टीम एबीएन, रांची। रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत मंडप में शनिवार को आयोजित जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा कांक्लेव- 2026 का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन संयोजक एवं पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कांक्लेव में झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन, उच्च शिक्षा, शोध, रोजगार, डिजिटल विकास तथा नयी शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम में लगभग 4000 छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों, भाषाविदों, साहित्यकारों, प्राध्यापकों, सहायक प्राध्यापकों, शिक्षकों, विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्रतिनिधियों तथा भाषा प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पूरे आयोजन के दौरान झारखंड की भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता की जीवंत झलक देखने को मिली। कार्यक्रम का शुभारंभ झारखंड की पारंपरिक संस्कृति के अनुरूप नगाड़ा बजाकर एवं पारंपरिक विधि-विधान के साथ किया गया, जबकि कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ गरिमामय वातावरण में हुआ।
मौके पर रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) सरोज शर्मा, डीएसडब्ल्यू प्रो. (डॉ.) सुदेश साहू, कोलेबिरा के विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी, संयोजक एवं पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की सहित झारखंड की नौ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के विद्वान, साहित्यकार, शिक्षाविद, शोधार्थी एवं भाषा प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कांक्लेव के विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने कहा कि मातृभाषाएं केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की संस्कृति, इतिहास, परंपरा और पहचान की आधारशिला हैं। इनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सरकार, विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और समाज के सभी वर्गों को मिलकर कार्य करना होगा।
विशेषज्ञों एवं विद्वानों ने सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे। इनमें जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षकों के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति, विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में विभागों को सुदृढ़ करना, उच्च शिक्षा एवं शोध को बढ़ावा देना, डिजिटल अध्ययन सामग्री एवं ई-लर्निंग संसाधनों का विकास, लोक साहित्य एवं सांस्कृतिक धरोहर का दस्तावेजीकरण तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से भाषाओं के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार जैसे सुझाव प्रमुख रहे।
कांक्लेव में उपस्थित सभी विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं ने राज्य सरकार से यह भी आग्रह किया कि जिन जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विषयों को क्लस्टर सिस्टम के नाम पर स्नातक नामांकन सूची से बाहर कर दिया गया है, उन्हें पुन: नामांकन प्रक्रिया में शामिल किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सके तथा इन भाषाओं के अस्तित्व, अध्ययन और विकास को नयी गति मिल सके। इसके साथ ही वक्ताओं ने नयी रूप से लागू करने तथा जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को रोजगार, शोध और तकनीकी विकास से जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
कार्यक्रम के अंत में सभी विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं भाषा प्रेमियों ने जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन, प्रचार-प्रसार तथा भावी पीढ़ियों तक उनके प्रभावी हस्तांतरण के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया। जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा कांक्लेव- 2026 झारखंड की भाषाई एवं सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक पहल साबित हुआ।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse