टीम एबीएन, रांची। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग,रांची द्वारा आयोजित तीन दिवसीय (20-22 मार्च) अखिल भारतीय स्प्रिंग आर्ट कैंप-2026 का आज दिनांक 22 मार्च को प्रकृति 2026 थीम के साथ गरिमामय एवं भव्य समापन हुआ। विशेष बात यह रही कि इस महत्वपूर्ण आयोजन का अंतिम दिवस, अर्थात विश्व जल दिवस के अवसर पर संपन्न हुआ, जिसने पूरे आयोजन को प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ जल संवर्द्धन और जल संरक्षण के गहरे संदेश से जोड़ दिया।
यह तीन दिवसीय कला महोत्सव केवल चित्रों का आयोजन नहीं था, बल्कि यह प्रकृति के प्रति प्रेम, संवेदना, जिम्मेदारी और जनजागरण का एक सशक्त अभियान बनकर सामने आया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिष्ठित एवं प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपने कैनवास पर वनों की हरियाली, नदियों की लय, पक्षियों का सौंदर्य, वन्यजीवों की गरिमा, पृथ्वी की पीड़ा और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को अत्यंत जीवंत, भावपूर्ण और प्रभावशाली रूप में उकेरा।
समापन समारोह में कला और प्रकृति के इस अद्भुत संगम को और अधिक आकर्षक बनाया सांस्कृतिक कार्यक्रमों जैसे सरायकेला के कलाकारों ने छऊ नृत्य पेश किया, जिसने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। लोक-संस्कृति, संगीत और मंचीय प्रस्तुतियों ने यह संदेश सशक्त रूप से दिया कि भारतीय संस्कृति और प्रकृति का संबंध केवल परंपरा का विषय नहीं, बल्कि जीवन दर्शन का आधार है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह में एक ऐसा भावनात्मक और सौंदर्यपूर्ण वातावरण निर्मित किया, जहाँ रंग, राग और प्रकृति एक साथ संवाद करते दिखाई दिए। समारोह में उपस्थित गणमान्य अतिथियों, वरिष्ठ अधिकारियों, कलाकारों, विद्यार्थियों एवं कला प्रेमियों की उपस्थिति ने पूरे आयोजन को अत्यंत गरिमामय बना दिया।
इस अवसर पर शिविर में भाग लेने वाले सभी कलाकारों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए स्मृति-चिह्न एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कलाकारों का सम्मान करते हुए यह रेखांकित किया गया कि उनकी कृतियाँ केवल सृजन नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करने वाली सशक्त दृश्य भाषा हैं।
इसके बाद पीसीसीएफ हॉफ, झारखण्ड श्री संजीव कुमार ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब कलाकार का हृदय प्रकृति के लिए धड़कता है, तब कैनवास पर केवल चित्र नहीं उभरते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए चेतना, करुणा और संरक्षण का संदेश आकार लेता है।
उन्होंने यह भी कहा कि विश्व जल दिवस के अवसर पर इस कला शिविर का समापन अत्यंत अर्थपूर्ण है, क्योंकि जल ही जीवन का मूल है, वन ही संतुलन का आधार हैं और प्रकृति ही मानव सभ्यता की सबसे बड़ी संरक्षक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि जल बचेगा, तो कल बचेगा, यदि वन बचेंगे, तो जीवन बचेगा और यदि प्रकृति बचेगी, तो मानवता बचेगी।
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