झारखंड

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Published / 2024-10-21 20:56:48
धनबाद विस क्षेत्र में भाजपा-कांग्रेस में महामुकाबला

धनबाद में एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस में होगा घमासान 

टीम एबीएन, धनबाद/ रांची। झारखंड की 81 विधानसभा सीटों में धनबाद सीट बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह इलाका कोयले की खदानों के लिए मशहूर है। धनबाद को कोयला खदानों के कैपिटल के तौर पर भी जाना जाता है। इस विधानसभा सीट पर चुनाव में बार-बार कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर होती रही है।

2005 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां से भाजपा कैंडिडेट पशुपतिनाथ सिंह विधायक चुने गये थे तो 2009 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां बाजी पलट दी और कांग्रेस कैंडिडेट मन्नान मलिक ने भाजपा को शिकस्त दे दिया था। लेकिन 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर यहां से कमल का फूल खिला दिया था और राज कुमार सिन्हा ने मन्नान मलिक को मात दे दिया था। 

2019 में भी धनबाद सीट पर भाजपा कैंडिडेट राज कुमार सिन्हा ने जीत का सिलसिला कायम रखा। 2024 के चुनाव में भी भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। वहीं धनबाद विधानसभा सीट पर 2019 के चुनाव में भाजपा कैंडिडेट राज कुमार सिन्हा ने जीत हासिल की थी। राज कुमार सिन्हा एक लाख बीस हजार सात सौ 73 वोट लेकर पहले स्थान पर रहे थे। 

वहीं कांग्रेस कैंडिडेट मन्नान मलिक 90 हजार एक सौ 44 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे थे तो निर्दलीय कैंडिडेट रणजीत सिंह दो हजार आठ सौ 52 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे। वहीं 2009 के विधानसभा चुनाव में धनबाद सीट से कांग्रेस कैंडिडेट मन्नान मलिक ने जीत हासिल की थी। कांग्रेस कैंडिडेट मन्नान मलिक ने 55 हजार 641 वोट हासिल की थी। 

वहीं भाजपा कैंडिडेट राज कुमार सिन्हा को 54हजार 751 वोट मिला था। इस तरह से कांग्रेस कैंडिडेट मन्नान मलिक ने बीजेपी कैंडिडेट राज कुमार सिन्हा को महज 890 वोटों की मार्जिन से मात दे दी थी। वहीं निर्दलीय कैंडिडेट नीरज सिंह, 17 हजार 801 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे। 

धनबाद सीट पर मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही है। कभी यहां से भाजपा के कैंडिडेट जीत हासिल करते हैं तो कभी कांग्रेस कैंडिडेट के हाथ जीत लगती है, लेकिन इस बार किस पार्टी को जनता मुकुट पहनायेगी ये तो चुनावी नतीजे ही बतायेंगे।

Published / 2024-10-21 20:55:23
झारखंड चुनाव : कल से शुरू होगा 38 सीटों पर नामांकन

झारखंड में कल जारी होगी दूसरे चरण की अधिसूचना, इन 38 सीटों पर शुरू होगा नामांकन 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 के दूसरे चरण की अधिसूचना मंगलवार (22 अक्टूबर) को जारी होगी। इसके साथ ही झारखंड की बाकी बची 38 विधानसभा सीटों के लिए नामांकन शुरू हो जायेंगे। इन 38 सीटों में 3 अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित हैं, तो 8 अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए। 

दूसरे चरण की अधिसूचना जारी होने के बाद नामांकन का दौर शुरू हो जायेगी। उम्मीदवार 29 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 30 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 1 नवंबर तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। दूसरे चरण की वोटिंग 20 नवंबर को होगी। 23 नवंबर को झारखंड की सभी 81 विधानसभा सीटों पर मतगणना करायी जायेगी। 

झारखंड में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया 25 नवंबर को पूरी हो जायेगी। भारत निर्वाचन आयोग ने 15 अक्टूबर को विधानसभा आम निर्वाचन झारखंड 2024 के कार्यक्रम की घोषणा की थी। इसके साथ ही पूरे झारखंड में आदर्श आचार संहिता लागू हो गयी थी। पहले चरण की अधिसूचना 18 अक्टूबर को जारी की गयी थी। 25 अक्टूबर तक पहले चरण के लिए नामांकन होंगे।

Published / 2024-10-21 20:54:44
टिकट नहीं मिलने पर आजसू नेता तरूण गुप्ता का इस्तीफा

आजसू के केंद्रीय महासचिव हैं तरुण गुप्ता, पार्टी से टिकट नहीं मिलने से थे नाराज

टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 को देखते हुए दल-बदल का सिलसिला शुरू हो गया है। जिन नेताओं को टिकट नहीं मिला, वह अब अपने लिए नया आशियाना खोजने में लगे हैं। इसी कड़ी में सुदेश महतो की पार्टी आजसू में भगदड़ देखने को मिल रही है। आजसू की पहली लिस्ट आने के बाद पार्टी के केंद्रीय महासचिव तरुण गुप्ता ने इस्तीफा दे दिया है। 

कहा जा रहा है कि टिकट नहीं मिलने से वह नाराज थे। जानकारी के मुताबिक, वह अब झामुमो या कांग्रेस ज्वाइन कर सकते हैं। अगर वहां भी टिकट मिलने की संभावना ना दिखी तो निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं। उन्होंने 28 नवंबर को नामांकन करने का ऐलान किया है। बता दें कि टिकट नहीं मिलने पर तरुण गुप्ता का रुकना मुश्किल हो जाता है। 

उन्होंने भाजपा छोड़कर आजसू ज्वाइन किया था। 2019 में जब भाजपा ने उन्हें जामताड़ा से टिकट नहीं दिया था, तो उन्होंने पार्टी से बगावत कर दी थी और पार्टी का विरोध करते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतर कर चुनाव लड़ने का बिगुल फूंक दिया था। चुनाव के बाद उन्होंने आजसू का दामन थाम लिया था। अब सुदेश महतो ने टिकट नहीं दिया तो उन्होंने आजसू के खिलाफ ही बगावती बिगुल फूंक दिया।

Published / 2024-10-21 20:50:19
जैन महिला जागृति ने लगाया दो दिवसीय दिवाली बाजार मेला

टीम एबीएन, रांची। जैन महिला जागृति ने रतनलाल जैन स्मृति भवन रातू रोड रांची में 21 और 22 अक्टूबर को दो दिवसीय दिवाली बाजार मेला सपनों का लगाया गया। जिसके तहत संस्था के द्वारा उन महिलाओं को बहुत कम शुल्क और नि:शुल्क भी मंच प्रदान किया गया जो जो काम तो करना चाहती है और कर रही हैं पर मार्केटिंग व बाजार से जिनका परिचय कम है और जो बाजार से कम मूल्य पर अपने उत्पादों का विक्रय कर सके। 

आयोजन का उद्घाटन रेखा पांड्या, रीता जैन और डॉक्टर महिमा जैन ने किया। दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष नरेंद्र जी गंगवाल, मंत्री पंकज जी पांड्या, जज के अध्यक्ष राजेश पाटौदी एवं मंत्री रोशन छाबड़ा न जैन महिला जागृति के इस कार्य की सराहना की और अध्यक्ष मोनिका ठोलिया  और मंत्री स्मिता पांड्या को शुभकामनाएं दी। 

कोलकाता रायपुर धनबाद हजारीबाग रामगढ़ और चाईबासा से आए हुए स्टाल धारकों ने भी इतने कम शुल्क पर आयोजन करने के लिए संस्था को तहे दिल से धन्यवाद दिया। कार्यक्रम का संचालन शिल्पा बाकलीवाल ने किया। 

सीमा गंगवाल रूबी पाटनी मानसी बड़जात्या सीमा जैन और मोनिका पाटनी ने कुशलता पूर्वक इस कार्यक्रम की जिम्मेदारी निभायी। अध्यक्ष मोनिका ठोलिया और मंत्री स्मिता पांड्या ने लोगों से निवेदन किया है की अधिक से अधिक संख्या में आकर इन महिलाओं का उत्साहवर्धन करें। कार्यक्रम में अनुराधा सेठी श्वेता छाबड़ा सुमन पाटनी अनीता पांड्या ज्योति जैन एवं अन्य सदस्य उपस्थित थे।

Published / 2024-10-21 20:49:33
उच्च न्यायालय के आदेश को ठेंगा दिखा रहा रांची विवि

उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अतिथि शिक्षकों को कार्य करने से रोका जा रहा है

टीम एबीएन, रांची। रांची विश्वविद्यालय द्वारा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के संकल्प का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय में पिछले 7 वर्षों से कार्य कर रहे अतिथि शिक्षकों को कार्य करने से रजिस्ट्रार विनोद नारायण के मौखिक आदेश के माध्यम से रोका जा रहा है। जबकि अतिथि शिक्षकों का मामला वर्तमान में उच्च न्यायालय में विचाराधीन है तथा इन अतिथि शिक्षकों को उच्च न्यायालय द्वारा जब तक सुनवाई पूरी नहीं हो जाती है तब तक इनको सेवा से नहीं हटाया जा सकता है, उच्च न्यायालय का निर्देशन है। 

लेकिन रांची विश्वविद्यालय द्वारा इसकी अवहेलना करते हुए विश्वविद्यालय में कार्यरत लगभग 124 अतिथि शिक्षकों को कार्य करने से रोका जा रहा है जो की पूरी तरह से माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना है। इस पर संघ के अध्यक्ष अरविंद प्रसाद ने कहा कि उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग और रांची विश्वविद्यालय हमारे जीवन से खेल रही है, इन्हें किन्ही के आदेश से डर नहीं लगता। 

वहीं संघ के संयोजक डॉक्टर धीरज सिंह सूर्यवंशी ने कहा कि यह शिक्षक विरोधी संकल्प है इस पर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा त्वरित स्वत: संज्ञान लेकर संबंधित पदाधिकारी पर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि हम लोगों के जैसे और किसी के जीवन के साथ खिलवाड़ न किया जा सके। इस पर आज सभी अतिथि शिक्षक रांची विश्वविद्यालय मुख्यालय पहुंचे और सामूहिक रूप से कुल सचिव को माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का प्रतिलिपि विभाग में सौंपा और कहा कि यह पूरी तरह से माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है।

वहीं हमारे नियुक्ति रांची विश्वविद्यालय के द्वारा नियम संगत की गई है और अब इसी के द्वारा हम लोगों को कार्य करने से रोका जा रहा है, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। ज्ञातव्य है कि इन अतिथि शिक्षकों को पिछले 17 महीने से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है और अब इन्हें कार्य से रोका जा रहा है। 

आज रांची विश्वविद्यालय परिसर में डॉक्टर धीरज सिंह सूर्यवंशी, डॉ जमील अख्तर, डॉ आशीष कुमार, शिवकुमार, सौरभ कुमार, कृष्णकांत, डॉ ज्योति डुंगडुंग, डॉ रंजू, राजू हजम, आसिफ अंसारी सरफराज अहमद डॉक्टर ताल्हा नकवी डॉ खातून, डॉ पूनम डॉ चक्षु पाठक, विकास कुमार, डॉ जिज्ञासा ओझा डॉ नाजिश हसन, अंकित शर्मा डॉ आरती, दीपशिखा, सुषमा साहू, डॉ निशा, आदि भारी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। उक्त जानकारी झारखंड अतिथि शिक्षक संघ के संयोजक डॉ धीरज सिंह सूर्यवंशी ने दी।

Published / 2024-10-20 22:58:00
झारखंड चुनाव : झामुमो-कांग्रेस के फैसले से राजद गरम

  • झारखंड में कम सीट मिलने से राजद भड़का, विकल्प खुले होने की कही बात

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में इंडिया ब्लॉक में विधानसभा चुनाव के लिए सीट शेयरिंग पर विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने राज्य में गठबंधन के नेता हेमंत सोरेन और कांग्रेस के नेताओं की ओर से शनिवार को साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे लेकर की गयी घोषणा को एकतरफा बताया है। 

पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा है कि राजद के प्रमुख नेताओं की सहमति के बगैर और उनकी गैर-मौजूदगी में जिस तरह गठबंधन का ऐलान किया गया है, उससे हम आहत हैं। इसे लेकर पार्टी ने अपने सभी विकल्प खुले रखे हैं।

मनोज झा ने रांची में राजद की प्रदेश इकाई के नेताओं के साथ बैठक के बाद मीडिया से कहा, जब बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और हमारे नेता तेजस्वी यादव, पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दिकी, पार्टी के झारखंड प्रभारी जयप्रकाश यादव और प्रदेश अध्यक्ष रांची में मौजूद हैं तो उनसे परामर्श किए बगैर उनकी गैरमौजूदगी में गठबंधन का ऐलान एकतरफा तरीके से किया गया है और इससे हमें कष्ट पहुंचा है। हमें गठबंधन की प्रक्रिया में संलग्न नहीं किया गया, जबकि हमारे तमाम बड़े नेता यहां मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि सारे फैसले टू मिनट नूडल्स की तरह नहीं लिए जाते। उन्होंने कहा है कि गठबंधन के तहत हमें जितनी सीटें देने की बात कही गयी है, वह न तो राजद की ऐतिहासिक ताकत के अनुरूप है और न ही समकालीन परिस्थितियों के अनुकूल। उन्होंने कहा कि हम गठबंधन के साथियों से आग्रह करेंगे कि वे इन्हीं परिस्थितियों के अनुरूप फैसला लें।

उल्लेखनीय है कि झारखंड में इंडिया ब्लॉक के नेता और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तथा कांग्रेस के झारखंड प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने शनिवार दोपहर एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में गठबंधन के दलों में सहमति का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि गठबंधन के तहत झामुमो और कांग्रेस राज्य की 70 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, जबकि बाकी 11 सीटों का बंटवारा राजद और वाम दलों के बीच होगा।

Published / 2024-10-20 22:53:40
झारखंड : अब भाजपा भी नहीं रही परिवारवाद से अछूता

  • झारखंड चुनाव में पूर्व सीएम के परिवार का दबदबा
  • पत्नी समेत बेटे और बहू को भाजपा ने दिया टिकट

टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के परिवार के सदस्यों को टिकट देकर परिवारवाद का मुद्दा उठाया है। भाजपा ने चार पूर्व मुख्यमंत्रियों के परिवार के सदस्यों को चुनावी मैदान में उतारा है। 

इनमें से दो पूर्व मुख्यमंत्री खुद चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि दो की पत्नियों को भी पार्टी ने टिकट दिया है। इसके अलावा, एक पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे और दूसरे की बहू को भी चुनाव लड़ने का मौका मिला है। इसके साथ ही, एक बीमार विधायक की पत्नी और एक पूर्व विधायक के बड़े भाई को भी टिकट मिला है।

भाजपा ने 3 बार झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके अर्जुन मुंडा की पत्नी मीरा मुंडा को पोटका विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। उन्हें मेनका सरदार का टिकट काटकर पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया है। इसी तरह मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा को भी भाजपा ने जगन्नाथपुर सीट से टिकट दिया है।

गीता कोड़ा ने पहले सिंहभूम लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में ओडिशा के राज्यपाल रघुवर दास की बहु पूर्णिमा दास साहू को जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा सीट से टिकट मिला है।

वहीं, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन को घाटशिला से भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है। इसके अतिरिक्त, भाजपा ने बीमार विधायक इंद्रजीत महतो की पत्नी तारा देवी को सिंदरी विधानसभा से चुनाव लड़ने का मौका दिया है। साथ ही ढुलू महतो, जो बाघमारा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार जीत चुके हैं, अब धनबाद के सांसद बन गये हैं।

बता दें कि झारखंड विधानसभा चुनाव में उनकी जगह उनके बड़े भाई शत्रुघ्न महतो को बाघमारा से अपना उम्मीदवार बनाया है। ढुलू महतो ने पहले इस सीट पर जलेश्वर महतो को हराया था। इस बार चुनाव में भाजपा के टिकट वितरण ने परिवारवाद के मुद्दे को फिर से उजागर किया है।

Published / 2024-10-20 21:48:17
क्या एक बार फिर निर्दलीय विधायक देगा पलामू!

पलामू में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतने का रहा है इतिहास 

टीम एबीएन, पलामू/ रांची। पलामू के नेताओं का अपने राजनीतिक दमखम कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतने का भी लंबा इतिहास रहा है। इंदर सिंह नामधारी, विदेश सिंह, विनोद सिंह, अवधेश कुमार सिंह के नाम इस सूची में शामिल हैं। 1972 में अवधेश कुमार सिंह (अब दिवंगत) ने हुसैनाबाद विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज कर सबको चौंकाया था। 

उन्होंने जगनारायण पाठक जैसे कद्दावर नेता को हराया था। 1977 में विश्रामपुर विधानसभा सीट से विनोद सिंह ने (अब दिवंगत) निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता था। वहीं, 1980 में हुए चुनाव में विनोद सिंह ने जनता पार्टी के टिकट पर विश्रामपुर से चुनाव जीता था। पार्टी से टिकट नहीं मिलने की स्थिति में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पूर्व मंत्री संकेटश्वर सिंह उर्फ संतु सिंह (अब स्वर्गीय) ने पांकी से चुनाव जीता था। 

वह कांग्रेस के स्थापित नेता थे, लेकिन 1995 के चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया। वर्ष 2007 में डाल्टेनगंज विधानसभा का उपचुनाव इंदर सिंह नामधारी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा और जीत दर्ज की। 2005 में वह जदयू के टिकट पर डाल्टेनगंज विस से निर्वाचित हुए थे। 2007 में पलामू में लोकसभा उपचुनाव के दौरान उपजे विवाद के कारण नामधारी ने पार्टी छोड दी थी।

विधायकी से इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसी तरह 2009 के विधानसभा चुनाव में विदेश सिंह (अब स्वर्गीय) ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पांकी विस से चुनाव लड़ कर जीत दर्ज की थी। 2005 का चुनाव विदेश सिंह ने राजद से लड़ा था। लेकिन, 2009 के चुनाव में राजद ने उन्हें टिकट नहीं दिया, तो उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ कर अपना राजनीतिक दमखम दिखाया था। 

एक बार फिर पार्टी नेताओं की अनदेखी और नये बोरो प्लेयरों को टिकट देने के बाद पलामू के कई नेता निर्दलीय चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं। ऐसे में लोगों के मन में एक ही बात कौंध रहा है कि क्या इस बार भी पलामू अपने पुराने इतिहास को दोहरायेगा?

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