टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि महा रामनवमी हिंदू धर्म के एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व के रूप में मनायी जाती है, जो भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है इस वर्ष रामनवमी का उत्सव 6 अप्रैल को मनाया जायेगा।
पंचांग के अनुसार रामनवमी की तिथि 5 अप्रैल की संध्या 7:26 बजे से प्रारंभ होकर 6 अप्रैल की संध्या 7:22 बजे तक रहेगी उदया तिथि के अनुसार रामनवमी 6 अप्रैल को मनाया जायेगा। महा रामनवमी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय समाज की सांस्कृतिक धरोहर का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। भगवान राम का जन्म त्रेतायुग में हुआ था, जब धरती पर राक्षसों का अत्याचार बढ़ गया था।
भगवान राम ने राक्षसों का वध कर धर्म की पुन: स्थापना की। रामनवमी इस महान कार्य को स्मरण करने का अवसर है। इस दिन का धार्मिक महत्व इतना अधिक है कि यह भारत के विभिन्न हिस्सों में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। रामनवमी के दिन, श्रद्धालु प्रात:काल स्नान करके व्रत करते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और राम कथा का आयोजन भी किया जाता है।
राम का मंत्र श्रीराम जय राम जय जय राम का जाप भक्तगण पूरे दिन करते हैं, जिससे उन्हें मानसिक शांति और दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है। कई स्थानों पर रामलीला का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें भगवान राम के जीवन के विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया जाता है। इसके अलावा महा रामनवमी का एक और विशेष पहलू है।
रथ यात्रा खासकर श्रीराम के जन्मस्थान अयोध्या में इस दिन विशाल रथ यात्रा का आयोजन होता है, जिसमें हजारों भक्त भाग लेते हैं। रथ में भगवान राम के प्रतीक के रूप में सुंदर मूर्तियों की सवारी की जाती है और यह यात्रा पूरे शहर में धूमधाम के साथ निकलती है। इस दिन का महत्व न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से है, बल्कि यह हमें जीवन के मूल्य और सिद्धांतों को समझने का भी अवसर प्रदान करता है।
भगवान राम के जीवन से हमें सत्य, न्याय और धर्म के रास्ते पर चलने की प्रेरणा मिलती है। महा रामनवमी का पर्व भारतीय संस्कृति और समाज में एकता, प्रेम, और भाईचारे का प्रतीक बनकर उभरता है। महा रामनवमी न केवल भगवान राम के जन्म का उत्सव है, बल्कि यह हमें उनके आदर्शों और शिक्षाओं का अनुसरण करने की प्रेरणा भी देता है। यह दिन हमें आत्मा की शुद्धि, समाज की भलाई और धर्म की महिमा का अनुभव कराता है।
रामनवमी आस्था भक्ति और धर्म का संदेश देता है यह पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है बल्कि यह धर्म सत्य मर्यादा और कर्तव्य के पालन का प्रतीक भी है। भगवान श्री राम का जीवन हमें यह सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य बनाये रखना चाहिए और सदैव धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। इस दिन भगवान श्रीराम का स्मरण करने और उनके आदर्शों को अपनाने से व्यक्ति के जीवन में शांति समृद्धि और सफलता का संचार होता है।
रामनवमी के दिन मां दुर्गे के नवम स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्व है। देवी सिद्धिदात्री को सभी प्रकार की सिद्धियों का दाता माना जाता है। उनकी आराधना से व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है और जीवन की सभी कठिनाइयां दूर होती है। यह भी कहा जाता है कि भगवान शिव ने सिद्धियों की प्राप्ति के लिए मां सिद्धि की आराधना की थी, इसलिए इस दिन देवी की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय लघु उद्योग लिमिटेड, भारत सरकार के निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व जन स्वास्थ्य अभियान के अंतर्गत स्वयंसेवी संस्था अभियान ने सीठियो रोड, एचईसी धुर्वा, रांची में आज महिलाओं एवं बच्चों के लिए नि:शुल्क जांच एवं परीक्षण शिविर लगाया।
शिविर में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विजेता सिंह ने उपस्थित महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया। संस्था अभियान ने इस शिविर में सीठिओ बस्ती की गरीब एवं असहाय महिलाओं को जांचोपरांत दवा और सेनेटरी पैड मुफ्त में प्रदान किया।
इससे पहले शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय लघु उद्दोग लिमिटेड की रांची शाखा प्रमुख किरण तिरु का स्वागत पुष्पगुच्छ देकर एवं शॉल ओढ़ाकर डॉक्टर विजेता सिंह ने किया। शिविर में समय देने के लिए किरण तिरु ने डॉक्टर विजेता सिंह का धन्यवाद किया एवं उनका भी स्वागत अंगवस्त्र देकर किया।
आज के शिविर में लगभग 213 महिलाओं एवं बच्चों को देखा गया। मौके पर संस्था के सचिव मनोज कुमार राय, काउंसलर, अम्बिका रानी, कंपाउंडर शिवलाल प्रसाद, सहायक रमेश कुमार, गुनगुन, मौली तथा अन्वेषा उपस्थित थे। उक्त जानकारी मनोजकुमार राय और जय नारायण प्रसाद ने दी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर बड़ा निशाना साधा। मरांडी ने कहा कि सिरमटोली फ्लाइओवर रैंप निर्माण के खिलाफ झारखंड का आदिवासी समाज लंबे समय से चरणबद्ध आंदोलन कर रहा है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान निकालने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
मरांडी ने कहा कि सरना स्थल हमारी आस्था, संस्कृति और परंपरा की पहचान है, जिसे संरक्षित रखना हर आदिवासी का कर्तव्य है। बावजूद इसके राज्य सरकार ने आदिवासियों की आवाज को अनसुना कर दिया, जिससे समाज में गहरा आक्रोश है।
मरांडी ने कहा कि आदिवासी होने के नाते मुख्यमंत्री से उम्मीद थी कि वे समाज की पीड़ा समझेंगे और आंदोलनकारियों से संवाद कर सरना स्थल की रक्षा सुनिश्चित करेंगे, लेकिन सरकार की निष्क्रियता साबित करती है कि वह आदिवासियों की मांगों को पूरा करने की इच्छुक नहीं है।
श्री मरांडी ने कहा कि सरहुल पर्व के अवसर पर आदिवासी समाज द्वारा मुख्यमंत्री का विरोध स्पष्ट संदेश देता है कि यह सरकार अबुआ सरकार नहीं, बल्कि अहंकारी सरकार बन चुकी है, जो अपने ही लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम कर रही है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। झारखंड के धनबाद में इन दिनों अपराधियों के हौसले काफी बुलंद है। अपराधी इतने बेखौफ हैं कि दिनदहाड़े चोरी, लूट व गोली चलाने जैसी घटना को आराम से अंजाम देकर फरार हो रहे हैं। इस तरह की आपराधिक घटना धनबाद में आम बात हो गई है।
धनबाद में पुलिस पस्त और अपराधी मस्त है। ताजा मामला बुधवार की सुबह की है। यहां धनबाद थाना क्षेत्र के हाउसिंग कॉलोनी में हुई है, जहां बाइक सवार अपराधियों ने मंदिर से पूजा कर घर लौट रही महिला के गले से सोने की चेन छीनकर फरार हो गये हैं।
पीड़ित महिला की पहचान सरस्वती पांडे साक्षी अपार्टमेंट, दादा दादी पार्क के समीप की रहने वाली के रूप में हुई है। पीड़ित महिला एसएनएमएमसीएच अस्पताल के रिटायर्ड कर्मी की पत्नी है। हालांकि घटना के बाद पीड़ित महिला शिकायत करने के लिए धनबाद थाने पहुंची है।
*प्रेस विज्ञप्ति*
*श्री लक्ष्मी वेंकटेश्वर अन्नपूर्णा सेवा मे हुआ ठंडा पेयजल मशीन का शुभारंभ*
पहाड़ी रोड स्थित रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा संचालित श्री लक्ष्मी वेंकटेश्वर अन्नपूर्णा सेवा मे ठंडा शीतल पेयजल मशीन का लगाया गया। समाजसेवी राजकुमार मित्तल एवं धर्मपत्नी संगीता मित्तल के सौजन्य से स्व. चंद्रकला देवी मित्तल (धर्मपत्नी स्व. नंदकिशोर मित्तल) के चौथे पुण्य स्मृति मे प्रदान की गई। आधुनिक ठंडा पेयजल मशीन का विधिवत शुभारंभ तिरुपति बालाजी मंदिर के पुजारी सत्यनारायण गौतम ने पूरे विधि विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ किया। तत्पश्चात राजकुमार मित्तल ने श्रीफल फोड़ कर पूजा अर्चना एवं प्रसाद चढ़ाकर ठंडा पेयजल मशीन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के महामंत्री विनोद कुमार जैन एवं संयुक्त महामंत्री संजय सर्राफ ने मित्तल परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा की इस अन्नपूर्णा सेवा मे लोगों को शुद्ध भोजन के साथ-साथ ठंडा पेयजल भी हमेशा मिल पाएगा। तथा लोगों को गर्मी के मौसम मे ठंडा पानी से बहुत राहत मिलेगी उन्होंने कहा कि जल ही जीवन है तथा मानव सेवा से बढ़कर कोई कार्य नहीं। इस अवसर पर सुनील कुमार केडिया, विजया केडिया, राजकुमार मित्तल, संगीता मित्तल, विनोद कुमार जैन, संजय सर्राफ, द्वारका प्रसाद अग्रवाल, मनोज रूईया, अभिनव मित्तल,अभिषेक मित्तल, रमेश बंका, सांवरमल बुधिया, निर्भय शंकर हरित, आदि उपस्थित थे। उक्त जानकारी रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता
प्रेस प्रकाशनार्थ
संजय सर्राफ
टीम एबीएन, रांची। बजरंग दल झारखंड प्रांत के प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो ने एक प्रेस बयान जारी कर कहा है कि झारखंड में एक बार फिर हिन्दुओं के धार्मिक जुलूस पर इस्लामिक जिहादियों ने पथराव कर धार्मिक जुलूस पर रोड़ा अटकाने का कार्य किया है।
घटना कोडरमा जिला अंतर्गत चेचाई में होने वाले यज्ञ को लेकर भिक्षा के लिए सात गांव भ्रमण के लिए निकली महिलाओं के जत्थे पर छतरबर में नारा ए तदबीर - अल्लाह हू अकबर का नारा लगाकर जानलेवा हमला किया गया है। यह घटना आज प्रात: 9 बजे की है।
वहीं रांची जिले के हेठ बालू गांव में सरना जुलूस को भी जिहादी मुसलमानों ने वही नारा - नारा ए तदबीर - अल्लाह हू अकबर लगाकर जानलेवा हमला किया तथा सरना झंडे का अपमान करते हुए उसे फेंक दिया। कई लोग इस हमले में गंभीर रूप से घायल बताये जा रहे हैं।
बजरंग दल प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो ने समस्त सनातन धर्मावलंबियों से आग्रह किया है कि ऐसे विछिप्त जिहादी मानसिकता वाले उपद्रवियों से हमेशा सतर्क रहें और उनका मुंह तोड़ जवाब देने के लिए तैयार रहें अन्यथा ऐसे ही पीटते रहेंगे।
अब भी वक्त है समय रहते सभी संगठित होकर अपने धर्म संस्कृति की रक्षा हेतु कम से कम सप्ताह में एक निश्चित दिन तथा निश्चित समय पर एकत्र होकर चिंतन करें। साथ ही हेमंत सरकार इन सभी घटनाओं को तत्काल संज्ञान में लेकर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करे और सरकार के प्रति तथा कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास खोती सनातन धर्मावलंबियों का विश्वास प्राप्त करने के लिए साकारात्मक पहल करे।
टीम एबीएन, रांची। श्री महावीर मंडल, बड़ागांई के तत्वाधान में सरहुल पूजा शोभा यात्रा में सम्मिलित धर्मावलंबियों पर बड़ागांई चौक में पुष्पवर्षा कर एवं समिति के पदाधिकारियों व मुख्य पहान को माला पहनाकर, चना और शरबत के साथ स्वागत किया गया।
मौके पर विश्व हिंदू परिषद झारखंड-बिहार के सहमंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु ने सभी धर्मावलंबियों को स्वागत करते हुए कहा प्रकृति पर्व सरहुल पूजा में नवपल्लव व नवपुष्प से पूजन कर समग्र जीवन के कल्याण के लिए आराधना की जाती है। सरहुल पर्व सनातनियों के लिए नववर्ष का प्रतीक है। पर्यावरण की रक्षा के लिए यह पर्व अत्यंत ही प्रासंगिक है।
स्वागत शिविर में श्री महावीर मंडल बड़ागांई के मंत्री बस कुमार साहू, कोषाध्यक्ष मनोज कुमार, सह मंत्री शेखर कुमार, प्रचार सहमंत्री मनीष साहू, रिशु साहू, प्रेम कुमार, रामवृक्ष साहू, प्रकाश साहू शहीद कई कार्यकर्ता उपस्थित थे। उक्त जानकारी श्री महावीर मंडल, बड़ागांई के मंत्री बस कुमार साहू ने दी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में प्राकृतिक पर्व सरहुल हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। बता दें कि सरहुल झारखंड के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। सरहुल के मौके पर रांची के आदिवासी छात्रवास में आयोजित सरहुल कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हुए। साथ ही साथ विधायक कल्पना सोरेन, मंत्री चमरा लिंडा और मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट कर सरहुल में दो दिनों के राजकीय छुट्टी का एलान किया। झारखंड के प्रमुख त्योहारों में से एक प्राकृतिक पर्व सरहुल के मौके पर राजधानी रांची में कई कार्यक्रम आयोजित किये गये। तमाम आदिवासी समाज के लोग सरहुल के अवसर पर उत्साहित नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी सरहुल के रंग में रंगे हुए नजर आये।
रांची के करमटोली स्थित आदिवासी छात्रवास में प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी भव्य सरहुल का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हुए। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि सरहुल महज एक त्योहार ही नहीं बल्कि प्रकृति से जुड़ाव का एक प्रतीक है। इसलिए इस पर्व को प्राकृतिक पर्व के तौर पर जाना जाता है।
सरहुल पर्व पर हमें प्रण लेना चाहिए कि हमारे आदिवासी परंपरा और संस्कृति को सदैव जीवित रखेंगे। झारखंड सरकार के द्वारा आदिवासी समाज के उत्थान के लिए कई योजनाएं लायी जा रही हैं। खासकर आदिवासी युवा कैसे आगे बढ़ें, इस पर झारखंड सरकार एक विजन के तहत कार्य कर रही है। सरहुल का महत्व झारखंड में देखने को मिलता है।
इस पर्व की गरिमा को समझते हुए राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट कर जानकारी दी। सरहुल पर अब से राज्य में दो दिनों की छुट्टी प्रदान की जायेगी। मुख्यमंत्री ने एक्स पर लिखा, पिछले कई वर्षों से सरहुल के अवसर पर दो दिन के राजकीय अवकाश की मांग उठ रही थी। आदिवासी समाज के इस महापर्व को देखते हुए हमने यह निर्णय लिया।
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