एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा/ रांची। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर देश में चल रही बहस के बीच लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने इस मुद्दे पर अपनी स्पष्ट और कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी किये जाने के बाद कि अब देश में यूसीसी लागू करने का समय आ सकता है।
सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को नजर अंदाज कर कोई भी फैसला लेना उचित नहीं होगा। सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि भारत एक अत्यंत विविधताओं वाला देश है, जहां 10 हजार से अधिक बोलियां और भाषाई रूप प्रचलित हैं तथा अनेक जातीय समूह और समुदाय अपने-अपने परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ जीवन जीते हैं।
ऐसे में एक समान कानून लागू करने के सवाल पर व्यापक और गंभीर चर्चा जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से आदिवासी समुदायों का जिक्र करते हुए कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले आदिवासी समाज आज भी अपनी पारंपरिक व्यवस्थाओं, रीति-रिवाजों और भाषाओं के अनुसार जीवन यापन करते हैं।इन समुदायों की सामाजिक व्यवस्था, विवाह, संपत्ति और पारिवारिक परंपराएं अलग-अलग हैं, जिन्हें समझे बिना किसी एक कानून को लागू करना कई तरह की जटिलताएं पैदा कर सकता है।
सुखदेव भगत ने कहा कि भारत की पहचान उसकी सांस्कृतिक बहुलता और विविधता से है। ऐसे में किसी भी कानून को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उससे देश के विभिन्न समुदायों, विशेषकर आदिवासी समाज की परंपराओं और अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कानून बनाने की प्रक्रिया संवाद, सहमति और सभी पक्षों की भागीदारी पर आधारित होनी चाहिए।
यदि यूसीसी जैसे महत्वपूर्ण विषय पर निर्णय लेना है तो सरकार को सभी समुदायों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों से व्यापक विचार-विमर्श करना चाहिए।सांसद ने यह भी कहा कि भारत के संविधान में विभिन्न समुदायों की परंपराओं और अधिकारों की रक्षा का प्रावधान है, इसलिए किसी भी नए कानून को लागू करते समय संविधान की भावना और देश की विविधता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
टीम एबीएन, रांची। हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) में यूनियन मान्यता को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एचईसी प्रबंधन के बिना चुनाव कराये दो यूनियनों को मान्यता देने के फैसले के खिलाफ कई श्रमिक संगठन खुलकर सामने आ गये हैं। श्रमिक संगठनों ने इसे श्रमिक लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए फैसले पर कड़ा विरोध जताया है।
यूनियन नेताओं का कहना है कि अगर किसी संगठन को आधिकारिक मान्यता देनी थी तो इसके लिए पहले निष्पक्ष चुनाव कराया जाना चाहिए था। चुनाव के माध्यम से जो यूनियन श्रमिकों का बहुमत हासिल करती, उसे ही मान्यता दी जानी चाहिए थी। यूनियन नेताओं को आरोप है कि प्रबंधन ने बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के चुपचाप दो यूनियनों को रिकॉग्नाइज कर दिया, जिससे बाकी संगठनों और श्रमिकों में असंतोष बढ़ गया है।
श्रमिक नेताओं ने याद दिलाया कि एचईसी में आखिरी बार वर्ष 2015 में यूनियन चुनाव कराया गया था। ऐसे में लगभग दस साल बाद भी चुनाव नहीं कराया जाना और सीधे दो यूनियनों को मान्यता देना श्रमिक अधिकारों के साथ अन्याय है। उनका कहना है कि यूनियन चुनाव श्रमिकों के लोकतांत्रिक अधिकार का हिस्सा है। इसे नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
बीएमएस के जनरल सेक्रेटरी रमाशंकर सिंह ने कहा एचईसी प्रबंधन का यह फैसला पूरी तरह से श्रमिक लोकतंत्र के खिलाफ है। यदि किसी यूनियन को मान्यता देनी है तो पहले पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव कराया जाना चाहिए। बिना चुनाव के किसी संगठन को रिकॉग्नाइज करना श्रमिकों के अधिकारों का हनन है। प्रबंधन को इस निर्णय पर तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए और जल्द से जल्द यूनियन चुनाव की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए
विभिन्न यूनियनों ने प्रबंधन से मांग की है कि वह इस फैसले को वापस ले और पारदर्शी तरीके से यूनियन चुनाव कराए। चुनाव के बाद जो संगठन श्रमिकों का बहुमत प्राप्त करे, उसे ही आधिकारिक मान्यता दी जाये, ताकि संस्थान में लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम रह सके। इस मुद्दे पर हटिया प्रोजेक्ट वर्कर यूनियन, एचईसी मजदूर संघ (बीएमएस), एचईसी श्रमिक संघ और जनता मजदूर यूनियन सहित कई श्रमिक संगठन एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं। इन संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आगे आंदोलन की रणनीति भी बनाई जा सकती है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड स्टेट बार काउंसिल के चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गयी हैं। राज्य भर के अधिवक्ता 12 मार्च को अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे। इस बार काउंसिल के कुल 23 पदों के लिए लगभग 100 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इनमें 25 महिला उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा रही हैं, जबकि कुल पांच सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
बार काउंसिल चुनाव के लिए राज्य भर में कुल 25,001 अधिवक्ता मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं। काउंसिल की ओर से मतदाताओं की सूची भी जारी कर दी गयी है। सभी जिला बार एसोसिएशन में मतदान की तैयारी पूरी कर ली गई है और अधिवक्ताओं के बीच चुनावी सरगर्मी तेज हो गर्यी है।
इस चुनाव में अधिवक्ताओं को वरीयता के आधार पर मतदान करना होगा। झारखंड स्टेट बार काउंसिल ने मतदान की प्रक्रिया को लेकर नियम-30 के तहत विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके अनुसार मतदाता को मतपत्र पर अपने पसंदीदा उम्मीदवार के सामने वरीयता शब्दों में लिखनी होगी।
निर्देश के अनुसार मतदाता अपने पहले पसंदीदा उम्मीदवार के सामने संख्या लिखेंगे। इसके बाद अन्य उम्मीदवारों के सामने क्रमवार दो, तीन, चार और पांच आदि लिखकर वरीयता दर्ज की जा सकती है। यदि कोई मतदाता 1, 2, 3 जैसे अंकों में वरीयता दर्ज करता है तो उसका मत अमान्य घोषित किया जा सकता है।
इसके अलावा मतपत्र पर हस्ताक्षर करने या ऐसा कोई निशान लगाने की मनाही है, जिससे मतदाता की पहचान हो सके। बार काउंसिल ने यह भी स्पष्ट किया है कि मतदाता अपनी वरीयता बड़े या छोटे अक्षरों में लिख सकते हैं, लेकिन लिखावट साफ और स्पष्ट होनी चाहिए।
बार काउंसिल के अनुसार यदि मतदान के दौरान रिटर्निंग आॅफिसर को नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो वह संबंधित मत को अमान्य घोषित कर सकता है। चुनाव को लेकर राज्य के सभी जिला बार एसोसिएशन में अधिवक्ताओं के बीच प्रचार-प्रसार भी तेज हो गया है और उम्मीदवार मतदाताओं से समर्थन मांग रहे हैं।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली/लोहरदगा। देश के कई हिस्सों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत को लेकर मचे हाहाकार के बीच कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो सरकार आत्मनिर्भरता का दावा करती थी, वह आज जनता को संकट में छोड़कर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रही है।
सांसद सुखदेव भगत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि साल 2022 में प्रधानमंत्री ने देश को भरोसा दिलाया था कि भारत ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी आयात निर्भरता को कम करेगा। भगत ने कटाक्ष करते हुए कहा कि आज स्थिति इसके ठीक विपरीत है।
हम आयात कम करने के बजाय दूसरे देशों पर और अधिक आश्रित हो गए हैं। सरकार के कथनी और करनी का अंतर अब जनता के सामने है। देश की वर्तमान ऊर्जा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने मांग की है कि इस गंभीर संकट पर संसद के पटल पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश यह जानना चाहता है कि भविष्य के लिए सरकार के पास क्या ठोस कदम हैं। वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए सुखदेव भगत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध के परिणामों ने अब अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है।सरकार इस संकट का पूर्व अनुमान लगाने में पूरी तरह विफल रही है। यह सरकार केवल दावों तक सीमित है और जब जिम्मेदारी निभाने का वक्त आता है, तो यह पीछे हट जाती है।
कमर्शियल गैस की कमी का सीधा असर छोटे व्यापारियों, हलवाइयों और होटल कारोबारियों पर पड़ रहा है।सांसद ने स्पष्ट किया कि गैस की यह कमी न केवल व्यापार को ठप कर रही है, बल्कि बाजार में महंगाई को भी बढ़ावा दे रही है। लबोलुआब यह है कि सरकार की अदूरदर्शिता के कारण आज आम आदमी और व्यापारी वर्ग को इस किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा/कोलकाता। पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस पार्टी ने भी चुनावी रणनीति को मजबूत करने के उद्देश्य से नवनियुक्त पर्यवेक्षकों की महत्वपूर्ण बैठक कोलकाता स्थित बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमिटी भवन में आयोजित की। बैठक में विभिन्न जिलों के लिए नियुक्त पर्यवेक्षकों के साथ चुनावी तैयारियों, संगठन की मजबूती और जमीनी स्तर पर पार्टी की स्थिति को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव कांग्रेस पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और पार्टी पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य आम जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाना और संगठन को बूथ स्तर तक सशक्त बनाना है।
धीरज प्रसाद साहू ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता हमेशा से जनहित के मुद्दों को लेकर संघर्ष करते रहे हैं। आने वाले चुनाव में भी पार्टी जनता के विश्वास को जीतने के लिए पूरी ताकत से काम करेगी। उन्होंने सभी नवनियुक्त पर्यवेक्षकों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाकर संगठन को मजबूत करें और पार्टी की नीतियों को घर-घर तक पहुंचाने का काम करें।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी देश की सबसे पुरानी और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाली पार्टी है। जनता के हित, विकास और सामाजिक न्याय को प्राथमिकता देना ही कांग्रेस की पहचान रही है। पश्चिम बंगाल में भी पार्टी इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी।
बैठक में मौजूद नेताओं और पर्यवेक्षकों ने चुनाव को लेकर अपने-अपने सुझाव भी साझा किए। साथ ही आगामी चुनाव को लेकर संगठनात्मक रणनीति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। कांग्रेस नेताओं ने विश्वास जताया कि कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के समर्थन से पार्टी पश्चिम बंगाल में बेहतर प्रदर्शन करेगी।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा/ रांची। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका की भूमिका को लेकर चल रही अंतरराष्ट्रीय बहस के बीच लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद सुखद भगत ने युद्ध और हमलों की राजनीति पर गंभीर चिंता जतायी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी देश पर हमला कभी भी अच्छा कदम नहीं माना जा सकता और विवादों का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि दुनिया को यह समझना होगा कि युद्ध किसी भी समस्या का हल नहीं है।
उन्होंने कहा कि हमला कभी भी अच्छा कदम नहीं हो सकता। जब भी दो देशों या पक्षों के बीच विवाद हो, तो सबसे पहले संवाद और बातचीत का रास्ता अपनाया जाना चाहिए। युद्ध स्वयं में एक बड़ी समस्या है और यह किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि आज वैश्विक स्तर पर जिस तरह से तनाव और सैन्य टकराव बढ़ रहे हैं, उससे पूरी दुनिया में अस्थिरता का माहौल बन रहा है। ऐसे समय में बड़े और प्रभावशाली देशों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे टकराव को बढ़ाने के बजाय शांति और कूटनीतिक समाधान की दिशा में पहल करें।
सांसद भगत ने यह भी कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा शांति, संतुलन और संवाद पर आधारित रही है। भारत ने इतिहास में कई बार वैश्विक स्तर पर शांति और स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में भी दुनिया को युद्ध की राह छोड़कर बातचीत और समझौते का रास्ता अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी युद्ध का सबसे बड़ा नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ता है। युद्ध से न केवल हजारों लोगों की जान जाती है, बल्कि अर्थव्यवस्था, सामाजिक स्थिरता और मानवता को भी गहरा आघात पहुंचता है। ऐसे में सभी देशों को संयम और जिम्मेदारी के साथ निर्णय लेना चाहिए।
अंत में सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि विश्व शांति के लिए जरूरी है कि सभी देश युद्ध और हमले की राजनीति से ऊपर उठें और आपसी संवाद तथा कूटनीति के माध्यम से स्थायी समाधान खोजने की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि दुनिया को युद्ध नहीं, बल्कि संवाद, समझ और शांति की जरूरत है।
टीम एबीएन, रांची। असम में होने वाले संभावित विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गयी हैं। इसी बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) भी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुट गया है। इसी कड़ी में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 10 मार्च को असम दौरे पर जायेंगे।
असम विधानसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ती जा रही है। चुनावी माहौल के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) भी असम में अपना जनाधार बढ़ाने की तैयारी में है। इसी उद्देश्य से झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 10 मार्च को असम जायेंगे। दौरे के दौरान मुख्यमंत्री असम में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। वह 10 मार्च की रात असम में ही रुकेंगे और 11 मार्च को रांची लौटेंगे।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब अप्रैल-मई में असम में संभावित विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल सक्रिय हो गये हैं। ऐसे में झामुमो भी राज्य में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले भी फरवरी महीने में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन असम के दौरे पर गये थे। उस दौरान उन्होंने असम के चाय बागानों में रहने वाले करीब 70 लाख आदिवासियों के अधिकारों की बात उठायी थी।
खासकर मुंडा, उरांव और संथाल समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिलाने की मांग पर जोर दिया था। मुख्यमंत्री ने वहां रहने वाले आदिवासियों की समस्याओं को दूर कराने का भरोसा भी दिया था। उन्होंने कहा था कि जरूरत पड़ी तो झारखंड के आदिवासी भी उनके समर्थन में असम आयेंगे।
टीम एबीएन, रांची। रांची में स्थित रांची सिविल कोर्ट को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली है। यह धमकी ई-मेल के जरिए भेजी गयी, जिसके बाद पुलिस और बम निरोधी दस्ता तुरंत सक्रिय हो गया। सूचना मिलते ही सुरक्षा एजेंसियों ने कोर्ट परिसर में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया।
धमकी मिलने के बाद पुलिस की टीम और बम निरोधी दस्ता मौके पर पहुंचा और पूरे कोर्ट परिसर की जांच की। सुरक्षा के लिहाज से परिसर के आसपास भी निगरानी बढ़ा दी गयी। हालांकि अब तक की जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है।
गौरतलब है कि इससे पहले फरवरी महीने में भी रांची सिविल कोर्ट, डीसी कार्यालय, पासपोर्ट आफिस सहित झारखंड के कई न्यायालयों को इसी तरह ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। पुलिस का मानना है कि किसी शरारती तत्व द्वारा इस तरह की अफवाह फैलाने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और दोषियों का पता लगाने का प्रयास जारी है।
घटना के बाद कोर्ट परिसर में आने-जाने वाले सभी लोगों की सघन जांच की जा रही है। प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा जांच को और सख्त कर दिया गया है। एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिस बल की भी तैनाती की गयी है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
फिलहाल जांच के दौरान किसी प्रकार की संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। मौके पर कोतवाली डीएसपी समेत बम निरोधक दस्ता और पुलिस के अन्य अधिकारी मौजूद हैं और पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं। पुलिस ई-मेल भेजने वाले व्यक्ति की पहचान करने के लिए तकनीकी जांच भी कर रही है।
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