एबीएन बिजनेस डेस्क। पिछले कुछ महीनों में चांदी की कीमतों ने निवेशकों को जबरदस्त रोलरकोस्टर राइड दी है। नये साल की शुरुआत में जहां चांदी ने रिकॉर्ड ऊंचाई छूकर शानदार रिटर्न दिया, वहीं जनवरी के आखिर में आयी ऐतिहासिक गिरावट ने बाजार को हिला दिया। ऐसे में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल है- क्या चांदी फिर तेजी पकड़ेगी या उतार-चढ़ाव जारी रहेगा?
2026 की शुरुआत में चांदी की कीमतें एक औंस (31.10 ग्राम) पर 121 डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर तक पहुंच गयी थीं। मुद्रास्फीति की चिंता, अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की मांग ने कीमतों को मजबूती दी।
कॉमेक्स एक्सचेंज पर ट्रेडिंग वॉल्यूम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा और सिल्वर ईटीएफ में भारी निवेश देखने को मिला, लेकिन 30 जनवरी 2026 को बाजार ने बड़ा झटका दिया। जब एक ही दिन में कीमतों में 30% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गयी। फरवरी की शुरुआत में चांदी करीब 88 डॉलर प्रति औंस पर आ गयी।
इस गिरावट के पीछे औद्योगिक मांग या आपूर्ति नहीं, बल्कि राजनीतिक और मौद्रिक संकेतों की बड़ी भूमिका रही। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नेतृत्व को लेकर आयी खबरों से डॉलर मजबूत हुआ और ट्रेजरी यील्ड बढ़ी। निवेशकों का जोखिम लेने का भरोसा लौटते ही कीमती धातुओं से पैसा निकलना शुरू हुआ। वायदा बाजार में पोजीशन कटने और मार्जिन कॉल से बिकवाली और तेज हो गयी।
डॉलर मजबूत होने से वैश्विक खरीदारों के लिए चांदी महंगी हो गई, जिससे कीमतों पर दबाव आया। हालांकि सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री से जुड़ी भौतिक मांग में बड़ी गिरावट नहीं आयी। चांदी की दोहरी भूमिका—सुरक्षित निवेश और औद्योगिक धातु—इसे सोने से ज्यादा अस्थिर बनाती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक 2026 में चांदी का 200 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचना बेहद कठिन माना जा रहा है, हालांकि असंभव नहीं। इसके लिए महंगाई में तेज उछाल, केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर संकट, आपूर्ति में बड़ी बाधा या खुदरा निवेशकों की भारी सट्टेबाजी जैसे कई बड़े कारक एक साथ होने जरूरी होंगे। सामान्य परिस्थितियों में एक किलो चांदी की कीमत 3-4 लाख रुपये के दायरे में रहने का अनुमान है, जबकि बेहद चरम हालात में यह 5 लाख रुपए के पार जा सकती है।
आईशेयर सिल्वर ट्रस्ट (एसएलवी) जैसे सिल्वर ईटीएफ के जरिए निवेशकों ने 2026 में अच्छा रिटर्न कमाया है और यह पोर्टफोलियो विविधता के लिए उपयोगी रहा है लेकिन यह पूरी तरह कीमतों पर निर्भर होता है और आय नहीं देता। इसलिए अचानक गिरावट में नुकसान का जोखिम भी उतना ही बड़ा होता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि चांदी में निवेश करते समय समय, रणनीति और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।
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