एबीएन न्यूज नेटवर्क, बोकारो। यह कोई आम लापता होने का मामला नहीं है। यह एक सिस्टम की नाकामी, एक मां की साढ़े पांच साल की तड़प और एक पूरे समाज के जमीर पर सवाल है। झारखंड के बोकारो जिले के पिंड्राजोडा थाना क्षेत्र में दिनांक 16 अक्टूबर 2020 को ट्यूशन के लिए निकली 14 वर्षीय सेजल झा उर्फ पाखी कुमारी झा आज 01 अगस्त 2026 तक भी वापस नहीं लौटी। साढ़े पांच साल बीत गये। एक बच्ची जो सुबह साइकिल पर किताबें लेकर निकली थी, उसकी साइकिल, चप्पलें और बैग सड़क पर बिखरे मिले। और उसके बाद... सन्नाटा।
सेजल की मां उषा झा पेशे से शिक्षिका हैं। पिछले 2000 दिन से ज्यादा समय से वे दर-दर भटक रही हैं। बोकारो डीसी आॅफिस, थाना, कोर्ट और यहां तक कि राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री कार्यालय का दरवाजा भी खटखटाया है। स्थानीय पुलिस की जांच शुरू से ही संदिग्ध और विचित्र बयान बाजी रही है। 4 संदिग्ध आये, नार्को टेस्ट हुए, फाइलें धूल खाती रहीं जब जब मां का पीड़ा कराहता तो आश्वासन मिलता रहा है। बोकारो पुलिस सिर्फ आश्वासन देती रही है।
अप्रैल 2026 में जब मामला सीआईडी को गया और जुलाई 2026 में झारखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई को पक्षकार बनाकर सीआईडी के साथ संयुक्त जांच का आदेश दिया, तब जाकर लगा कि शायद अब न्याय मिलेगा। लेकिन आज तक सेजल का एक भी सुराग नहीं मिला है। सामाजिक कार्यकर्ता और मंडल समाज के केंद्रीय महामंत्री गौतम मंडल ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा की यह सिर्फ एक केस नहीं है, यह भारत की बेटी का सवाल है।
उन्होंने अपील की है कि प्रत्येक घर से आवाज उठने लगे तो भारत की बेटी सेजल झा का पता चल जायेगा। पूरी दुनिया में सेजल झा के लिए आवाज उठानी ही चाहिए। पहले भी लोग कैंडल मार्च निकालकर न्याय मांग चुके हैं। श्री मंडल ने कहा कि सभी जाति, समुदाय, सभी राजनीतिक पार्टी भारत की बेटी के लिए आवाज उठायें। उनका कहना है- जब तक हर घर, हर गली से एक आवाज नहीं निकलेगी, सिस्टम नहीं जागेगा।
सेजल घर नहीं लौटेगी। उषा झा की पीड़ा सिर्फ एक मां की पीड़ा नहीं, यह हम सब की पीड़ा है। सभी पीड़ित परिवार के साथ खड़े हों। और सबसे जरूरी पूरे भारत देश में मानव तस्करी पर रोक लगाने के लिए हर तरफ से आवाज उठनी चाहिए। श्री मंडल ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आज हम चुप रहे तो कल किसी और की बेटी गायब होगी। सेजल जैसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए समाज को अब जागना पड़ेगा।
5.5 साल। 66 महीने। 2000 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। एक बच्ची गायब है और फाइलें चल रही हैं। सेजल झा का मामला अब केवल एक लापता किशोरी का केस नहीं रहा। यह देश की कानून व्यवस्था, बेटियों की सुरक्षा और हमारी संवेदनशीलता का इम्तिहान है।
हर नागरिक, हर संगठन, हर मीडिया से अपील है - एक बार जोर से पूछिए सेजल कहां है? शायद इसी एक सवाल से किसी को सुराग मिल जाए और एक मां का इंतजार खत्म हो जायें।
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