झारखंड

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Published / 2026-02-26 21:24:52
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 28 फरवरी को, नवाचार और वैज्ञानिक चेतना का पर्व

विज्ञान ही वह साधन है जो समाज को प्रगति, समृद्धि और स्थिरता की दिशा में करता है अग्रसर: संजय सर्राफ 

टीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत में प्रत्येक वर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारतीय वैज्ञानिक सी. वी. रमन द्वारा वर्ष 1928 में की गई महान खोज रमन प्रभाव की घोषणा की स्मृति में समर्पित है। इसी खोज के लिए उन्हें 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ था।

वर्ष 1986 में राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद की अनुशंसा पर भारत सरकार ने 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की, और 1987 से यह परंपरा निरंतर जारी है। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का मुख्य उद्देश्य समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तर्कशीलता और नवाचार की भावना को बढ़ावा देना है। 

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, अंतरिक्ष, रक्षा, पर्यावरण और उद्योग जैसे सभी क्षेत्रों की प्रगति का आधार है।रमन प्रभाव की खोज ने यह सिद्ध किया कि जब प्रकाश किसी पारदर्शी पदार्थ से गुजरता है, तो उसकी तरंगदैर्ध्य में परिवर्तन हो सकता है। 

यह खोज आधुनिक स्पेक्ट्रोस्कोपी और पदार्थों की संरचना के अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुई। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का महत्व केवल ऐतिहासिक घटना की स्मृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं और विद्यार्थियों को विज्ञान के क्षेत्र में करियर अपनाने के लिए प्रेरित करता है। इस अवसर पर देशभर के विद्यालयों, महाविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों में विज्ञान प्रदर्शनी, संगोष्ठी, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी और नवाचार प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।

समाज में वैज्ञानिक सोच और अनुसंधान की प्रवृत्ति विकसित करना।अंधविश्वास एवं कुरीतियों के विरुद्ध तार्किक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय उपलब्धियों को रेखांकित करना। विद्यार्थियों को शोध और नवाचार के लिए प्रेरित करना। आज भारत अंतरिक्ष अनुसंधान, डिजिटल तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की उपलब्धियां, सस्ती और सफल अंतरिक्ष परियोजनाएं तथा डिजिटल इंडिया जैसी पहलें विज्ञान की शक्ति का उदाहरण हैं। 

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि आत्मनिर्भर भारत का सपना वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के बिना अधूरा है। नयी शिक्षा नीति में भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अनुसंधान पर विशेष बल दिया गया है, जिससे भविष्य की पीढ़ी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बन सके।राष्ट्रीय विज्ञान दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि वैज्ञानिक चेतना का उत्सव है। 

यह दिन हमें प्रेरित करता है कि हम जिज्ञासा, तर्क और प्रयोग की भावना को अपनायें। विज्ञान ही वह साधन है, जो समाज को प्रगति, समृद्धि और स्थिरता की दिशा में अग्रसर करता है। अत: आवश्यक है कि हम सभी मिलकर वैज्ञानिक सोच को जीवन का अभिन्न अंग बनायें और देश को नवाचार की नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभायें।

Published / 2026-02-26 21:23:47
श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर मे रंग रंगीलो होली मिलन कार्यक्रम का भव्य आयोजन

टीम एबीएन, रांची। परमहंस हिन्दू रत्न से अलंकृत डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के पावन आशीर्वाद से संचालित एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के अंतर्गत कार्यरत सामाजिक संस्था श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम द्वारा पुंदाग, राँची स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में फाल्गुन रंग रंगीलो होली मिलन कार्यक्रम का भव्य एवं भक्तिमय आयोजन किया गया। 

कार्यक्रम में श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। फाल्गुन मास की मधुर बेला में सुसज्जित मंदिर प्रांगण भक्तों से भरा रहा। इस अवसर पर श्री राधा रानी का आकर्षक आभूषणों एवं रंग-बिरंगी पोशाकों से अलौकिक श्रृंगार किया गया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। राधा-कृष्ण की जीवंत झांकियों ने ब्रज की होली की अनुपम छटा को साकार कर दिया। 

वातावरण में गुलाल की सुगंध और पुष्पों की वर्षा ने कार्यक्रम को और भी दिव्य बना दिया।महिला समिति द्वारा आयोजित भजन संध्या में भक्तिमय गीतों की ऐसी रसधार बही कि पूरा मंदिर परिसर राधे-राधे और जय श्री श्याम के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। महिलाएं श्री राधा-कृष्ण की होली के पारंपरिक एवं रसिया भजनों पर भाव-विभोर होकर झूम उठीं। 

फूलों की होली ने कार्यक्रम में ब्रज संस्कृति की सजीव अनुभूति कराई, जहां श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे पर पुष्प अर्पित कर प्रेम और सद्भाव का संदेश दिया।मंदिर के पुजारी पंडित अरविंद पांडे ने पूरे विधि-विधान से पूजन-अर्चन संपन्न कराया तथा श्री विग्रह को महाभोग अर्पित किया। तत्पश्चात सामूहिक महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित कर प्रभु से सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की। 

महाआरती के उपरांत प्रसाद वितरण किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में धार्मिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों एवं आपसी प्रेम-सौहार्द को सुदृढ़ करना रहा। महिला समिति की सक्रिय भागीदारी ने यह सिद्ध किया कि आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्यों में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है फाल्गुन रंग रंगीला होली मिलन का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज को एकता, प्रेम और भाईचारे का संदेश भी दे गया। उन्होंने बताया कि 27 फरवरी को मंदिर में फाल्गुन रंगभरी आमलकी एकादशी के अवसर पर कई धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। 

मौके पर विधा देवी अग्रवाल, प्रमिला पुरोहीत, बिमला जालान, शोभा जालान, सीता शर्मा, बिमला मिश्रा, रश्मी जालान, कविता गाड़ोदिया, उर्मिला पाड़िया, दीपिका मोतिका, सरोज पोद्दार, मंगला मोदी, आशा मुंजाल, प्रमिला महलका, ललिता पोद्दार, ललिता अग्रवाल, रेखा पोद्दार, संतोष देवी अग्रवाल, सत्यभामा खेतान, नन्द रानी पाठक, आशा मिश्रा, उमा पोद्दार, भगवती देवी, सहित बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित थे। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ  ने दी।

Published / 2026-02-26 21:20:33
चंपई के पोते की मौत पर दु:ख में साथ खड़े नजर आये सीएम हेमंत सोरेन

टीम एबीएन, रांची। पूर्व सीएम चंपई सोरेन के पोते की मौत पर दु:ख की इस घड़ी में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मजबूती के साथ चंपई सोरेन के साथ खड़े नजर आये। बाबूलाल सोरेन से मुलाकात के दौरान वे काफी भावुक हो गये। उन्होंने चंपई दा को ढांढस बंधाते हुए कहा- एक नौजवान, घर का चिराग अगर गुजर जाये तो परिवार के लिए यह अत्यंत विकट क्षण होता है। 

यह सिर्फ परिवार ही नहीं, उससे जुड़े हर व्यक्ति के लिए भी बेहद मर्माहत करने वाला होता है। बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पोते वीर सोरेन की मौत दो दिन पहले कुल्लू में हो गयी थी। वे अपने दोस्तों के साथ वहां घूमने गये थे।

Published / 2026-02-26 21:16:50
झारखंड : बारिश से तापमान में गिरावट, ठंड को मिली जान

झारखंड में मौसम का यू-टर्न! बारिश से तापमान में गिरावट, दिनभर रहा तेज हवाओं का असर; स्वेटर में दिखे लोग 

टीम एबीएन, रांची। रांची और आसपास के जिलों में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। बीते बुधवार को दिनभर तेज हवाओं का असर रहा, जबकि शाम होते ही तापमान में गिरावट देखने को मिली। 

सुबह-शाम ठंडक महसूस हो रही 

मौसम विज्ञान केंद्र, रांची के अनुसार, राज्य के ज्यादातर हिस्सों में सुबह को कुहासा रहेगा और दिन में आसमान साफ रहेगा। मौसम शुष्क रहने की संभावना है। अगले 24 घंटों में राज्य में न्यूनतम तापमान में लगभग 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हो सकती है। इसके बाद 27 फरवरी से 2 मार्च तक तापमान में धीरे-धीरे 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने की संभावना है। 

पिछले 24 घंटे में राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की वर्षा हुई। सबसे ज्यादा बारिश 9 मिमी पूर्वी सिंहभूम के गुराबंधा में दर्ज की गयी। तापमान की बात करें तो सबसे अधिक अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री सेल्सियस जगन्नाथपुर में रहा, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान गुमला में 11 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। राजधानी रांची में अधिकतम तापमान 26.6 और न्यूनतम 13.2 डिग्री सेल्सियस रहा। 

रांची में गर्मी का असर कम हुआ 

पिछले सोमवार को तेज हवाओं और बूंदाबांदी के बाद रांची का तापमान दो-तीन डिग्री तक गिर गया था। अब राजधानी में गर्मी का असर कम हुआ है और सुबह-शाम ठंडक महसूस हो रही है।

Published / 2026-02-26 21:15:48
सीएम हेमंत सोरेन ने दी दिवंगत वीर सोरेन को श्रद्धांजलि

चंपई सोरेन से मुलाकात करने के दौरान भावुक नजर आये मुख्यमंत्री 

टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार को सरायकेला जिले के झीलिंगगोड़ा पहुंचे। यहां उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पोते वीर सोरेन के निधन पर श्रद्धांजलि दी और शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। 

दोनों नेता भावुक नजर आये 

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झीलिंगगोड़ा स्थित चंपाई सोरेन के आवास पहुंचे। उन्होंने वीर सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार को इस कठिन समय में हिम्मत बनाए रखने की बात कही। इस दौरान उन्होंने चंपाई सोरेन से पूरी घटना की जानकारी ली। बातचीत के समय दोनों नेता भावुक नजर आये।

जानकारी के मुताबिक, दो दिन पहले हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में वीर सोरेन की मौत हो गयी थी। बताया जा रहा है कि वह अपने दोस्तों के साथ घूमने गये थे। इसी दौरान यह दुखद हादसा हुआ। घटना की खबर मिलते ही परिवार और समर्थकों में शोक फैल गया। 

इस घटना से पूरे इलाके में शोक का माहौल 

वीर सोरेन के असामयिक निधन पर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के लोगों ने भी दुख जताया है। कई दलों के नेताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। झीलिंगगोड़ा स्थित घर पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह दौरा परिवार के प्रति संवेदना और समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। इस घटना से पूरे इलाके में शोक का माहौल है।

Published / 2026-02-26 21:13:42
श्रमदान और ग्रामीण एकजुटता से हर चुनौती पर विजय संभव : देवेंद्र नाथ महतो

जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो की पहल से राहे मुंडा टोली में तीन पीढ़ी बाद पहली बार श्रमदान से सड़क बनी 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड गठन के 26 वर्ष बाद भी ग्रामीण क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं- सड़क, बिजली, पानी - से वंचित हैं। रांची जिले के राहे प्रखंड, भेड़ियागढ़ा मुंडा टोली में पिछले तीन पीढ़ी (लगभग 300 वर्ष) से सड़क का अभाव था। 

यहां मोटरसाइकिल तक गांव नहीं पहुंच पाती, जिससे ग्रामीणों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा था। एक सप्ताह पूर्व ग्रामीणों ने जेएलकेएम के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो को समस्या बतायी। महतो ने तुरंत संज्ञान लिया और ग्रामीणों के सक्रिय सहयोग से श्रमदान करवाकर सड़क निर्माण पूरा कर दिया। 

मौके पर देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि यह सामूहिक एकजुटता और सकारात्मक प्रयास का प्रतीक है। श्रमदान से ग्रामीणों ने साबित किया कि एक होकर हम हर चुनौती पर विजय पा सकते हैं। तीन पीढ़ी बाद अब पहली बार मुंडा टोली बच्चे आसानी से स्कूल जाएंगे, महिलाएं बाजार पहुंचेंगी और मरीजों को तत्काल इलाज मिलेगा। यह झारखंड ग्रामीण विकास का छोटा लेकिन प्रेरक उदाहरण है। 

कार्य में जगन्नाथ मुंडा, प्रदीप मुंडा, सोनू मुंडा, महावीर मुंडा, ब्रजकिशोर मुंडा, मुकेश मुंडा, दिलीप मुंडा, सुखदेव मुंडा, लुकेश मुंडा, इंद्रजीत मुंडा, दीपक मुंडा, किशन मुंडा, चंदन महतो, मनोज महतो, शुभम महतो, सनातन महतो, सावित्री देवी, मांडवी देवी सहित भारी संख्या में ग्रामीणों ने श्रमदान देकर योगदान दिया।

Published / 2026-02-25 23:42:57
एयर एंबुलेंस क्रैश में नये खुलासे से हैरानी

  • रेडबर्ड एयरवेज के बीचक्राफ्ट में नहीं था ब्लैक बॉक्स, घटनास्थल पहुंची AAIB टीम

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के चतरा जिले में हुए दर्दनाक विमान हादसे में सात लोगों की जान चली गई। यह विमान  रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड का  बीचक्राफ्ट C90 (पंजीकरण VT-AJV) था, जो रांची से दिल्ली के लिए मेडिकल इवैक्यूएशन उड़ान पर था।

इन विमानों को FDR की जरूरत नहीं

सूत्रों के अनुसार, विमान में ब्लैक बॉक्स मौजूद नहीं था क्योंकि इसका अधिकतम टेकऑफ वजन 5,700 किलोग्राम से कम है। नागरिक उड्डयन नियमों के तहत इस श्रेणी के विमानों में कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) अनिवार्य नहीं होते।

विमान ने रांची से भरा था उड़ान

विमान ने शाम 7:11 बजे रांची से उड़ान भरी थी। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, वाराणसी से लगभग 100 नॉटिकल मील दक्षिण-पूर्व में इसका रडार और संचार संपर्क टूट गया। इसके कुछ समय बाद यह सिमरिया ब्लॉक के कसारिया पंचायत क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

घटनास्थल पर पहुंची टीम

हादसे के बाद एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) और डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) की टीमें मौके पर पहुंचीं। जांच अधिकारियों ने मलबे से महत्वपूर्ण साक्ष्य और दस्तावेज एकत्र किये।

2-3 सेकंड के भीतर जमीन पर गिर गया था विमान

उप-विभागीय पुलिस अधिकारी शुभम खंडेलवाल के अनुसार, स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि विमान अचानक संतुलन खो बैठा और 2-3 सेकंड के भीतर जमीन पर गिर गया। सभी शवों का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है। 

फिलहाल हादसे के कारणों की विस्तृत जांच जारी है। ब्लैक बॉक्स न होने के कारण जांच एजेंसियां मलबे, तकनीकी रिकॉर्ड और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर दुर्घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास कर रही हैं।

Published / 2026-02-25 23:35:08
वंदे भारत ने पूरे परिवार को उजाड़ डाला

  • वंदे भारत की चपेट में आकर पूरे परिवार की मौत
  • पैदल ही घर जा रहे थे; पति-पत्नी और बेटी की गई जान

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पाकुड़। झारखंड के पाकुड़ जिले से एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां एक झटके में एक हंसता खेलता परिवार खत्म हो गया। मांता-पिता और उनकी बेटी की वंदे भारत ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। 

इस हादसे से इलाके में हड़कंप मच गया। घटना के बाद मौके पर पहुंची आरपीएफ और जीआरपी पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। एक साथ तीन लोगों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। चंदन, पत्नी और बेटी के साथ विक्रमपुर स्थित अपनी बहन के घर से पैदल लौट रहे थे। 

इसी बीच नगरनबी रेलवे क्रॉसिंग पार करते समय तेज रफ्तार वंदे भारत ट्रेन ने जोरदार टक्कर मार दी, जिससे बुरी तरह से कट गए और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि तीनों का शव क्षत-विक्षत हालात में रेलवे ट्रैक से आरपीएफ और जीआरपी टीम ने बरामद कर लिया है। साथ ही मामले की जांच शुरू कर दी गई है। 

एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत से इलाके में शोक की लहर है। जानकारी के अनुसार, यह घटना पाकुड़-रामपुरहाट रेलखंड पर नगरनबी स्टेशन के पास पोल संख्या 47/40 और 47/38 के बीच की बताई जा रही है। हादसे के वक्त वंदे भारत ट्रेन न्यू जलपाईगुड़ी से हावड़ा की तरफ से जा रही थी। इसी की चपेट में आने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई।

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