टीम एबीएन, रांची। 31वां चेतन देवराज मेमोरियल ईस्ट जोन इंटर टेक्निकल क्रिकेट टूर्नामेंट की शुरुआत कुलपति डॉ इंद्रनील मन्ना ने बल्लेबाजी करते हुए की। आज के इस उद्घाटन मैच के प्रथम मुकाबला में उषा मार्टिन विश्वविद्यालय ने बीआईटी पटना को और सरला बिरला ने बीआईटी देवघर को हराया उषा मार्टिन अमन ने 30 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली।
पटना के अनिकेत ने मुकाबला करते हुए 37 रन बनाये पर टीम को जीत नहीं दिला सके और 17 रन से उषा मार्टिन ने मैच जीत लिया, दूसरा मुकाबला सरला बिरला 90 रन से जीता।
आज के उद्घाटन समारोह में पूर्व रणजी खिलाड़ी सब्बीर हुसैन और सचिन थे। उद्घाटन समारोह में डीन डोफा डॉ भास्कर कर्ण डॉ महेंद्र कुमार डॉ संदीप शाहदेव, डॉ गौतम संदेलिया, राम महल, दुर्गा चरण, मनोज कुमार, एस पी सिंह और राणा प्रताप मिश्रा सहित काफी संख्या में दर्शक उपस्थित थे।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, बोकारो। जिले के चंदनकियारी प्रखंड के खेड़ाबेड़ा गांव निवासी छऊ कलाकार परीक्षित महतो को बुधवार को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला। दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पुरस्कार प्रदान किया। परीक्षित महतो ने पुरस्कार मिलने पर खुशी जतायी।
महतो ने दूरभाष पर कहा कि 46 साल की साधना सफल हुई। भारतीय संस्कृति की लोक कला छऊ को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। ताकि हमारी कला संस्कृति जीवित रहे। कहा कि चंदनकियारी की जनता और हमारे टीम की सहयोग से मुझे राष्ट्रपति पुरस्कार मिला है।
यह चंदनकियारी समेत झारखंड राज्य के लिए गौरवशाली समय है। वहीं बोकारो जिले के लोगों मे खुशी है। चंदनकियारी समेत उनके परिजनों में खुशी के साथ-साथ आत्मविश्वास चरम पर है। गांव में भी खुशी का माहौल दिखा। लोग परीक्षित महतो के घर पहुंचकर बधाई दी। वहीं छऊ के कलाकारों में भी आत्मविश्वास बढ़ा है।
परीक्षित महतो के परिवार बुधवार को दिन भर टीवी के सामने पुरस्कार वितरण समारोह देखने के लिए बैठे रहे। वहीं ग्रामीणों ने भी अपने-अपने घरों में टीवी पर प्रसारण देखा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा आलाकमान ने कई सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। हालांकि अभी विपक्षी महागठबंधन ने अपने उम्मीदवार के नामों की घोषणा नहीं की है। लेकिन इतना तो तय माना जा रहा है कि इन सभी सीटों पर भाजपा की राह कतई आसान नहीं होनेवाली है। क्योंकि झारखंड में पूर्व सीएम हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद झामुमो लगातार सक्रिय है। ऐसे में उसके साथ सहानुभूति वोट भी प्लस प्वाइंट की भूमिका में होगा। बहरहाल, आइये जानते हैं विभिन्न सीटों की चुनौतियों का आकलन :
वहां के समाजिक समीकरण और अल्पसंख्यकों की आबादी को देखते हुए भाजपा को बहुत पसीना बहाना होगा। आजसू के एम टी राजा और अकील अख़्तर मन से मेहनत करें, तब ताला मरांडी जी का चांस बनता है। लॉबिन हेंब्रम के रुख पर भी चुनाव परिणाम निर्भर करेगा। बाबूलाल मरांडी ने एक बात अच्छी की है कि महेशपुर के देवीधन टुडू को भाजपा में शामिल करा दिया। वे ताला मरांडी की मदद कर सकते हैं। ताला मरांडी की खुद की पकड़ आदिवासी मतदाताओं में है। झामुमो के मौजूदा सांसद विजय हांसदा को लेकर एंटी इनकंबेंसी फैक्टर है, आदिवासी मतदाताओं में विजय हांसदा को लेकर नाराजगी भी है। मुकाबला दिलचस्प होगा।
अगर सुनील सोरेन के सामने कल्पना सोरेन को उम्मीदवार बनाया जाता है, तब इसका असर बगल के राजमहल सीट पर भी पड़ेगा। वैसी स्थिति में ताला मरांडी और दुमका से भाजपा उम्मीदवार सुनील सोरेन, दोनों को मुश्किल होगी। एक ही उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव है, मोदी के नाम पर ही बेड़ा पार लग जाये।
जैसी उम्मीद है, अन्नपूर्णा देवी के खिलाफ लेफ्ट के राजकुमार यादव उम्मीदवार होंगे। अब राजकुमार यादव हों या झामुमो के जयप्रकाश वर्मा, अन्नपूर्णा देवी की जीत पक्की है। इसलिए मैं इसे मुश्किल सीट नहीं मानता।
अगर भाजपा के विद्युत वरण महतो के खिलाफ कांग्रेस के अजॉय कुमार उम्मीदवार हुए, तब कांटे की टक्कर होगी। शहरी इलाकों में अजय कुमार लोकप्रिय हैं। विद्युत वरण महतो को ग्रामीण इलाकों के अपने स्वजातीय वोटरों से उम्मीद होगी, लेकिन इस बार चुनौती बड़ी है। बहरागोड़ा से कुणाल षड़ंगी टिकट की रेस में थे, टिकट नहीं मिलने से वो आहत हैं। सरयू राय मदद कर सकते थे, लेकिन जब पार्टी ने सरयू राय को नहीं पूछा तो वे क्यों विद्युत वरण महतो की मदद करें।
गीता कोड़ा के खिलाफ शायद झामुमो का उम्मीदवार होगा। अब वो सुखराम होंगे या दीपक बिरुआ, ये तो वक्त बताएगा। लेकिन इस बार गीता कोड़ा को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ेगी। उम्मीद है कि भाजपा के लोग गीता कोड़ा का अंदर ही अंदर विरोध न कर दें, खासकर जेबी तुबिद या बड़कुंवर गहराई। इन दोनों को समय रहते मैनेज करना होगा।
पिछली बार अर्जुन मुंडा बड़ी मुश्किल से जीते थे। इस बार शायद स्थितियां ज्यादा अनुकूल है। पिछली बार रघुवर दास ने अर्जुन मुंडा को हराने के लिए क्या नहीं किया। नीलकंठ मुंडा ने क्या किया, सब जानते हैं। लेकिन इस बार नीलकंठ सिंह मुंडा शायद अर्जुन मुंडा का विरोध न करें । बगल में गीता कोड़ा के आने से आदिवासी वोटर पर भी प्रभाव पड़ेगा।
समीर उरांव को भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है। उनके खिलाफ कौन? इससे ही जवाब मिलेगा कि वो जीत रहे हैं या हारेंगे। अगर कांग्रेस ने सुखदेव भगत को उम्मीदवार बनाया तब तो समीर उरांव को मुश्किल होगी। मोदीजी के कारण वैतरणी पार लग जाए तो वो अलग बात है।
घूरन राम भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इसका पार्टी को फायदा मिलेगा। लेकिन बीडी राम दो बार से लगातार सांसद बनते रहे हैं, लिहाजा एंटी इनकंबेंसी भी है। विपक्ष के पास पलामू से कोई मजबूत उम्मीदवार नजर नहीं आ रहा।
टीम एबीएन, कोडरमा। थाना क्षेत्र के जेजे कॉलेज के पास बुधवार को कार और ट्रक के बीच हुई टक्कर में कार सवार एक व्यक्ति की मौत हो गयी। घटना को लेकर मिली जानकारी के अनुसार एक कार पर सवार होकर तीन लोग पटना से धनबाद की तरफ जा रहे थे।
वहीं कोडरमा से एक ट्रक तिलैया की तरफ जा रही थी। इसी दौरान जेजे कॉलेज के समीप कार और ट्रक के बीच आमने-सामने की टक्कर हो गयी। इस दुर्घटना में कार चालक बिच्छू शर्मा उर्फ गणेश मिश्रा, कार पर सवार महिला विजयलक्ष्मी गंभीर रूप से घायल हो गए।
जबकि कार पर सवार अजय कुमार की इस दुर्घटना में मौत हो गयी। घटना के बाद जेजे कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने घायलों को आटो के जरिए इलाज के लिए सदर अस्पताल कोडरमा पहुंचाया। जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच में अजय कुमार को मृत घोषित कर दिया। वहीं अन्य घायलों का इलाज करके विजय लक्ष्मी को रिम्स रेफर कर दिया गया। चालक का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति द्वारा आज तोपापिड़ी मैदान,अड़ाल नवाडीह में क्षेत्रीय जन समस्या को लेकर जन आशीर्वाद महासभा संपन्न किया गया। इस महासभा में सिल्ली प्रखंड के आसपास के हजारों जनसाधारण पहुंचे।
महासभा के मुख्य अतिथि संगठन के वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि यह चुनावी साल है। इस बार का चुनाव क्षेत्रीय मुद्दों पर आधारित होनी चाहिए। वर्तमान और पूर्ववर्ती स्थानीय विधायकों ने यहां के क्षेत्रीय समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया है।
इस महा जनसभा में प्रवक्ता दमयंती मुंडा, पूजा महतो, बेबी महतो, सानिया परवीन, नवीन कुमार महतो, खुदीराम आदि क्रांतिकारी मौजूद रहे। साथ उन्होंने कहा कि यहां के स्थानीय नीति-नियम को लेकर हमारा संगठन का लड़ाई लगातार जारी है।
अब हम राजनीतिक बदलाव को लेकर चुनावी मैदान में भी अपना भागीदारी सुनिश्चितता तय करेंगे। आगामी इस चुनाव को एक आंदोलन के स्वरूप में ही स्वीकार करेंगे। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रकाश महतो, जयराम पातर, ललित नायक, कार्तिक, जितेंद्र, जगन्नाथ, सुभाष मुंडा आदि सक्रिय रहे।
टीम एबीएन, रांची। सेंटर फॉर क्वांटिटेटिव इकोनॉमिक्स एंड डेटा साइंस के वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन संस्करण 5 से 7 मार्च 2024 तक बीआईटी मेसरा के आर एंड डी भवन में हुआ, जो समकालीन अर्थशास्त्र और व्यवसाय में डेटा-संचालित विश्लेषण के विषय पर केंद्रित था।
बीआईटी मेसरा के कुलपति प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना, छात्र मामलों के डीन डॉ. भास्कर कर्ण, संकाय मामलों के डीन डॉ अशोक शेरोन, सीक्यूईडीएस विभाग के प्रमुख डॉ कुणाल मुखोपाध्याय और सम्मानित अतिथियों की विशिष्ट उपस्थिति आईआईएम कलकत्ता से प्रोफेसर राहुल मुखर्जी, नेशनल इंस्टीट्यूट आफ बैंक मैनेजमेंट, पुणे से प्रोफेसर पार्थ रे और प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी, कोलकाता से प्रोफेसर मौसमी दत्ता सहित सम्मान ने इस आयोजन को बहुत महत्व दिया।
सम्मेलन का पहला दिन गणमान्य व्यक्तियों द्वारा उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ शुरू हुआ, जिसके बाद बीआईटी प्रार्थना हुई। प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना ने क्यूईडीएस के अंत:विषय विभाग की स्थापना पर विचार किया। इसकी प्रगति और एड्रोसोनिक और एसबीआई के साथ उद्योग सहयोग की सराहना की।
विषय ने अत्यधिक महत्व के विषयों को संबोधित किया जैसे कि यह तथ्य कि डेटा-संचालित विश्लेषण आधुनिक अर्थशास्त्र और व्यवसाय में क्रांति लाता है, संचालन और निर्णय लेने को नया आकार देता है।
रीयल-टाइम डेटा प्रतिस्पर्धी सेटिंग्स में त्वरित निर्णय लेने की सुविधा प्रदान करता है, जबकि पूवार्नुमानित विश्लेषण रुझानों का पूवार्नुमान लगाकर रणनीतिक योजना बनाने में सहायता करता है। ग्राहक व्यवहार को समझना वैयक्तिकृत अनुभव और लक्षित विपणन को सक्षम बनाता है।
जोखिम प्रबंधन खतरों की पहचान करता है और उन्हें कम करता है, बाजार अनुसंधान प्रतिस्पर्धी रणनीतियों को संचालित करता है, और परिचालन दक्षता लागत को कम करती है। इकोनोमेट्रिक मॉडलिंग नीतिगत निर्णयों की जानकारी देती है, धोखाधड़ी का पता लगाने से लेन-देन की सुरक्षा होती है और एचआर एनालिटिक्स कार्यबल प्रबंधन को बढ़ाता है। निरंतर डेटा निगरानी अनुपालन सुनिश्चित करती है।
संयोजक डॉ श्रीमोयी गांगुली, सह-संयोजक डॉ मृणाल जाना और सम्मेलन की सचिव डॉ तमालिका कोले ने वर्तमान युग में डेटा संचालित एनालिटिक्स के महत्व पर जोर दिया। डॉ मनीष कुमार पांडे, डॉ कुसुम लता मिश्रा का योगदान रहा। डॉ सहेली बोस, डॉ टीना दत्ता, डॉ सयोरीगुप्तू और सेंटर फॉर क्वांटिटेटिव इकोनॉमिक्स एंड डेटा साइंस के छात्र सम्मेलन की सफलता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण थे।
पूर्ण सत्र में, प्रोफेसर राहुल मुखर्जी ने फैले हुए ब्लॉकों के माध्यम से उच्च दक्षता के लिए ब्लॉक संभावना अनुमान के महत्व पर चर्चा की, जबकि प्रोफेसर पार्थ रे ने गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए बैंक और ऋण के इर्द-गिर्द भाषण दिया। इन सत्रों की अध्यक्षता क्रमश: डॉ मौसमी दत्ता और डॉ राहुल मुखर्जी ने की, जिससे सम्मेलन मूल्यवान प्रवचन और विशेषज्ञता से समृद्ध हुआ।
टीम एबीएन, रांची। वाईएमसीए पब्लिक स्कूल धुर्वा में मंगलवार को 21वां वार्षिक खेल कूद समारोह धूमधाम से मनाया गया। जिसमें वाईएमसीए धुर्वा के सचिव सौरव मुर्मू, मिस सुषमा रोजी टोप्पो ने ध्वजारोहण एवं फीता काट कर खेलकूद की शुरुआत की।
स्वागत भाषण प्राचार्य ने दिया एवं मंच संचालन मिस डॉली चौधरी एवं पूनम कुजूर ने किया। बच्चों ने खेलकूद में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया बच्चों के बीच 100 मीटर, 200 मीटर, 400 मी रेस, बाधा दौड़, मेंढक रेस, जयमाला रेस, रस्सी दौड़ की प्रतियोगिता हुई।
विजयी प्रतिभागियों को मेडल पहनाकर सम्मानित किया। समापन भाषण उप प्राचार्य कालिस्ता सागा ने दिया। कार्यक्रम में आदित्य सिंह शिक्षक शिक्षिकाएं एवं बच्चे मौजूद रहे।
जूनियर ग्रुप में सर्वश्रेष्ठ चैंपियनशिप कृति मुंडा ग्रीन हाउस, सब जूनियर में श्रुति मुंडा ब्लू हाउस, जूनियर ग्रुप में नवीन उरांव येलो हाउस, इंटर ग्रुप में अदिति कुमारी ब्लू हाउस, सीनियर ग्रुप में अन्वी कुमारी येलो हाउस, ओवरआल चैंपियन श्रुति मुंडा ब्लू हाउस, बेस्ट एरोबिक येलो हाउस, बेस्ट डिसिप्लिन अवार्ड ब्लू हाउस एवं टीम चैंपियनशिप का अवार्ड ब्लू हाउस को मिला।
टीम एबीएन, रांची। सुप्रीम कोर्ट ने सीता सोरेन के तर्कों को गलत माना है। आज सर्वोच्च अदालत ने अपने ऐतिहासिक फैसले में न सिर्फ सीता सोरेन के तर्कों को गलत माना है बल्कि 1998 के 5 जजों के फैसले को भी पलट दिया है। वहीं, इस पर भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ के फैसले को ऐतिहासिक बताया है।
उन्होंने कहा कि फैसले का स्वागत करता हूं। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह फैसला झारखंड से जुड़ा हुआ है। 2012 में राज्यसभा चुनाव में खरीद फरोख्त हुआ था और सीता सोरेन के ठिकानों से पैसे की बरामदगी हुई थी। इस मामले को लेकर सीता सोरेन पर अपराधिक मामला दर्ज हुआ था। सीता सोरेन ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील किया था जहां अपील को खारिज किया गया।
मरांडी ने कहा कि इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट गई वहां भी खारिज किया गया। संविधान पीठ गठित किया गया और आज सर्वसम्मत से फैसला सुनाया है। उन्होंने कहा कि वोट के बदले नोट को लेकर आपराधिक मामला बनता है। सीता सोरेन के मामले भी आज यही आया है। सोरेन परिवार यही करता आया है। पूरा सोरेन परिवार भ्रष्टाचार में लिप्त है।
साढ़े 4 एकड़ जमीन का मामले में हेमंत सोरेन जेल में हैं। मरांडी ने कहा कि शिबू सोरेन परिवार एमपी-एमएलए बनकर पूरा लूट रहे हैं। सिर्फ झारखंड राज्य ऐसा है जहां पैसा लूटने को लेकर तरह-तरह की तरकीब निकाली जाती है और जब पकड़े जाते हैं तो आरोप केंद्र सरकार पर लगाते हैं। सोरेन परिवार राजनीति सिर्फ पैसा कमाने को लेकर करते है।
मरांडी ने कहा कि इनका उद्देश्य जनता की भलाई करना नहीं, सेवा करना नहीं बल्कि लूटना है। राज्यसभा चुनाव में ये लोग पैसा लेकर ही ऐसा करते हैं। वहीं कल्पना सोरेन के राजनीति में कदम रखने के सवाल पर मरांडी ने कहा कि कोई आये इससे कोई असर नहीं पड़ता है।
ये मामला 2012 राज्यसभा चुनाव का है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी सीता सोरेन तब जामा सीट से विधायक थीं। सीता सोरेन पर आरोप लगा कि उन्होंने चुनाव में वोट देने के लिए रिश्वत ली। आपराधिक मामला दर्ज हुआ। सीता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मामला रद्द करने की मांग की। मगर अपील यहां खारिज हो गयी।
17 फरवरी, 2014 का वो आदेश था जब रांची हाईकोर्ट ने आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सीता सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगायी और 1998 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह उनके ससुर को कानूनी कार्रवाई से छूट मिली थी, देश का संवैधानिक प्रावधान उन्हें भी सदन में हासिल विशेषाधिकार के तहत मुकदमेबाजी से छूट देती है।
पिछले साल 20 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमेबाजी से छूट वाले 1998 के फैसले पर फिर से विचार करने की बात की। 1998 का फैसला चूंकि 3:2 की बहुमत से पांच जजों की बेंच ने सुनाया था। इसलिए उस फैसले पर पुनर्विचार कोई बड़ी बेंच ही कर सकती थी। लिहाजा 7 जजों की बेंच का गठन हुआ और उसने अगले ही महीने सुनवाई पूरी कर ली।
इस दौरान भारत सरकार का पक्ष सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल ने रखा जबकि अदालत की मदद के लिए एमिकस क्यूरी के तौर पर पीएस पटवालिया पेश हुए। वहीं, आज सर्वोच्च अदालत ने अपने ऐतिहासिक फैसले में न सिर्फ सीता सोरेन के तर्कों को गलत माना है बल्कि 1998 के 5 जजों के फैसले को भी पलट दिया है।
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