एबीएन सेंट्रल डेस्क। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) ने नई दिल्ली में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श इंश्योरिंग ए चाइल्ड राइट्स, पोटेंशियल एंड प्रास्पेरिटी के दौरान नेशनल कैंपेन अगेंस्ट चाइल्ड ट्रैफिकिंग की शुरुआत की।
चाइल्ड ट्रैफिकिंग के खिलाफ यह अभियान देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी 782 जिलों में जेआरसी अपने 250 से अधिक सहयोगी संगठनों के जरिए चलाएगा। इस अभियान का लक्ष्य अगले एक वर्ष में 1.5 लाख गांवों को चाइल्ड ट्रैफिकिंग से मुक्त बनाकर, ट्रैफिकिंग के शिकार हुए एक लाख बच्चों को बचाना है।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले नागरिक समाज संगठनों का देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है जो जमीन पर जिला प्रशासन, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, बाल कल्याण समितियों और पंचायती राज संस्थाओं के साथ मिलकर ट्रैफिकिंग के शिकार बच्चों की पहचान, बचाव, पुनर्वास कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ता है।
इसके तहत ट्रैफिकरों और उनके संगठित गिरोहों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही कानूनी हस्तक्षेप को मजबूत बनाने पर भी विशेष जोर रहेगा, ताकि हर पीड़ित बच्चे को न्याय मिल सके। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो 2024 के अनुसार देश में रोजाना 6 बच्चों की ट्रैफिकिंग होती है और 5 बच्चों को जबरन मजदूरी के लिए मजबूर किया जाता है। इसके अलावा हर घंटे 11 बच्चे गुम हो जाते हैं।
इनमें से अधिकांश बच्चे ट्रैफिकिंग का ही शिकार होते हैं। ह्यूमन ट्रैफिकिंग हथियारों और ड्रग्स के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध है। महिलाएं और बच्चे खास तौर से इनके निशाने पर हैं, क्योंकि इनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा देह व्यापार और बच्चों से बंधुआ मजदूरी के रास्ते आता है। वहीं असंगठित क्षेत्र में बच्चों से बाल मजदूरी ट्रैफिकिंग के सबसे प्रचलित रूपों में से है।
इस अभियान के तहत ग्राम सभाओं, स्कूलों और पंचायतों के जरिए व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। जागरूकता कार्यक्रमों, पोस्टरों, बैनरों और विभिन्न गतिविधियों के जरिए परिवारों व समुदायों को बच्चों की ट्रैफिकिंग के बदलते रूपों और पीड़ितों बच्चों के कानूनी अधिकारों व उपायों की जानकारी दी जाएगी। अभियान में चाइल्ड ट्रैफिकिंग के संवेदनशील क्षेत्रों और सीमावर्ती जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
साथ ही, ट्रैफिकिंग से जुड़े नए तरीकों को पहचान कर उसकी सूचना देने के लिए समुदायों को भी जागरूक और सतर्क बनाया जाएगा। और वंचित और कमजोर बच्चों की पहचान कर उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं और कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ने के साथ ही उनका स्कूलों में दाखिला कराया जाएगा, ताकि वे ट्रैफिकिंग से बच सकें।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, हमारी संसद ने ट्रैफिकिंग के खिलाफ दुनिया के सबसे सख्त कानूनों में से एक बनाकर अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दिखाई है। अब जरूरत है कि इनका जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। हर मामले की त्वरित रिपोर्टिंग, समय रहते बचाव, जांच, कार्रवाई और पुनर्वास के समन्वित प्रयास से चाइल्ड ट्रैफिकिंग के इस संगठित अपराध को हम 2030 तक समाप्त कर सकते हैं। इस खबर से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।
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