झारखंड

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Published / 2026-01-26 17:37:03
श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में गणतंत्र दिवस श्रद्धा, भक्ति और राष्ट्रप्रेम के साथ मनाया गया

  • श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में गणतंत्र दिवस श्रद्धा, भक्ति और राष्ट्रप्रेम के साथ मनाया गया

टीम एबीएन, रांची। गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित पुंदाग, रांची स्थित झारखंड के सबसे बड़े श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर परिसर में भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। इस अवसर पर ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल ने विधिवत रूप से राष्ट्रीय ध्वज फहराया और उपस्थित श्रद्धालुओं को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं।

झंडोतोलन के पश्चात अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि 26 जनवरी भारतीय लोकतंत्र, संविधान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। उन्होंने संविधान निर्माताओं को नमन करते हुए समाज से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धर्म, संस्कृति और राष्ट्रप्रेम जब एक साथ जुड़ते हैं, तब समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इस अवसर पर पूरे मंदिर परिसर में राष्ट्रगान का सामूहिक गायन किया गया, जिससे वातावरण अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण हो उठा। इसके पश्चात मनीष सोनी द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों पर आधारित मनमोहक भजनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भक्ति और राष्ट्रप्रेम का अद्भुत संगम पूरे कार्यक्रम में देखने को मिला। गणतंत्र दिवस के विशेष अवसर पर श्री राधा कृष्ण भगवान का जड़ित आभूषणों एवं तिरंगा रंग की आकर्षक लाइटिंग से अलौकिक श्रृंगार किया गया। 

तिरंगे की रोशनी से सजा मंदिर परिसर दर्शनीय बन गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर 101 किलोग्राम केसरिया खीर का भोग श्री राधा कृष्ण को अर्पित किया गया, तत्पश्चात श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरण किया गया। साथ ही बच्चों के बीच टॉफियां वितरित कर उनके चेहरों पर खुशी बिखेरी गई। बच्चों में विशेष उत्साह और उल्लास देखने को मिला।पूरा मंदिर परिसर देशभक्ति के नारों, भजनों और भक्तिमय वातावरण से गूंजमान रहा। 

उक्त जानकारी देते हुए ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि इस अवसर पर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सचिव मनोज चौधरी, सज्जन पाड़िया,पूरणमल सर्राफ, संजय सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया, पुजारी अरविंद पांडे, सुरेश अग्रवाल, नवल अग्रवाल, सुरेश चौधरी, सुनील पोद्दार, कमल केडिया, अंजनी अग्रवाल, विष्णु सोनी, सुरेश भगत, ज्ञान प्रकाश शर्मा, मनीष सोनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु गण उपस्थित थे। 

Published / 2026-01-25 16:21:53
लातेहार : मूर्ति विसर्जन कर लौट रहे युवक की मौत, तीन गंभीर

लातेहार में दर्दनाक सड़क हादसा: मूर्ति विसर्जन से लौट रहे युवक की मौत, हेलमेट न पहनने से गई जान; 3 की हालत गंभीर 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लातेहार। महुआडांड़ थाना क्षेत्र में शनिवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। मूर्ति विसर्जन कार्यक्रम से लौट रहे युवकों की दो मोटरसाइकिलों में आमने-सामने टक्कर हो गयी। इस हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गयी, जबकि तीन अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गये। 

पुल के पास दोनों बाइक आमने-सामने टकरा गयीं 

यह हादसा शनिवार शाम करीब सात बजे सरनाडीह पुल के पास हुआ। सभी युवक सरनाडीह गांव के रहने वाले थे और गांव में आयोजित मूर्ति विसर्जन कार्यक्रम में शामिल होकर अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान पुल के पास दोनों मोटरसाइकिल आमने-सामने टकरा गयी। 

हादसे में जान गंवाने वाले युवक की पहचान आरदीप मुंडा (पिता जुलूस मुंडा), निवासी सरनाडीह गांव के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरदीप मुंडा अपनी बाइक पर अकेले सवार थे। वहीं दूसरी बाइक पर रितेश किंडो, वीरेंद्र खेरवार और अमरसहाय तिर्की सवार थे। 

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मची 

टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों मोटरसाइकिलें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और सभी युवक सड़क पर गिर पड़े। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गयी। स्थानीय लोगों ने तुरंत घायलों को महुआडांड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।

सीएचसी में मौजूद चिकित्सक डॉ. अमित खालको ने जांच के बाद आरदीप मुंडा को मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर रूप से घायल रितेश किंडो (20 वर्ष), वीरेंद्र खेरवार (25 वर्ष) और अमरसहाय तिर्की (22 वर्ष) को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया। 

किसी भी युवक ने हेलमेट नहीं पहन रखा था 

स्थानीय लोगों और पुलिस के अनुसार, किसी भी युवक ने हेलमेट नहीं पहन रखा था, जिससे सिर में गंभीर चोटें आयीं। महुआडांड थाना प्रभारी मनोज कुमार ने बताया कि दो मोटरसाइकिलों की आमने-सामने टक्कर में एक युवक की मौत हुई है और तीन युवक घायल हुए हैं। दोनों बाइकों को जब्त कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

Published / 2026-01-25 16:19:12
गणतंत्र दिवस भारतीय लोकतंत्र का गौरवशाली उत्सव : संजय सर्राफ

टीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतवर्ष में 26 जनवरी का दिन अत्यंत गौरव, गर्व और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। इस दिन को हम गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। यह केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान की सर्वोच्चता और नागरिकों के अधिकारों का उत्सव है। 

26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान पूर्ण रूप से लागू हुआ और भारत एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-संपन्न गणराज्य बना। 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ, परंतु उस समय देश का शासन ब्रिटिश काल के अधिनियमों के आधार पर चल रहा था। स्वतंत्र भारत को अपनी आत्मा, संस्कृति और लोकतांत्रिक सोच के अनुरूप एक संविधान की आवश्यकता थी। 

इसी उद्देश्य से संविधान सभा का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद तथा प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे। लगभग 2 वर्ष 11 माह 18 दिन के अथक परिश्रम के बाद संविधान तैयार हुआ और 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया गया। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।

26 जनवरी की तिथि का विशेष महत्व है। इसी दिन वर्ष 1930 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी।इसलिए संविधान लागू करने के लिए भी इसी तिथि को चुना गया, ताकि स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों को सम्मान दिया जा सके। गणतंत्र दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य देश के नागरिकों को यह याद दिलाना है कि भारत का शासन जनता द्वारा जनता के लिए और जनता का है।

यह दिन हमें संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा देता है। साथ ही यह हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक करता है। राष्ट्रीय स्तर पर समारोह हर वर्ष नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भव्य गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन किया जाता है। राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है और देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता तथा राज्यों की झांकियां प्रस्तुत की जाती हैं। 

वीरता पुरस्कारों से सम्मानित वीर जवानों और बच्चों को सम्मानित किया जाता है। यह परेड भारत की एकता, अखंडता और शक्ति का सजीव प्रदर्शन होती है,गणतंत्र दिवस केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। यह हर भारतीय के लिए आत्ममंथन का अवसर है, क्या हम संविधान का सम्मान कर रहे हैं, क्या हम अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं, और क्या हम एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभा रहे हैं? 

26 जनवरी का दिन हमें यह स्मरण कराता है कि भारत केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि विचारों, मूल्यों और लोकतंत्र की जीवंत भावना है। गणतंत्र दिवस हमें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने, संविधान के आदर्शों को जीवन में उतारने और भारत को एक सशक्त, समृद्ध एवं समरस राष्ट्र बनाने की प्रेरणा देता है।

Published / 2026-01-25 16:17:12
चतरा : टीएसपीसी के उग्रवादियों ने एनसीसी के कई हाइवा फूंके

चतरा में उग्रवादियों का तांडव, टीएसपीसी ने एनसीसी कंपनी के हाइवा को जलाया 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, चतरा। जिले के टंडवा और मगध-आम्रपाली कोयलांचल क्षेत्र में उग्रवाद की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। एक बार फिर प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन टीएसपीसी ने बड़ी वारदात को अंजाम देकर इलाके में दहशत फैला दी है। 

करोड़ों रुपये का वाहन जलकर राख 

चतरा जिले के टंडवा थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात उग्रवादियों ने एनसीसी कंपनी के एक वोल्वो हाइवा वाहन को आग के हवाले कर दिया। यह घटना कुमरांग खुर्द चौपाल के पास रात करीब 11:30 बजे हुई। 

जानकारी के अनुसार, 5 से 6 की संख्या में नकाबपोश हथियारबंद अपराधी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बंदूक की नोक पर हाइवा चालक को वाहन से नीचे उतारा और फिर पेट्रोल डालकर वाहन में आग लगा दी। देखते ही देखते करोड़ों रुपये का वाहन जलकर राख हो गया। 

पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं 

बताया जा रहा है कि इस घटना की साजिश पहले से ही रची गई थी। एक सप्ताह पहले टीएसपीसी संगठन के प्रवक्ता कर्मवीर ने एक प्रेस बयान जारी कर कई कंपनियों को चेतावनी दी थी। संगठन ने लेवी (रंगदारी) नहीं देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी। 

हैरान करने वाली बात यह है कि एनसीसी कंपनी के जीएम ने पहले ही पुलिस को संभावित खतरे की जानकारी दे दी थी और सुरक्षा की मांग भी की थी। इसके बावजूद उग्रवादी इस वारदात को अंजाम देने में सफल रहे, जिससे पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 

अधिकारियों और कर्मचारियों में डर का माहौल 

फिलहाल चतरा पुलिस इस घटना को लेकर जांच की बात कह रही है और सीधे तौर पर इसे उग्रवादी हमला मानने से बच रही है। एहतियात के तौर पर पूरे इलाके में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गयी है और अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए सघन छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। 

इस आगजनी की घटना के बाद कोयलांचल क्षेत्र में काम कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों में डर का माहौल है। कर्मचारी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और कई लोग माइनिंग साइट पर जाने से कतरा रहे हैं। इसका असर कोयला परियोजनाओं के कामकाज पर भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है।

Published / 2026-01-25 16:15:39
सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों का विकास हमारी प्राथमिकता : सुखदेव भगत

सांसद सुखदेव भगत ने नौर पुंप संस्था को दी अत्याधुनिक एंबुलेंस 

आवासीय विद्यालय को साइलेंट जनरेटर देने की भी की घोषणा 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, किस्को/लोहरदगा। सुदूरवर्ती आदिवासी क्षेत्र में स्वास्थ्य और शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए लोहरदगा के सांसद माननीय सुखदेव भगत ने नौर पुंप संस्था को एक अत्याधुनिक एंबुलेंस भेंट की। यह एंबुलेंस किस्को प्रखंड के मेरले (बोंगा) गांव स्थित बुधू वीर लुरकुडिया आवासीय विद्यालय परिसर में आयोजित एक सादे लेकिन गरिमामय समारोह में सौंपी गयी। 

सांसद ने कहा कि इस एंबुलेंस से विद्यालय के बच्चों के साथ-साथ आसपास के गांवों के लोगों को भी सीधा लाभ मिलेगा। कार्यक्रम स्थल पर सांसद के पहुंचते ही उनका पारंपरिक ढंग से भव्य स्वागत किया गया। मौके पर आयोजित कार्यक्रम में सर्वप्रथम सांसद एवं अन्य अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया, तत्पश्चात विद्यालय की बच्चियों द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। 

सभा को संबोधित करते हुए सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि काम तो सभी लोग करते हैं, लेकिन इस सुदूरवर्ती क्षेत्र में शिक्षा की ज्योत जलाना और बच्चों को शिक्षित करना वास्तव में पुण्य का कार्य है। उन्होंने कहा कि इस आवासीय विद्यालय में आदिवासी बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियां अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ी रह सकें। 

सांसद ने कहा कि वे पहले भी इस विद्यालय में आ चुके हैं और यहां की जरूरतों को भली-भांति समझते हैं। बच्चों और आसपास के ग्रामीणों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने एंबुलेंस प्रदान की है। साथ ही विद्यालय की स्थिति को देखते हुए एक साइलेंट जनरेटर देने की भी घोषणा की। अपने संबोधन में सांसद ने कहा कि कांग्रेस नीत झारखंड सरकार द्वारा राज्य में पेसा कानून लागू किया गया है, जिससे अनुसूचित क्षेत्रों के आदिवासियों को बड़ा लाभ मिलेगा। 

उन्होंने कहा कि कुछ लोग पेसा कानून को लेकर भ्रम फैला रहे हैं, जिनसे दूर रहने की आवश्यकता है। उन्होंने शीघ्र ही क्षेत्र में एक कार्यशाला आयोजित कर पेसा कानून की सही जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने की बात कही। विद्यालय के अध्यक्ष संजीव भगत ने एंबुलेंस देने के लिए सांसद के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गढ़कसमार पड़हा, हिसरी पड़हा एवं सेन्हा पड़हा अंतर्गत आने वाले गांवों के लोग इस एंबुलेंस सेवा का लाभ उठा सकेंगे। 

मौके पर गढ़कसमार राजा मनीष उरांव, कोटवार मशुदिन उरांव, कोटवार लक्ष्मण उरांव, 12 पड़हा सेन्हा के गंगा उरांव, 12 पड़हा हिसरी के दीवान मंगलेश्वर उरांव, लोकेश उरांव, शिव शंकर टाना भगत, बालेश्वर उरांव, अनमोल उरांव, रामजीत उरांव, आलोक कुमार साहू, साजिद अहमद, फूलदेव उरांव, सोनू कुरैशी, माजिद चौधरी, कुलेश्वर उरांव, गुलाम जिलानी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे।

Published / 2026-01-24 22:10:52
रांची में हुआ जनजाति संवाद कार्यक्रम

हिंदू किसी पूजा पद्धति का नाम नहीं बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति : मोहन भागवत 

टीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची के डीबडीह स्थित कार्यक्रम स्थल पर शनिवार को जनजातीय संवाद कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में झारखंड सहित राज्य के विभिन्न जिलों से आये जनजातीय समाज के प्रतिनिधि, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन मधुकरराव भागवत द्वारा भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। 

कार्यक्रम का औपचारिक परिचय तुका उरांव द्वारा कराया गया। इसके पश्चात कैलाश द्वारा प्रस्तुत गीत जनजातियों का धर्म नहीं है, इससे बढ़कर झूठ नहीं है के माध्यम से कार्यक्रम की शुरुआत की गयी। इस अवसर पर राज्य के 32 जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि एवं समाज से जुड़े हुए लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम को दो सत्रों में विभाजित किया गया। 

प्रथम सत्र का संचालन मोहन कच्छप ने किया। इस सत्र में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले का संदेश पत्र पढ़कर सुनाया गया, जिसमें अबुआ दिसुम, अबुआ राज की अवधारणा पर प्रकाश डाला गया। पहले सत्र में जनजातीय समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें समाज के प्रबुद्धजनों ने खुलकर अपनी बात रखी। 

प्रश्न सत्र के दौरान मुख्य रूप से सीएनटी/एसपीटी कानून का उल्लंघन कर जनजातीय भूमि की खरीद-फरोख्त, ईसाई एवं मुस्लिम समुदाय द्वारा किए जा रहे कथित धर्मांतरण, पेसा कानून के सही तरीके से लागू न होने, ग्रामसभा की शक्तियों को कमजोर किए जाने तथा जनजातीय महिलाओं एवं युवतियों के सामाजिक-सांस्कृतिक शोषण जैसे विषयों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने सुझाव दिया कि धर्मांतरित जनजातियों को मिलने वाले आरक्षण पर पुनर्विचार किया जाये, जनजातीय महिलाओं के जाति प्रमाण पत्र का निर्धारण उनकी मूल पहचान के आधार पर किया जाये तथा संथाल परगना क्षेत्र में जनजातीय जमीन की सुरक्षा हेतु परंपरागत व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाये। 

दूसरे सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने जिज्ञासा समाधान के अंतर्गत विस्तृत उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज और हिंदू समाज अलग नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू किसी पूजा पद्धति का नाम नहीं बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है, जिसमें विविधताओं के बावजूद एकता का भाव निहित है। उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों से भारत की सभ्यता जंगल, खेती और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर आगे बढ़ी है और वेदों एवं उपनिषदों का मूल भी इसी जीवन पद्धति से जुड़ा हुआ है। 

मोहन भागवत ने कहा कि पृथ्वी माता सभी भाषाओं, संस्कृतियों और समुदायों का पालन करने वाली है, इसलिए विविधता का सम्मान करना हमारी परंपरा है। उन्होंने कहा कि धर्म का मूल अर्थ सत्य, सेवा, परोपकार और संयम है। समाज जब भोग और स्वार्थ में उलझ गया, तब आपसी मतभेद बढ़े और बाहरी आक्रांताओं ने इसका लाभ उठाया। उन्होंने कहा कि विश्व में एक ही धर्म है, मानव धर्म, और वही हिंदू धर्म का मूल स्वरूप है। 

उन्होंने जनजातीय समाज को चेताते हुए कहा कि यदि समाज बंटेगा तो कमजोर होगा और यदि एकजुट रहेगा तो कोई शक्ति उसे नुकसान नहीं पहुंचा सकती। उन्होंने सरना को पूजा पद्धति बताते हुए कहा कि इसे अलग धर्म के रूप में देखना समाज को तोड़ने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य समाज को जोड़ने का है, न कि विभाजित करने का। 

मोहन भागवत ने जनजातीय समाज की शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बच्चों को प्रारंभिक आयु से ही अपनी संस्कृति, परंपरा और गौरव की शिक्षा दी जानी चाहिए। इससे वे कभी भटकेंगे नहीं और यदि भटके भी तो अपनी जड़ों की ओर वापस लौट आयेंगे। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा जैसे महापुरुष पूरे समाज की धरोहर हैं और उनके विचारों से सभी को परिचित होना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि जनजातीय भूमि की रक्षा, श्रम करने वालों की प्रतिष्ठा, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और सामाजिक समरसता समय की आवश्यकता है। धर्मांतरण, जमीन हड़पने, सामाजिक शोषण और जनसांख्यिकीय बदलाव जैसी चुनौतियों का सामना संगठित होकर ही किया जा सकता है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि आत्मनिर्भर बनते हुए अपने स्वाभिमान को जागृत करें और किसी बाहरी शक्ति पर निर्भर रहने की प्रवृत्ति छोड़ें। 

कार्यक्रम में राज्य भर से आए आदिवासी बहनों और भाइयों समेत कुल 36 वक्ताओं ने अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किये। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संघचालक देवव्रत पाहन, क्षेत्र कार्यवाह- डा॰ मोहन सिंह, क्षेत्र प्रचारक राम नवमी जी, अर्जुन मुंडा, चंपई सोरेन, विकास भारती से  पद्मश्री अशोक भगत, प्रांत संघचालक सच्चिदानंद अग्रवाल, प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा, प्रांत कार्यवाह संजय कुमार,  प्रांत संपर्क प्रमुख राजीव कमल बिट्टू, संघ के क्षेत्र एवं प्रांत के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग उपस्थित रहे।

Published / 2026-01-24 16:27:11
बोकारो : असामाजित तत्वों ने तीन स्कूली बस और एक वैन फूंका

बोकारो में शरारती तत्वों ने स्कूल की 3 बसों और एक वैन को किया आग के हवाले, जांच में जुटी पुलिस 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, बोकारो। जिले में शरारती तत्वों ने एक निजी स्कूल के परिसर में खड़ी तीन बसों और एक वैन में आग लगा दी। पुलिस ने शुक्रवार को इस घटना की जानकारी दी। चास के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) प्रवीण कुमार ने बताया कि पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के काशीझरिया स्थित गुरुकुल पब्लिक स्कूल में अज्ञात लोगों ने चार बसों और एक वैन में आग लगा दी। हालांकि, स्कूल कर्मचारियों की सतर्कता से एक बस को बचा लिया गया।

पुलिस ने बताया कि घटना को अंजाम देने से पहले आरोपियों ने स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरों के तार काट दिये थे, ताकि उनकी गतिविधियां कैमरे में कैद न हो सकें। स्कूल के निदेशक कृष्ण गोपाल पांडेय ने बताया कि इस घटना में स्कूल को करीब 1.8 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को रोज की तरह स्कूल की छुट्टी के बाद ड्राइवर बच्चों को घर छोड़कर सभी बसों को गैरेज में खड़ा कर चले गये थे। 

निदेशक के अनुसार, गुरुवार देर रात स्कूल के सुरक्षा गार्ड देवी लाल महतो गैरेज के पास बने एक कमरे में सो रहे थे। तभी उन्हें गैरेज से कुछ आवाज सुनाई दी। जब उन्होंने दरवाजा खोलने की कोशिश की तो पाया कि दरवाजा बाहर से बंद था। इसके बाद उन्होंने खिड़की से देखा कि गैरेज में खड़ी बसों में आग लगी हुई है। इसके बाद गार्ड ने तुरंत स्कूल निदेशक को फोन कर घटना की सूचना दी। 

निदेशक ने बताया कि मैं भी मौके पर जाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन मेरा दरवाजा भी बाहर से बंद था। इसके बाद मैंने हॉस्टल के एक छात्र को बुलाकर दरवाजा खुलवाया और फिर गार्ड के कमरे का दरवाजा खोलकर पुलिस को सूचना दी। इस मामले में स्कूल निदेशक ने पिंड्राजोरा थाना में शिकायत दर्ज करायी है। पुलिस घटना की जांच में जुटी हुई है।

Published / 2026-01-24 16:25:26
रांची : डोरंडा के मनिटोला में पति ने पत्नी की गोली मारकर की हत्या

टीम एबीएन, रांची। डोरंडा थाना क्षेत्र अंतर्गत मनिटोला में शनिवार को एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और मामले की जांच में जुट गयी है।  

जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से पति-पत्नी के बीच अनबन चल रही थी। शनिवार को विवाद इतना बढ़ गया कि पति ने अपना आपा खो दिया और हथियार निकालकर पत्नी पर फायरिंग कर दी। गोली लगने से महिला की मौके पर ही मौत हो गयी। 

गोलीबारी की आवाज सुनकर आसपास के लोग जमा हो गये, जिसके बाद पुलिस को जानकारी दी गयी। घटना की सूचना पर डोरंडा पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया है। पुलिस फिलहाल मामले की जांच में जुटी है।

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