एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि नाग पंचमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो प्रतिवर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष नाग पंचमी 17 अगस्त दिन सोमवार को मनायी गयी। पंचांग के अनुसार इस दिन श्रावण शुक्ल पंचमी है और यह पर्व भगवान शिव की आराधना के साथ भी विशेष रूप से जुड़ा हुआ है।
नाग पंचमी का मूल उद्देश्य नाग देवता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना, प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना तथा परिवार की सुख-शांति एवं मंगल की कामना करना है। भारतीय संस्कृति में नागों को केवल सर्प के रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति की महत्वपूर्ण शक्ति और देवत्व के प्रतीक के रूप में देखा गया है। भगवान शिव के गले में विराजमान नाग तथा भगवान विष्णु की शेषनाग पर शयन मुद्रा नागों की धार्मिक महत्ता को दशार्ती है।
नाग पंचमी से जुड़ी अनेक पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। महाभारत से जुड़ी प्रसिद्ध कथा के अनुसार राजा परीक्षित की मृत्यु सर्पदंश से होने के बाद उनके पुत्र जनमेजय ने नागों के विनाश के लिए विशाल सर्पसत्र यज्ञ कराया। यज्ञ में बड़ी संख्या में नाग आहुति के रूप में गिरने लगे। तब आस्तिक मुनि ने हस्तक्षेप कर राजा जनमेजय से यज्ञ रोकने का आग्रह किया। उनके आग्रह को स्वीकार करते हुए सर्पसत्र समाप्त किया गया और नागों की रक्षा हुई।
इसी प्रसंग को नाग पंचमी की परंपरा से जोड़ा जाता है। एक अन्य प्रसिद्ध कथा भगवान श्रीकृष्ण और कालिया नाग से संबंधित है। मान्यता है कि कालिया नाग के विष से यमुना का जल दूषित हो गया था। बाल कृष्ण ने यमुना में प्रवेश कर कालिया नाग को परास्त किया और उसके फणों पर नृत्य किया। अंतत: कालिया ने श्रीकृष्ण के समक्ष समर्पण किया और यमुना छोड़कर चला गया।
यह कथा बुराई पर अच्छाई की विजय और प्रकृति की शुद्धता का संदेश देती है। पूजन की परंपरा और महत्ता नाग पंचमी के दिन श्रद्धालु नाग देवता की प्रतिमा, चित्र या नाग मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। दूध, जल, अक्षत, पुष्प, चंदन, हल्दी, फल और मिठाई आदि अर्पित किये जाते हैं। अनेक स्थानों पर भगवान शिव का जलाभिषेक कर नाग देवता की पूजा की जाती है। व्रत रखने और नाग देवता के मंत्रों का जाप करने की भी परंपरा है।
इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलन एवं सह-अस्तित्व का संदेश देता है। नाग खेतों और पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए नाग पंचमी हमें प्रत्येक जीव के प्रति करुणा, संरक्षण और सम्मान की भावना अपनाने की प्रेरणा देती है। नाग पंचमी केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति संरक्षण, जीव-दया, भय पर विजय और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है।
इस अवसर पर हमें जीवित सांपों को पकड़कर या उन्हें परेशान कर पूजा करने के बजाय उनके प्राकृतिक आवास और जीवन की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए। श्रद्धा के साथ पर्यावरण संरक्षण का यह संदेश नाग पंचमी की परंपरा को और अधिक सार्थक बनाता है।नाग पंचमी का संदेश स्पष्ट है प्रकृति का सम्मान करें, जीव-जंतुओं के प्रति करुणा रखें और आस्था को मानवता एवं पर्यावरण संरक्षण से जोड़ें।
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