जल-जंगल-जमीन के अधिकार पर जोर, सांसद सुखदेव भगत ने डीसी से की सीधी बातचीत

 

  • जल-जंगल-जमीन के अधिकार पर जोर, सांसद सुखदेव भगत ने डीसी से की सीधी बातचीत
  • पेसा कानून लागू करने को ले सांसद सुखदेव भगत को उपायुक्त ने 10 दिनों के अन्दर काम प्रारंभ करने का दिया आश्वासन

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समाज को जल, जंगल और जमीन पर अधिकार दिलाने वाले पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर लोहरदगा में आवाज तेज हो गई है। जिले के सांसद सुखदेव भगत ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि पेसा कानून को लागू करने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए, ताकि ग्रामसभाओं को उनका वास्तविक अधिकार मिल सके और आदिवासी समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूती मिल सके। 

इसी मुद्दे को लेकर सांसद सुखदेव भगत ने सामाजिक प्रतिनिधियों दीवान और बेल के साथ लोहरदगा उपायुक्त डॉ. ताराचंद से मुलाकात कर जिले में पेसा कानून के क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान सांसद ने प्रशासन से आग्रह किया कि जल्द से जल्द पेसा कानून को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि अनुसूचित क्षेत्रों के गांवों में ग्रामसभा को विकास योजनाओं और स्थानीय संसाधनों पर निर्णय लेने का अधिकार मिल सके। 

सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि पेसा कानून आदिवासी समाज के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों का संरक्षण करने वाला एक महत्वपूर्ण कानून है। इसके लागू होने से ग्रामसभाओं को स्थानीय संसाधनों के उपयोग और प्रबंधन, विकास योजनाओं की स्वीकृति तथा सामाजिक मामलों में निर्णय लेने की शक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह कानून आदिवासी परंपरा और स्वशासन की व्यवस्था को मजबूत करेगा और ग्रामीण स्तर पर लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा देगा।

उन्होंने यह भी कहा कि पेसा कानून लागू होने के बाद ग्रामसभाओं को गांव के विकास, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सामाजिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण अधिकार मिलते हैं। इसके तहत छोटे वन उत्पादों के उपयोग और प्रबंधन, जल संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय विकास योजनाओं की स्वीकृति तथा भूमि अधिग्रहण से पहले ग्रामसभा की सहमति को अनिवार्य माना जाता है। इससे आदिवासी समाज को अपने गांव और संसाधनों के प्रबंधन में सीधी भागीदारी का अवसर मिलता है। 

गौरतलब है कि पेसा कानून यानी पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत व्यवस्था को लागू करने और आदिवासी समुदाय को स्थानीय शासन में अधिकार देने के उद्देश्य से बनाया गया था। झारखंड में लंबे समय से इस कानून को पूरी तरह लागू करने की मांग उठती रही है और हाल के वर्षों में राज्य सरकार ने इसके नियमों को मंजूरी देकर ग्रामसभाओं को सशक्त बनाने की दिशा में कदम उठाया है। 

मौके पर पारंपरिक स्वशासन पड़हा व्यवस्था लोहरदगा के वेल विजय उरांव, उप वेल शिवशंकर टाना भगत, देवान संजीव भगत, उप देवान जतरू उरांव और कोटवार रामकिशुन उरांव समेत बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के प्रतिनिधि मौजूद थे। इसके अलावा इंटक के जिलाध्यक्ष आलोक साहू, साजिद अहमद, नेसार अहमद, सोनू कुरैशी सहित अन्य लोग भी उपस्थित थे।

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