झारखंड

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Published / 2025-10-04 20:35:24
रांची : सात सेवानिवृत्त शिक्षक डीसी के हाथों सम्मानित

रांची डीसी ने सात सेवानिवृत्त शिक्षकों को किया सम्मानित 

टीम एबीएन, रांची। समाहरणालय ब्लॉक-ए में आज सेवानिवृत्ति विदाई सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजन्त्री ने की। 

इस अवसर पर जिले के 7 सेवानिवृत्त शिक्षकों को मोमेंटो और शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। उपायुक्त ने बताया कि अब शिक्षकों को सेवानिवृत्ति के दिन ही सभी लाभ दिये जा रहे हैं, जिसे उन्होंने बड़ी उपलब्धि बताया। 

उन्होंने सेवानिवृत्त शिक्षकों को भविष्य में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े रहने और अपने अनुभवों को विभाग के साथ साझा करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही, उन्हें उज्ज्वल भविष्य, लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की शुभकामनाएं दीं। उपायुक्त ने इस आयोजन के लिए जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज को विशेष धन्यवाद दिया। 

सम्मानित सेवानिवृत्त शिक्षक 

  1. राजू कुमार उपाध्याय : सशि, राउमवि गागी, कांके 
  2. सरोज लकड़ा : सशि, रामवि सुकुरहुद्ध, कांके 
  3. अनिल कुमार : सशि, रामवि टांगर, चान्हो 
  4. विनोद कुमार : सशि, रामवि लुन्दरी, चान्हो 
  5. अजय कुमार : सशि, रामवि लालगुटुवा, नगड़ी 
  6. सुमन किस्पोट्टा : सशि, सेंट जोसेफ मध्य विद्यालय, हुलहुंडू 
  7. जीवानी बागे : सशि, गोस्नर मध्य विद्यालय, रांची-2

Published / 2025-10-04 20:33:24
पर्यावरण और पारिस्थितिकी के महान संरक्षक थे सैंट फ्रांसिस : बिशप विंसेंट

फ्रैंसिस्कन धर्मसभा जिमों ने मनाया प्रकृति के संरक्षक संत फ्रांसिस आफ असीसी का पर्व 

संत फ्रांसिस आफ असीसी का पर्व धूमधाम से मना 

टीम एबीएन, रांची। फ्रांसिस्को टी ओ आर धर्म समाज के धर्म समाजियों ने आज अपने धर्म के संस्थापक और प्रकृति के संरक्षक संत फ्रांसिस आॅफ असीसी का पर्व धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर सेंट फ्रांसिस चर्च हरमू में समारोही मिस्सा चढ़ा कर इस शुभ दिन के लिए प्रभु का धन्यवाद किया गया।  

आर्च बिशप विंसेंट आईंद बतौर मुख्य अनुष्ठाता रहे। जबकि उनके साथ बतौर सह अनुष्ठाता  फ्रैंसिस्कन धर्मसंध रांची के प्रोविंशियल फादर मनोज वेंगाथानम टीओआर, फादर हिलारियस बरला, फादर इसीदोर केरकेट्टा, फादर मथियस कंडुलना, फादर जसमन टोप्पो समेत अन्य पुरोहित गण शामिल थे।

मुख्य अनुष्ठाता बिशप विंसेंट ने अपने समारोही संदेश में कहा कि हजारों वर्ष पूर्व इटली के असीसी में जन्मे संत फ्रांसिस पर्यावरण और परिस्थिति के महान संरक्षक थे उन्होंने सूरज चांद तारे पहाड़ पर्वत पेड़-पौधे नदी झरने समुद्र पशु पक्षी छोटे जीव जंतु से लेकर विशाल जानवरों से प्रेम किया उनके साथ सह अस्तित्व में रहे तथा उनका संरक्षण कियाऔर उनकी सेवा में ईश्वरीय प्रेम को अनुभव किया। 

उनकी  दूरदर्शिता थी कि हजारों वर्ष पूर्व उनकी जल संरक्षण वन संरक्षण वायु संरक्षण पर जोर दिया इस कारण  1979 में पोप जॉन पॉल द्वितीय ने उन्हें पर्यावरण और पारिस्थितिकी का महान संरक्षक संत घोषित किया था साथ ही उन्हें जानवरों के संरक्षक संत के रूप में भी सम्मानित किया था। 

पूरे विश्व में मौजूदा पर्यावरणीय संकट और पारिस्थितिकी संकट को देखते हुए न सिर्फ फ्रांसिस्कन धर्म समाज और उनके अनुसरणारथी बल्कि हर एक व्यक्ति चाहे वह किसी भी धर्म समुदाय का क्यों ना हो आज संत असीसी के संत फ्रांसिस के  पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांत को स्वीकारने वह अपनाने को बाध्य है। 

उन्होंने कहा कि एक संपन्न और धनी परिवार में जन्मे फ्रांसिस ने विलासिता के जीवन का परित्याग कर ईश्वरीय सेवा में निर्धनता शुद्धता और विनम्रता का जीवन अपनाया। प्रकृति में सभी को सम्मान दिया। लोगों को उन सभी का महत्व समझाया प्रकृति और पर्यावरण के प्रति अपने गहरे प्रेम तथा ईसा मसीह के प्रति अपने समर्पण और गरीब एवं बीमारी की सेवा के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया।

असीसी के संत फ्रांसिस ही थे जिन्होंने यीशु मसीह के जन्म के दृश्य को बतौर जीवन चरनी  सबसे पहले जीवंत प्रस्तुत किया था। रोमन कैथोलिक इतिहास में हुए सबसे सम्मानित धार्मिक हस्तियों में से एक है तथा ना के की सेंट कैथरीन इटली के संरक्षक संत है। उनके इंजन उत्साह गरीबों के प्रति समर्पण दान और व्यक्तिगत करिश्मा ने हजारों अनुयायियों को उनकी ओर आकर्षित किया। 

वर्ष 1209 में उन्होंने अपने अनुयायियों के साथ मिलकर फ्रांसिस्का धर्म समाज की स्थापना की जो निर्धनता और आगे कार्यकारिता के साथ आज भी पूरे विश्व में लोगों को शिक्षक सेवा स्वास्थ्य सेवा और नैतिक शिक्षा देते हुए समाज के निर्माण में समर्पित है वर्ष 1226 में उनका निधन हो गया और वर्ष 1228 में उन्हें संत घोषित किया गय। फ्रांसिस धर्म समाज त्यौहार के असम के पुरोहित आज पूरी दुनिया के विभिन्न देश में गरीब दुखियों और शिक्षितों की सेवा में समर्पित है।  

दो कामिल बुल्के पथ स्थित फ्रांसिस धर्म समाज के फ्रांसिस ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट में आज इस अवसर पर विभिन्न धर्म समाज के पुरोहितों धर्म बहनों धर्म बांधो और नव शिष्याओं ने सामूहिक रूप से उनकी आराधना की और फ्रांसिस धर्म समझो को उनके इस विशेष पर्व की शुभकामनाएं दी साथ ही सब होने एक स्वर में संत फ्रांसिस के पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांत को अपने और व्यक्तिगत जीवन में जीने एवं दूसरों को वैसाजीवन जीने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।

Published / 2025-10-04 20:19:22
17 को रांची के प्रभात तारा मैदान में कुर्मियों के खिलाफ हुंकार भरेंगे आदिवासी

17 अक्तूबर को रांची में आदिवासी हुंकार महारैली, कुरमी को आदिवासी दर्जा नहीं देने का एलान 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में कुरमी समुदाय को आदिवासी सूची में शामिल करने की मांग को लेकर गहराता विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। इसके विरोध में राज्यभर के आदिवासी संगठनों ने 17 अक्तूबर को राजधानी रांची के प्रभात तारा मैदान में आदिवासी हुंकार महारैली आयोजित करने का एलान किया है। इस महारैली में लाखों की संख्या में आदिवासियों के जुटने की संभावना है।  

शनिवार को सिरम टोली सरना स्थल पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा और पूर्व मंत्री देवकुमार धान समेत कई आदिवासी नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन आदिवासियों के अस्तित्व और अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। 

गीताश्री उरांव ने कहा कि कुरमी समाज आदिवासियों के संवैधानिक हक, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आरक्षण, जमीन और गौरवशाली इतिहास पर कब्जा करने की साजिश रच रहा है। कल तक हमें असभ्य और जाहिल कहने वाले आज खुद को आदिवासी साबित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। लेकिन सभी ऐतिहासिक प्रमाण, मानवशास्त्रीय अध्ययन, डीएनए शोध और लोकुर कमेटी की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि कुरमी जाति आदिवासी/अनुसूचित जनजाति नहीं है। 

नेताओं ने आरोप लगाया कि कुरमी समाज अपने आपको आदिवासी दिखाने के लिए ऐतिहासिक विद्रोहों में झूठे तरीके से अपने नेताओं को जोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि चुआड़ विद्रोह में रघुनाथ महतो, कोल विद्रोह में बुली महतो और संथाल विद्रोह में चान्कू महतो जैसे नामों को जबरन आदिवासी इतिहास में घुसाया जा रहा है, जबकि यह ऐतिहासिक सच्चाई के साथ छल है। 

केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा कि 17 अक्तूबर की रैली आदिवासी समाज की एकता और ताकत का प्रदर्शन होगी। उन्होंने मांग की कि एसटी आरक्षण की पात्रता की जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित की जाए ताकि कोई भी समुदाय फर्जी इतिहास गढ़कर आदिवासी अधिकारों पर अतिक्रमण न कर सके।

आदिवासी संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि कुरमी को आदिवासी सूची में शामिल करने का हर प्रयास आदिवासी समाज को हाशिए पर डालने की साजिश है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। 17 अक्टूबर को रांची में होने वाली यह हुंकार महारैली आदिवासी एकजुटता और अस्तित्व की बड़ी परीक्षा मानी जा रही है।

Published / 2025-10-04 20:17:20
जामताड़ा : बंद घर में चोरी के तीन आरोपी गिरफ्तार

लाखों के सोने-चांदी के जेवर बरामद 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, जामताड़ा। बंद घर से लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवरात चोरी के मामले का जामताड़ा पुलिस ने उद्भेदन किया है। पुलिस ने चोरी के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साथ ही आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने चोरी गए सोने-चांदी के जेवरात भी बरामद किए हैं।

इसकी पुष्टि जामताड़ा एसपी राजकुमार मेहता ने की है। पकड़े गए अपराधियों में पिंटू कुमार सिंह, विवेक उर्फ पावर कर और सचिन सिंह शामिल है। तीनों अपराधी बिंदापाथर थाना क्षेत्र के श्रीपुर के निवासी हैं। 

एसपी ने बताया कि बिंदापाथर थाना क्षेत्र के श्रीपुर के रहने वाले पीड़ित मुकेश सिंह के आवेदन पर चोरी की प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। पीड़ित ने पुलिस को दिये गये आवेदन में बताया था कि वह घर में ताला बंद कर परिवार समेत वैष्णो देवी की यात्रा पर गये थे। इसी बीच उनके घर में चोरी हो गयी। चोरों ने घर में रखे करीब 10 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात और नगदी पर हाथ साफ कर दिया। जब मुकेश कुमार वापस जामताड़ा लौटे तो घर से सारा गहना गायब पाया। 

इसके बाद उन्होंने फौरन पुलिस को मामले की जानकारी दी। आवेदन मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी। एसपी ने मामले के उद्भेदन के लिए एसआईटी गठित कर दी। अनुसंधान के क्रम में पता चला कि श्रीपुर के रहने वाले तीन युवकों ने चोरी की घटना को अंजाम दिया है। पुलिस टीम ने छापेमारी कर श्रीपुर से ही तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

Published / 2025-10-04 16:06:56
कुर्मी के विरोध में आठ को बुंडू में आदिवासी समाज का आक्रोशमार्च

  • कुर्मी की ST मांग के विरोध में आदिवासी समाज एकजुट, 31 को बुंडू में आक्रोश रैली

टीम एबीएन, रांची। जादूर अखड़ा भवन दिउड़ी में ललिन सिंह मुंडा (बांड़ोवा) की अध्यक्षता में आदिवासी समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसका संचालन सिदाम सिंह मुंडा ने किया। 

इस बैठक में लोहरा समाज, पुरान समाज, मुंडा समाज, पातर मुंडा समाज सहित कई सामाजिक संगठनों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में कहा गया कि कुर्मी/कुड़मी/महतो समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) सूची में शामिल करने की गैर-न्यायिक मांग का विरोध किया जायेगा। 

इसके खिलाफ व्यापक आंदोलन की रणनीति अपनाई जाएगी। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 31 अक्टूबर 2025 को बुंडू में विशाल आक्रोश रैली आयोजित की जाएगी। 

इससे पहले 28 सितंबर  को पांचपरगना आदिवासी समाज, झारखंड मुंडा समाज, आदिवासी सेवा संस्था, आदिवासी छात्र संघ और पांचपरगना छात्र संघ के संयुक्त तत्वावधान में हुई बैठक में भी सभी समाजों ने संयोजक मंडली बनाकर आंदोलन को संगठित करने का निर्णय लिया था। 

बैठक में तय किया गया कि संयोजक मंडली की अगली बैठक 5 अक्टूबर को सुबह 11 बजे आदिवासी भवन ताऊ में होगी, जहां विस्तृत रणनीति और कार्यनीति पर विचार किया जाएगा।

Published / 2025-10-04 16:02:49
सिमडेगा के झरइन के रहने वाले थे प्रखर चिंतक बेंजामिन लकड़ा

  • झारखंड के प्रथम महालेखाकार (अकाउंटेंट जनरल) और बेंजामिन लकड़ा फाउंडेशन - आदिवासी उद्यमिता के संस्थापक बेंजामिन लकड़ा का 73 वर्ष की आयु में निधन

टीम एबीएन, रांची। अत्यंत दुःख के साथ यह सूचित किया जाता है कि झारखंड के प्रतिष्ठित सिविल सेवक, प्रखर चिंतक और समर्पित परोपकारी व्यक्ति बेंजामिन लकड़ा का आज सुबह, 4 अक्टूबर 2025 को, 73 वर्ष की आयु में  सेंटेविटा अस्पताल में निधन हो गया है। 

12:40 बजे उनके पार्थिव शरीर को आर्चबिशप हाउस लाया गया, जहां राँची काथलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने बेंजामिन लकड़ा की आत्मा शांति के लिए प्रार्थना की। तत्पश्चात लोगों ने उनका अंतिम दर्शन किया और प्रार्थना अर्पित किया।

24 जुलाई, 1952 को सिमडेगा जिले के कुरडेग प्रखंड के झरईन गाँव में जन्मे श्री लकड़ा ने अपना जीवन जनसेवा के लिए समर्पित कर दिया। भारतीय रिजर्व बैंक, पटना से अपना विशिष्ट करियर शुरू करने के बाद, उन्होंने 1982 में सिविल सेवा में शामिल होने के बाद बड़ी तेजी से तरक्की की। श्री लकड़ा ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर तब स्थापित किया जब वह झारखंड के प्रथम महालेखाकार (अकाउंटेंट जनरल) बने।

इस पद पर उन्होंने राज्य की वित्तीय ईमानदारी और निगरानी प्रणालियों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके बाद वह प्रधान महालेखाकार के पद से 2009 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली।
प्रशासन से परे, वह अपने समुदाय के एक भावुक समर्थक थे, जिन्होंने कोलेबिरा और सिमडेगा निर्वाचन क्षेत्रों से राजनीति में सक्रिय रूप से भाग लिया। 

भावी पीढ़ियों को सशक्त बनाने की आवश्यकता को पहचानते हुए, उन्होंने आदिवासी उद्यमियों को सुविधा प्रदान करने और उनका समर्थन करने के लिए बेंजामिन लकड़ा फाउंडेशन की स्थापना की। यह पहल ज्ञान प्रदान करने और अवसर पैदा करने के उनके आजीवन मिशन को दर्शाती है। श्री लकड़ा एक उत्साही पाठक और लेखक भी थे, जिन्होंने अपने अर्जित ज्ञान से समाज को समृद्ध किया।

श्री लकड़ा अपने पीछे अपनी प्रिय पत्नी, पुत्र, दो पुत्रियाँ और दो नाती पोता भरा परिवार छोड़ गए हैं। शासन में उनके अग्रणी कार्य और उनके फाउंडेशन के माध्यम से समुदाय के उत्थान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता एक अमिट विरासत छोड़ गई है। कल दिनांक 5/10/2025 को दफन की धर्मविधि उनके पैतृक गांव झरैन में किया जाएगा। ईश्वर उनकी आत्मा को अनंत शांति प्रदान करे।

Published / 2025-10-04 12:19:03
झारखंड : विभिन्न घटनाओं में दो महिलाओं की हत्या से सनसनी

  • झारखंड में अलग-अलग घटनाओं में 2 महिलाओं की हत्या, इलाके में मचा हड़कंप

टीम एबीएन, रांची। पश्चिमी सिंहभूम जिले में जमीन विवाद को लेकर 54 वर्षीय एक महिला की उसके देवर ने कथित तौर पर हत्या कर दी जबकि लातेहार जिले में एक व्यक्ति ने चाकू गोदकर पत्नी की हत्या कर दी। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि पीड़िता सुकमति लोहरा पर बुधवार शाम टोंटो थाना क्षेत्र के लतार गांव के किताहातु टोला में काम पर जाते समय हमला किया गया। टोंटो थाने के प्रभारी सुकुमार हेम्ब्रम ने बताया, उसका गला रेत दिया गया और बाद में शव को पास के जंगल में फेंक दिया गया। 

सुकमति के पति विशु लोहरा के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस हरकत में आई। हेम्ब्रम ने कहा कि प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि यह घटना एक भूखंड को लेकर हुए विवाद के कारण हुई और उन्होंने जादू-टोने से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया। उन्होंने कहा कि आरोपी फरार है और मामले की हर संभव कोण से मामले की जांच की जा रही है।

दूसरी घटना में, शुक्रवार को लातेहार जिले में एक महिला की उसके पति ने कथित तौर पर चाकू गोदकर हत्या कर दी। मृत महिला महुआटांड़ थाना क्षेत्र के केनाटोली गांव की रहने वाली थी। महुआडांड़ थाने के प्रभारी मनोज कुमार ने बताया, आरोपी पीड़िता का पति है और उसकी पहचान सुधीर उर्फ ​​कन्नू नागेशिया के रूप में हुई है। 

वह फिलहाल फरार है। उन्होंने कहा, आरोपी की तलाश शुरू कर दी गई है। हत्या के पीछे के मकसद का पता लगाने के लिए जांच जारी है। उन्होंने बताया कि पीड़िता के भाई की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।

Published / 2025-10-04 12:03:45
झारखंड के पूर्व महालेखाकार बेंजामिन लकड़ा का निधन

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के पूर्व महालेखाकार बेंजामिन लकड़ा का शनिवार की सुबह निधन हो गया। वे कई दिनों से रांची के सेंटेविटा हॉस्पिटल में भर्ती थे। 

बेंजामिन लकड़ा के पार्थिव शरीर को डॉ कामिल बुल्के पथ स्थित आर्च बिशप हॉउस के हॉल में सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। 

इसके बाद बेंजामिन लकड़ा के पार्थिव शरीर को सिमडेगा ले जाया जाएगा। वहां उनके पैतृक आवास झारैन, कुरडेग में रविवार को दोपहर 12 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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