राजस्थान दिवस गौरव, एकता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक: संजय सर्राफ

 

  • राजस्थान दिवस गौरव, एकता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक: संजय सर्राफ

टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के सबसे विशाल राज्यों में से एक राजस्थान अपनी वीरता, समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक वैभव के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इसी गौरवशाली इतिहास और एकता के प्रतीक के रूप में हर वर्ष 30 मार्च को राजस्थान दिवस या राजस्थान स्थापना दिवस मनाया जाता है। 

यह दिन वर्ष 1949 में विभिन्न रियासतों के एकीकरण के बाद आधुनिक राजस्थान राज्य के गठन की स्मृति में मनाया जाता है, स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में अनेक रियासतें थीं, जिनका एकीकरण एक बड़ी चुनौती थी। राजस्थान क्षेत्र में भी जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, जैसलमेर सहित कई रियासतें अस्तित्व में थीं। 

सरदार वल्लभभाई पटेल और वी.पी. मेनन के प्रयासों से इन सभी रियासतों को मिलाकर 30 मार्च 1949 को ग्रेटर राजस्थान का निर्माण हुआ। यही ऐतिहासिक घटना राजस्थान दिवस के रूप में मनाई जाती है।राजस्थान दिवस केवल एक ऐतिहासिक घटना की स्मृति नहीं है, बल्कि यह राज्य की एकता, संस्कृति और विकास का उत्सव भी है। 

इस दिन राज्यभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिनमें परेड, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, लोक नृत्य, संगीत, कला प्रदर्शनियां और सरकारी समारोह शामिल होते हैं। जयपुर, उदयपुर, जोधपुर जैसे प्रमुख शहरों में विशेष आयोजन होते हैं, जो देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। राजस्थान दिवस का मुख्य उद्देश्य राज्य की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और प्रचारित करना है। 

यह दिन लोगों को अपने गौरवशाली इतिहास, वीरता की गाथाओं और समृद्ध लोक परंपराओं से जोड़ने का अवसर प्रदान करता है। महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान, राणा सांगा जैसे वीरों की शौर्यगाथाएं आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं। साथ ही यह दिन राज्य के विकास, सामाजिक एकता और प्रगति के प्रति संकल्प को भी सुदृढ़ करता है।

राजस्थान अपनी विविध संस्कृति, रंग-बिरंगे परिधानों, लोक संगीत, नृत्य और खान-पान के लिए जाना जाता है। कालबेलिया, घूमर, चकरी जैसे लोक नृत्य और मांड, पधारो म्हारे देश जैसे लोकगीत इसकी पहचान हैं। यहां के किले, महल और हवेलियां राज्य के समृद्ध इतिहास की गवाही देते हैं।

अंततः राजस्थान दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि यह राज्य की पहचान, एकता और गौरव का प्रतीक है। यह दिन हमें अपने अतीत पर गर्व करने और उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। राजस्थान की यह गौरवगाथा सदैव देशवासियों के हृदय में सम्मान और प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

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