एबीएन सेंट्रल डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि विश्व महासागर दिवस प्रत्येक वर्ष 8 जून को मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य महासागरों के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा उनके संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना है।
महासागर पृथ्वी के लगभग 71 प्रतिशत भाग को आच्छादित करते हैं और मानव जीवन, जैव विविधता तथा वैश्विक जलवायु संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विश्व महासागर दिवस की अवधारणा वर्ष 1992 में ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित पृथ्वी शिखर सम्मेलन में प्रस्तुत की गयी थी।
इसके बाद वर्ष 2008 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने आधिकारिक रूप से 8 जून को विश्व महासागर दिवस के रूप में मान्यता प्रदान की। तब से यह दिवस पूरी दुनिया में विभिन्न कार्यक्रमों, संगोष्ठियों, जागरूकता अभियानों और पर्यावरणीय गतिविधियों के माध्यम से मनाया जा रहा है।
महासागर पृथ्वी के सबसे बड़े प्राकृतिक संसाधन हैं। वे मानवता को भोजन, आॅक्सीजन, ऊर्जा, औषधीय संसाधन और रोजगार प्रदान करते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी के वायुमंडल में उपलब्ध लगभग 50 प्रतिशत आॅक्सीजन का उत्पादन महासागरों में रहने वाले सूक्ष्म जीवों द्वारा किया जाता है। इसके अलावा महासागर वैश्विक तापमान को नियंत्रित करने तथा कार्बन डाइआॅक्साइड को अवशोषित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विश्व महासागर दिवस का प्रमुख उद्देश्य समुद्री प्रदूषण, प्लास्टिक कचरे, अत्यधिक मत्स्य दोहन, जलवायु परिवर्तन और समुद्री जैव विविधता के क्षरण जैसी समस्याओं के प्रति लोगों को जागरूक करना है। यह दिवस सरकारों, वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों और आम नागरिकों को महासागरों के संरक्षण के लिए एकजुट होने का अवसर प्रदान करता है।
इस दिवस की विशेषता यह है कि यह केवल समुद्री क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करता है। प्लास्टिक के उपयोग में कमी, जल स्रोतों की स्वच्छता, समुद्री जीवों की सुरक्षा और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाकर महासागरों को सुरक्षित बनाया जा सकता है।
आज जब समुद्री प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन वैश्विक चिंता का विषय बने हुए हैं, तब विश्व महासागर दिवस हमें यह संदेश देता है कि महासागरों की रक्षा करना मानवता के भविष्य की रक्षा करना है। स्वच्छ, स्वस्थ और सुरक्षित महासागर ही आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्ध और संतुलित पृथ्वी का आधार बन सकते हैं। अत: हमें महासागरों के संरक्षण को अपनी सामूहिक जिम्मेदारी मानते हुए सतत प्रयास करने चाहिए।
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