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एबीएन न्यूज नेटवर्क, पलामू। राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर आज स्थानीय सूचना भवन सभागार में बढ़ती भ्रामक सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता का संरक्षण विषयक परिचर्चा का आयोजन किया गया। प्रमंडलीय सूचना एवं जनसंपर्क इकाई तथा सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय, पलामू के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में जिले के विभिन्न मीडिया संस्थानों के पत्रकारों ने कहा कि डिजिटल युग में भ्रामक सूचनाएँ और फेक न्यूज़ तेजी से फैल रही हैं, ऐसे समय में प्रेस की जिम्मेदारी और भी बढ़ गयी है।तथ्य-जांच, विश्वसनीय स्रोत, नैतिक पत्रकारिता और संपादकीय अनुशासन ही प्रेस की विश्वसनीयता को बनाए रख सकते हैं। वरिष्ठ पत्रकारों ने यह भी बताया कि मीडिया का मूल उद्देश्य जनता को सत्य, सटीक और संतुलित जानकारी उपलब्ध कराना है।
वक्ताओं ने चर्चा के दौरान पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, तकनीकी चुनौतियों, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव तथा विश्वसनीय सूचना तंत्र को मजबूत करने की रणनीतियों पर भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। प्रमंडलीय जनसंपर्क कार्यालय के उपनिदेशक संजीव कुजूर ने सभी का स्वागत करते हुए विषय प्रवेश कराया। उन्होंने भ्रामक सूचनाओं की रोकथाम के लिए सत्यपरक जानकारियां प्रस्तुत करने की बातें कही, ताकि समाज को गति मिले।
पत्रकार प्रभात मिश्रा सुमन ने कहा कि हमसभी भ्रामक सूचनाओं के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने उदाहरणपूर्वक बताया कि हमसभी कैसे भ्रामक सूचनाओं के आगोश में आ रहे हैं और इससे बचाव के क्या तरीके हैं। उन्होंने कहा कि विश्वसनीयता का संरक्षण पत्रकारों को खुद करना होगा। उन्होंने अप्पा दीपो भव: की बात कहते हुए खुद दीपक बनने की सलाह दी। उन्होंने काकोरी एक्शन के नायक शहीद अशफाकउल्ला खॉं के पलामू में रहने की जानकारी सहित संविधान सभा में पलामू व झारखंड के सपूतों के बारे में बृहद जानकारी देते हुए कहा कि तथ्य की प्रमाणिकता रहने से सूचनाएं भ्रामक नहीं होगी। उन्होंने सभी से प्राप्त सूचनाओं का सत्यापन करने के बाद ही प्रचारित व प्रसारित करने की सलाह दी।
राष्ट्रीय नवीन मेल के स्थानीय संपादक सह वरिष्ठ पत्रकार राणा अरुण सिंह ने कहा कि आज का विषय, बढ़ती भ्रामक सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता का संरक्षण, हमारे लिए गहन आत्ममंथन का अवसर है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक, सोशल और डिजिटल मीडिया का समाज और देश-दुनिया पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। यह एक ऐसा युग है जहां हर व्यक्ति सूचना का संप्रेषक बन गया है। भविष्य में यह प्रभाव वरदान बनेगा या अभिशाप, यह समय ही बताएगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में विश्वसनीयता बनाए रखना आज पहले से कहीं अधिक आवश्यक है। सूचना के प्रसार में सत्यापन की जिम्मेदारी हर व्यक्ति पर है। केवल स्रोत की जांच और तथ्य की पुष्टि करने के बाद ही सूचना का प्रकाशन या प्रसारण किया जाना चाहिए। क्योंकि सूचना का प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है, इसलिए इसके माध्यम से समाज में विकृतियों और भ्रम की संभावना कम करने का प्रयास होना चाहिए।
उन्होंने समाज को सशक्त बनाने के लिए सही और सटीक जानकारी के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि स्रोतों को जागरूक करना आवश्यक है। भ्रमित और भ्रामक सूचनाओं की रोकथाम ही समाज में सामंजस्य और विकास की नींव रखती है। उनका संदेश था कि सही सूचना के माध्यम से ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है और हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभाकर इसे सुनिश्चित कर सकता है।
हिन्दुस्तान के पलामू ब्यूरो प्रमुख सतीश चंद्र मिश्र सुमन ने प्रेस दिवस पर आयोजित बढ़ती भ्रामक सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता का संरक्षण विषय पर अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि समाज को बनाने के लिए सूचनाओं की सत्यता की जांच कर उसमें मूल्यवृद्धि कर जनता के बीच प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को पत्रकारीय गुण को जगाते हुए सही जानकारी का संप्रेषण करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि संप्रेषण के तीन मुख्य स्तंभों में दो यथा मिडिया और रिसिवर पूर्व की तुलना में वर्तमान में क्रमश: अध्यधिक तेज और अधिक जागरूक हो गया है। इस कारण तीसरे स्तंभ मेसेज में मिलावट आम लोग भी पकड़ ले रहे हैं। इस लिए विश्वास का संकट गहराता जा रहा है। इससे बचाव सभी स्तर पर जरूरी है तभी प्रेस की विश्वसनीयता और मर्यादा दोनों संरक्षित हो पाएगी।
द इमर्जिंग वर्ल्ड के पॉलिटिकल एडिटर संजय पांडेय ने कहा कि आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से सूचना प्रवाह काफी बढ़ा है। आज लोगों को /डिजिटल साक्षरता अपनानी ही पड़ेगी। ऐसे में सभी को डिजिटल अवेयरनेस की जरूरत है। पत्रकारिता में खबरों का संग्रह कर रहे पत्रकार को तथ्य जांच की अनिवार्यता को समझना है। उन्होंने कहा कि सत्य केवल खबर नहीं बल्कि विश्वास है। फेसबुक, व्हाट्सएप सहित अन्य माध्यमों द्वारा सूचना प्राप्त हो रही है। सूचनाओं को पढ़ने के साथ ही फेक सूचना की सत्यता की जांच करने की जरूरत है। तथ्य जांच के उपरांत ही प्रकाशित एवं प्रसारित करने की आवश्यकता है। उन्होंने पत्रकारों को स्वयं को अपडेट रहने की सलाह दी। साथ ही मीडिया एथिक्स एवं प्रेस लॉ की जानकारी की अनिवार्यता पर बल दिया। वहीं जमीनी स्तर पर पहुंचकर खबरों को बनाने की सलाह दी।
दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार तौहीद रब्बानी ने कहा कि परिचर्चा की सार्थकता को हमसभी प्रेस मीडिया को आत्मसात करने और व्यवहारिक जीवन में उतारते हुए भ्रामक सूचनाओं को संप्रेषण से बचने की जरूरत है। उन्होंने जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग करने, प्राप्त सूचनाओं के तथ्यों की पुष्टि करते हुए पाठक/दर्शक के समक्ष सत्य समाचार प्रेसित करने पर बल दिया। पत्रकार संजय सिंह उमेश एवं प्रेम प्रकाश ने भी परिचर्चा को संबोधित किया।
कार्यक्रम का संचालन प्रेस छायाकार सैकत चट्टोपाध्याय एवं धन्यवाद ज्ञापन सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के एपीआरओ अजीत कुमार तिवारी ने की। मौके पर प्रमंडलीय जनसंपर्क इकाई के एपीआरओ बिजय कुमार ठाकुर, एसएमपीओ अमनदीप कुजूर सहित सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सभी कर्मी एवं बड़ी संख्या में सभी प्रेस, मीडिया के प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत में प्रतिवर्ष 16 नवंबर को राष्ट्रीय प्रेस दिवस मनाया जाता है।
यह दिन न केवल प्रेस की स्वतंत्रता का प्रतीक है, बल्कि लोकतंत्र में मीडिया की निर्णायक भूमिका को भी रेखांकित करता है। 16 नवंबर 1966 को प्रेस परिषद् अधिनियम के तहत प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) की स्थापना हुई थी। इसीलिए यह तिथि भारतीय प्रेस की आत्मगौरव, स्वतंत्रता और संयम की याद दिलाती है।
प्रेस परिषद् का मुख्य दायित्व देश में प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करना और पत्रकारिता की उच्च मर्यादाओं को बनाए रखना है।आज के प्रतिस्पर्धी और तकनीकी युग में जब समाचार केवल कागज़ तक सीमित नहीं रहा,बल्कि डिजिटल मीडिया, सोशल प्लेटफ़ॉर्म और प्रसारण के असीमित माध्यमों में फैल चुका है, तब प्रेस दिवस का महत्व और भी बढ़ जाता है।
सत्य, निष्पक्षता और नैतिक पत्रकारिता की कसौटी पर खरा उतरना पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण है। ऐसे समय में यह दिन हमें स्मरण कराता है कि समाचार का उद्देश्य समाज को जागरूक करना, जनमत का निर्माण करना और सत्ता के प्रत्येक केंद्र पर प्रश्न उठाना है।प्रेस केवल समाचार देता ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करता है। पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के प्रहरी हैं।
सूचना का अधिकार, सामाजिक न्याय, प्रशासनिक पारदर्शिता और जनहित की नीतियों को आम नागरिक तक पहुँचाने में प्रेस की भूमिका अतुलनीय है। राष्ट्रीय प्रेस दिवस पत्रकारों के त्याग, संघर्ष और समर्पण का सम्मान करने का अवसर है। इस दिन विचार-विमर्श, सेमिनार, परिचर्चा और पुरस्कार समारोहों का आयोजन किया जाता है, जिनका उद्देश्य पत्रकारिता की गुणवत्ता, स्वतंत्रता और उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करना होता है।
आज आवश्यकता है कि मीडिया अपनी विश्वासनीयता बनाए रखे, गलत सूचना और पक्षपात से दूर रहे तथा समाज को जोड़ने वाली रचनात्मक पत्रकारिता को बढ़ावा दे। प्रेस की शक्ति तभी सार्थक है जब वह निष्पक्ष, निर्भीक और सत्यनिष्ठ हो। राष्ट्रीय प्रेस दिवस हमें यह याद दिलाता है कि स्वतंत्र प्रेस सिर्फ पत्रकारों की आवश्यकता नहीं, बल्कि यह आम नागरिक की आवाज़, लोकतंत्र की नींव और देश की प्रगति का आधार है।
टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित पुंदाग मे श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में 238वां श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद का आयोजन किया गया।
आज का श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा ट्रस्ट के सदस्यों के सौजन्य से आयोजित किया गया।श्री राधा कृष्ण जी का दिव्य अलौकिक श्रृंगार किया गया। तत्पश्चात मेवायुक्त केसरिया खीर महाप्रसाद का विधिवत भोग दोपहर 12 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडे द्वारा लगाई गई, तथा मंदिर परिसर में उपस्थित 2 हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।
तत्पश्चात भजन- संध्या के कार्यक्रम में ट्रस्ट के भजन गायकों ने मनमोहक सुमधुर भजनों श्रोताओं को खूब झुमाया। श्री राधा कृष्ण के जयकारा से पूरा वातावरण कृष्णमय एवं भक्तिमय बन गया। तत्पश्चात सामूहिक रूप से महाआरती की गई। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि आज श्री राधा कृष्ण मंदिर में 3 हजार से अधिक श्रद्धालुओं में दर्शन किये। मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
इस अवसर पर-अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, शिव भगवान अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया, पूरणमल सर्राफ, सुरेश अग्रवाल संजय सर्राफ सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष उपस्थित थे। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
टीम एबीएन, रांची। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती और झारखंड राज्य के 25 वें रजत जयंती स्थापना दिवस के पावन अवसर पर बी.डी .पब्लिक स्कूल, फ्रेंड्स कॉलोनी, पंडरा, रांची में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।
यह आयोजन लेक व्यू हॉस्पिटल ब्लड बैंक, बारियातू, रांची के तरफ से अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, रांची जिला के तत्वाधान में आयोजित किया गया । इस रक्तदान शिविर में फ्रेंड्स कॉलोनी, पंडरा के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया साथ ही बी.डी. पब्लिक स्कूल के शिक्षक एवं कर्मचारीगण भी इसमें शामिल हुए और न केवल रक्तदान किया बल्कि रक्तदान से होने वाले फायदे और रक्तदान के प्रति जो भ्रांतियां समाज में फैली है उनसे वाकिफ भी हुए।
इस अवसर पर अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, रांची जिला के अध्यक्ष आलोक कुमार पांडे, उपाध्यक्ष बृजमोहन ओझा के नेतृत्व में अक्टूबर 2025 में चाईबासा में एक ब्लड बैंक पर थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी पॉजिटिव रक्त चढ़ाने के घटना के बारे में परिचर्चा भी किया गया। इस तरह के अक्षम्य गलतियां कैसे सुधार किये जा सकतें हैं उसके बारे में ब्लड बैंक के उपस्थित डॉक्टर डॉ. मुकेश कुमार और पूरी टीम के साथ चर्चा की गई।
रक्तदान शिविर में 21 यूनिट रक्त संग्रह किया गया। रक्तदान करने वालों में कई लोगों ने जीवन में पहली बार रक्तदान किया और रक्तदान के बाद अपने अनुभव को साझा किया। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, रांची जिला अध्यक्ष आलोक कुमार पांडे ने भी जीवन में पहली बार रक्तदान किया और उन्होंने उपस्थित लोगों को प्रेरित किया।
उपाध्यक्ष बृजमोहन ओझा जो अब तक 34 बार रक्तदान कर चुके हैं उन्होंने लोगों को न केवल प्रेरित किया बल्कि उनके अंदर के डर को हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रक्तदान शिविर के रक्त वीरों में शामिल थे आलोक कुमार पांडे, ब्रज बिहारी सिंह, विपिन बिहारी प्रजापति, विकास कुमार सिंह, मंटू कुमार, नवनीत कुमार पांडे, उत्तम कुमार, सहदेव नाथ, विकास पासवान, मनोज कुमार, स्वाती, कीर्ति लता सहित अन्य।
बृज बिहारी सिंह ने अपने 55वें जन्मदिन के अवसर पर पहली बार रक्तदान कर लोगों को प्रेरित किया और अपने जन्मदिन को यादगार बनाया। सभी रक्त वीरों को ब्लड डोनर कार्ड और मेडल से सम्मानित किया गया। इस रक्तदान शिविर सह स्वास्थ्य गोष्टी के सरल और सफल आयोजन में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के प्रांत सह सचिव आर अजय की महती भूमिका रही।
टीम एबीएन, रांची। रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के महामंत्री निर्मल बुधिया के पिताजी समाजसेवी व व्यवसायी सांवरमल बुधिया के आकस्मिक निधन पर झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन, रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन, अग्रवाल सभा, मारवाड़ी सहायक समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने गहरा शोक संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है।
झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि सांवरमल बुधिया सरल, मिलनसार, मृदुभाषी, धार्मिक विचारधारा व्यक्तित्व वाले व्यक्ति थे।उनकी शालीनता, सरलता, स्पष्टवादिता और समाज के प्रति समर्पण पूरा समाज हमेशा याद रखेगा। उनके निधन से समाज को अपूरणीय क्षति हुई है।
शोक संवेदना व्यक्त करने वालों में - झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल, जिलाध्यक्ष सज्जन पाड़िया, अग्रवाल सभा अध्यक्ष प्रमोद कुमार अग्रवाल, मारवाड़ी सहायक समिति के अध्यक्ष मनोज चौधरी, विनोद कुमार जैन, ललित कुमार पोद्दार, पवन पोद्दार, अनिल कुमार अग्रवाल, अशोक नारसरिया, पवन शर्मा, राजेंद्र केडिया, रमन बोडा, कौशल राजगढ़िया, कमलेश संचेती, विजय खोवाल, रमाशंकर बगड़िया, किशन पोद्दार, अनिल अग्रवाल, प्रमोद सारस्वत, अशोक लाठ, जितेश अग्रवाल आदि शामिल हैं।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ जी की आवास मे केन्द्रीय कानून एवं न्याय मंत्री(भारत सरकार) के अर्जुन राम मेघवाल जी एवं केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ का पुष्पगुच्छ एवं अंग वस्त्र ओढ़ाकर अभिनंदन किया।
प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल ने केंद्रीय मंत्री श्री मेघवाल को एक मांग पत्र सौंपा। जिसमें कहा गया है कि झारखण्ड में मारवाड़ी समाज की काफी संख्या है जो कि यहाँ की सभ्यता, संस्कृति एवं भाषा को अपना कर राज्य के विकास में अनवरत लगा हुआ है।
प्रवासी होने, के नाते कई बार अनेक समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।झारखण्ड मारवाड़ी समाज की आपसे कुछ अपेक्षाएं हैं जो कि इस प्रकार हैं।मारवाड़ी समाज के महापुरुष जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अहम् भूमिका निभाई और समाज सुधार के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किया, जिनके नाम इस प्रकार हैं।
स्व० जमनालाल बजाज (1889 - 1942), महात्मा गाँधी के सहयोगी, स्वदेशी एवं कड़ी आन्दोलन के समर्थक, समाज सुधारक,स्व० राम मनोहर लोहिया (1910 - 1967), स्वतंत्रता सेनानी, समाजवादी, चिन्तक और सामाजिक न्याय के प्रबल पक्षधर ,स्व० घनश्याम दास बिड़ला ( 1894 - 1983), स्वतंत्रता आन्दोलन के समर्थक, स्वदेशी उद्योगों के प्रवर्तक और राष्ट्रनिर्माण में योगदानकर्ता।
इन सभी को मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान करने हेतु मारवाड़ी सम्मेलन भारत सरकार से अनुशंसा करता है। मारवाड़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने हेतु मारवाड़ी सम्मेलन भारत सरकार से मांग करती है।
झारखण्ड के गिरिडीह जिले से हमारे समाज की प्रतिभा मोर मुकुट एवं मनोज केडिया, जो कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर के शास्त्रीय संगीतज्ञ हैं। उन्हें प्रधानमंत्री जी ने भी विदेशी प्रतिनिधियों के सामने परफॉर्म करने का मौका भी दिया था और उनकी प्रशंसा भी की थी। हमारी मांग है कि केडिया बंधुओं को पद्मश्री से सम्मानित करने हेतु अनुशंसा करें।
झारखण्ड राज्य में प्रवासी मारवाड़ियों की संख्या काफी है, अतः इनके सम्पूर्ण विकास हेतु मारवाड़ी विकास परिषद् का गठन केंद्र /राज्य सरकार के माध्यम से किये जाने की मांग हम आपसे करते हैं। आशा है आप हमारी मांगों पर समुचित कार्यवाही करते हुए पूर्ण कराएँगे। मांग पत्र की प्रतिलिपि श्री संजय सेठ को भी सौंपा गया। श्री मेघवाल ने मारवाड़ी सम्मेलन की पदाधिकारियों के साथ कई मुद्दों पर भी विचार- विमर्श किया।
झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन की संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि शिष्टमंडल में- मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय वरीय उपाध्यक्ष ललित कुमार पोद्दार, महामंत्री विनोद कुमार जैन, पवन कुमार पोद्दार, मनोज चौधरी, पवन शर्मा आदि शामिल थे। उक्त जानकारी झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।
टीम एबीएन, रांची। एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल, पुंदाग में धूमधाम से बाल दिवस समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर महा हवन का आयोजन किया गया तथा स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। विद्यार्थियों के लिए भी अनेक कार्यक्रम आयोजित किये गये।
कक्षा एलकेजी से द्वितीय तक के विद्यार्थियों के लिए फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता रखी गयी थी। रंग-बिरंगे परिधान में बच्चे रंग-बिरंगे फूलों की तरह कोमल और सुंदर लग रहे थे। बच्चों के मनोरंजन के लिए शिक्षक- शिक्षिकाओं ने विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया। प्राथमिक कक्षा के विद्यार्थियों ने पिकनिक मनाया और स्वादिष्ट भोजन का आनंद लिया। कक्षा सप्तम के विद्यार्थियों ने बिना आग के स्वादिष्ट व्यंजन बनाये।
प्राचार्य डॉ तापस घोष ने सभी विद्यार्थियों को बाल दिवस की शुभ कामनाएं देते हुए कहा कि निश्छल बच्चे ईश्वर का रूप होते हैं। उन्हें सर्वांगीण विकास का अवसर प्राप्त होना चाहिए। बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित तथा प्रोत्साहित करते रहना चाहिए तथा उनको उचित मार्गदर्शन देकर देश के योग्य नागरिक के रूप में तैयार किया जाना चाहिए।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड गठन के 25 साल पूरा होने के उपलक्ष्य पर झारखंड सरकार रजत जयंती मना रही है, तो वहीं दूसरी ओर बिहार से अलग झारखंड निर्माण के लिए आंदोलन करने वाले और झारखंड की दिशा तय करने वाले, अलग राज्य का नारा बुलंद करने वाले कांग्रेस के दिग्गज रांची के पूर्व विधायक और राज्यसभा सांसद सह झारखंड आंदोलनकारी रहे दिवंगत ज्ञान रंजन को उनके साथ झारखंड आंदोलन में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले झारखंड प्रदेश जमीयतुल कुरैश के प्रदेश अध्यक्ष सह झारखंड आंदोलनकारी मुजीब कुरेशी ने अपने आवासीय परिसर में सेमिनार का आयोजन कराया।
झारखंड आंदोलनकारियों को याद किया गया। झारखंड आंदोलन पर ज्ञान रंजन के संघर्षों पर लंबी परिचर्चा की गयी। झारखंड आंदोलनकारी मुजीब कुरैशी ने बताया कि दिवंगत ज्ञान रंजन अगर आज होते तो कांग्रेस और झारखंड की दशा और दिशा की तस्वीर कुछ और होती। झारखंड एक विकसित, समृद्ध राज्य के रूप में अपनी पहचान बन चुका होता, लेकिन झारखंड गठन होने के पूर्व उनका निधन होना बहुत बड़ी क्षति थी।
झारखंड आंदोलन से जुड़े हुए आंदोलनकारी थे, उनको भी उनका हक और अधिकार झारखंड सरकार द्वारा अब तक नहीं मिल पाया है। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस पर पहल करेंगे और आंदोलनकारियों को उनका हक और अधिकार, पेंशन आंदोलनकारी के बच्चों की पढ़ाई - लिखाई निशुल्क और जो सरकारी नौकरी देने की बात की है इसमें अमल किया जाये। हर साल की तरह झारखंड स्थापना दिवस के दिन भी दिवंगत ज्ञान रंजन को हम लोग याद करेंगे श्रद्धांजलि देंगे और एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन भी अगले साल से करेंगे।
मौके पर कांग्रेस नेता झारखंड आंदोलनकारी राजेश गुप्ता छोटू ने कहा कि हम लोग युवा थे और आंदोलन में शामिल होते थे। जब ज्ञान रंजन जी पूछते थे कि आंदोलन के लिए धरना प्रदर्शन, रैली के लिए लोगों की जरूरत है तो मुजीब कुरैशी का पहला नाम आता था, करीब 200 से 300 बसों में बुंडू, तमाड़, राहे, अड़की, कांटा टोली से रैली में लोगों को ले जाने का जिम्मा देते थे और मोराबादी का आधा से ज्यादा कोना लोगों से भर दिया जाता था। झारखंड आंदोलनकारी के रूप में हम लोगों ने काम किये हैं।
मौके पर सभी लोगों ने मुजीब कुरैशी को बूके देकर सम्मानित किया। मौके पर फोलटू दा, पत्रकार प्रवेज कुरैशी, जमीयतुल कुरैश पंचायत के सदर गुलाम गौस कुरैशी ने भी अपने वक्तव्य को रखा और मंच संचालन गुलाम जावेद ने की । इस अवसर पर झारखंड आंदोलनकारी मुजीब कुरेशी, राजेश गुप्ता छोटू, फोलटू, मौलेश, आसिफ, तसलीम, शाहिद कुरैशी, इरफान कुरैशी, साजिद, महताब, मुस्तफा, सद्दाम कुरेशी, असब, दानिश, फरहाद, गुलाम शातिर फेकू, आशिक, राजू, अजहर सहित कई लोग शामिल थे।
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