंबर 2021 को हम जिला खूंटी प्रांत झारखंड के समस्त किसान एक दिवसीय धरना में भाग लेते हुए पुन: सकारात्मक कदम उठाने की अपील करेंगे। यदि 10 दिन में कोई आमंत्रण सूचना प्राप्त नहीं हुई तो भारतीय किसान संघ खेती छोड़ सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।
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