टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, रांची महानगर (विक्रमादित्य नगर) द्वारा सरला बिरला विश्वविद्यालय के विशाल सभागार में युवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में टाटीसिलवे एवं आसपास के क्षेत्रों से एक हजार से अधिक युवा विद्यार्थियों, प्राध्यापकों, अधिवक्ताओं, चिकित्सकों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों तथा व्यवसायियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम में विक्रमादित्य नगर के संघचालक माननीय शंकर साहू जी, सह संघचालक माननीय ब्रजेश जी सहित नगर के सभी दायित्ववान कार्यकर्ता एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सह-सरकार्यवाह एवं वर्तमान अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य माननीय वि. भागैया जी थे। अपने विचारोत्तेजक उद्बोधन में उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में चल रहे जनसंपर्क अभियान तथा संघ की मूल विचारधारा पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन-संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि बचपन में ही माता-पिता का साया उठ जाने और अत्यंत अभावपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना।
नौवीं कक्षा में वंदे मातरम् आंदोलन से जुड़ने के कारण उन्हें विद्यालय से निष्कासित कर दिया गया। कलकत्ता से एमबीबीएस की शिक्षा प्रथम श्रेणी में पूर्ण करने के बाद भी उन्होंने बर्मा में उच्च सरकारी पद का प्रस्ताव अस्वीकार कर अपना संपूर्ण जीवन स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित कर दिया।
उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने गंभीर चिंतन किया कि मुगलों और अंग्रेजों जैसे विदेशी आक्रमणकारी भारत पर शासन करने में सफल क्यों हुए। उनके अनुसार, अपनी राष्ट्रीय अस्मिता का विस्मरण, समाज का असंगठित होना तथा आंतरिक विषमताएँ ही इसकी प्रमुख कमजोरी थीं। इन्हीं कमियों को दूर कर समाज में संगठन, समरसता और राष्ट्रभाव जागृत करने के उद्देश्य से वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई।
माननीय वि. भागैया ने कहा कि भारत में भाषाओं, खान-पान, वेशभूषा और पूजा-पद्धतियों की विविधता हमारी सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है, किंतु हमारी सबसे बड़ी और मूल पहचान यह है कि हम सभी भारत माता की संतान हैं।
उन्होंने कहा कि विदेशी शासन के दौरान समाज को जाति, क्षेत्र, भाषा तथा अन्य आधारों पर विभाजित करने के सुनियोजित प्रयास किए गए। ऐसे विभाजनों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और संगठन की भावना को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
शहीद भगत सिंह के जीवन और विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनका सपना केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं था, बल्कि ऐसे भारत का निर्माण करना था जहाँ प्रत्येक नागरिक को समान सम्मान मिले, श्रम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सामाजिक प्रतिष्ठा और आर्थिक स्वावलंबन प्राप्त हो तथा किसी भी आधार पर किसी का शोषण न हो।
उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे केवल करियर और व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित न रहें, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का भी निर्वहन करें। वर्तमान समय में देश की एकता और अखंडता को प्रभावित करने वाले अनेक वैचारिक भ्रम और चुनौतियाँ सामने हैं।
ऐसे समय में युवाओं को सजग, जागरूक और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित होकर कार्य करना चाहिए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। मंच पर संघ के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन के उपरांत कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
टीम एबीएन, रांची। रक्षा राज्य मंत्री एवं रांची के सांसद संजय सेठ ने रांची सहित पूरे झारखंड में रॉयल्टी व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्था के कारण विकास कार्यों के ठप पड़ जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नीतिगत अस्पष्टता और प्रशासनिक विफलता का खामियाजा आज आम जनता भुगत रही है।
सेठ ने कहा कि रांची में सड़क, नाली और अन्य आधारभूत संरचना से जुड़े सैकड़ों विकास कार्य रुके हुए हैं। इन कार्यों के ठप होने का प्रमुख कारण मिट्टी, गिट्टी और बालू के परिवहन पर रॉयल्टी चालान को अनिवार्य करना है।
दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि सरकार ने यह स्पष्ट ही नहीं किया कि यह चालान जारी करने का अधिकार किस विभाग या एजेंसी के पास होगा। परिणामस्वरूप संवेदकों के सामने गंभीर असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है और निर्माण सामग्री का परिवहन बाधित हो गया है।
उन्होंने कहा कि जब सरकार स्वयं यह तय नहीं कर पा रही है कि रॉयल्टी चालान कौन जारी करेगा, तब विकास कार्यों के सुचारु संचालन की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि विकास के प्रति सरकार की उदासीनता को भी दर्शाता है। यह अत्यंत दुःखद है कि जिन सामग्री के लिए सरकार ने टेंडर ही नहीं किया है, उसकी रॉयल्टी मांग रही है।
सेठ ने कहा कि करोड़ों रुपये की विकास योजनाएँ अधूरी पड़ी हैं, सड़कों का निर्माण रुक गया है, नालियों का काम बंद है और इसका सीधा असर आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर पड़ रहा है। बरसात के मौसम में अधूरे कार्यों के कारण लोगों को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि रॉयल्टी चालान जारी करने की प्रक्रिया और संबंधित विभाग को तत्काल स्पष्ट किया जाए, ताकि रुके हुए विकास कार्य बिना किसी विलंब के पुनः प्रारंभ हो सकें। विकास कार्यों को प्रशासनिक भ्रम और नीतिगत असमंजस का शिकार बनाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
संजय सेठ ने कहा कि झारखंड की जनता यह जानना चाहती है कि यदि रॉयल्टी चालान अनिवार्य है तो उसे जारी कौन करेगा।सरकार को इस प्रश्न का स्पष्ट उत्तर देना चाहिए और तत्काल प्रभाव से ऐसी व्यवस्था लागू करनी चाहिए जिससे विकास कार्यों में आ रही बाधाएं दूर हों।
उन्होंने कहा कि जनता विकास चाहती है, अव्यवस्था नहीं। अब समय आ गया है कि राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाए और झारखंड के विकास को ठहराव से बाहर निकाले।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, जमशेदपुर। जिले स्थित डिमना लेक में आज हुए एक दर्दनाक हादसे में एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के दो जूनियर डॉक्टरों की पानी में डूबने से मौत हो गई। इस घटना से अस्पताल परिसर, मेडिकल कॉलेज और पूरे चिकित्सा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। वहीं पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एमजीएम अस्पताल के तीन जूनियर डॉक्टर देर रात डिमना लेक घूमने गए थे। तीनों लेक के किनारे बैठे हुए थे। इसी दौरान एक डॉक्टर का मोबाइल फोन अचानक पानी में गिर गया।
मोबाइल निकालने के प्रयास में एक डॉक्टर पानी में उतरा लेकिन गहराई का सही अंदाजा नहीं होने के कारण वह डूबने लगा। उसे बचाने के लिए दूसरा डॉक्टर भी पानी में कूद गया लेकिन दोनों गहरे पानी में समा गए। घटना के समय उनके साथ मौजूद तीसरे डॉक्टर यश किसी तरह सुरक्षित बच निकले। उन्होंने तुरंत एमजीएम अस्पताल प्रबंधन और पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही पुलिस, अस्पताल के अधिकारी और बड़ी संख्या में डॉक्टर मौके पर पहुंचे। रात में गोताखोरों की मदद से तलाश अभियान शुरू किया गया लेकिन अंधेरा और गहराई अधिक होने के कारण सफलता नहीं मिल सकी। आज सुबह फिर से रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद गोताखोरों ने दोनों डॉक्टरों के शव डिमना लेक से बाहर निकाले।
मृतकों की पहचान काशीडीह निवासी 26 वर्षीय डॉ. समीर और पलामू के डाल्टनगंज स्थित बिनेका गांव निवासी 22 वर्षीय डॉ. सक्षम सिंह के रूप में हुई है। घटना की खबर मिलते ही एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में शोक का माहौल बन गया। साथी डॉक्टरों और कर्मचारियों ने दोनों दिवंगत डॉक्टरों को श्रद्धांजलि दी। अस्पताल प्रशासन ने भी घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
ग्रामीण एसपी ने बताया कि तीनों जूनियर डॉक्टर आधी रात के बाद डिमना लेक क्यों गए थे और हादसा किन परिस्थितियों में हुआ इसकी विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और तीसरे डॉक्टर से भी पूछताछ की जा रही है। पोस्टमाटर्म के बाद दोनों शव परिजनों को सौंप दिए जाएंगे।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, कतरास। गोविंदपुर क्षेत्र के ब्लॉक-4 परियोजना स्थित हाजिरी घर के पास बनाए जा रहे स्पीड ब्रेकर को लेकर श्रमिक संगठन ने सिविल विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि स्पीड ब्रेकर का निर्माण अब तक अधूरा है और इसकी चौड़ाई आवश्यकता से अधिक रखी गई है। जबकि इस मार्ग पर मुख्य रूप से छोटी गाड़ियों का आवागमन होता है।
उनका कहना है कि निर्माण पर जितनी राशि खर्च की गई है, उतने में कई छोटे और उपयोगी स्पीड ब्रेकर बनाए जा सकते थे। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि स्पीड ब्रेकर का स्थान चयन भी उचित नहीं है। उनके अनुसार इसे फोरलेन सड़क के अधिक निकट बनाया जाना चाहिए था, जहां वाहनों की रफ्तार अधिक रहती है।
यूनियन का कहना है कि सिविल विभाग श्रमिक आवासों की मरम्मत,नालियों की सफाई और अन्य जरूरी कार्यों के लिए फंड की कमी का हवाला देता है, लेकिन ऐसे निर्माण कार्यों में धन की कोई कमी नहीं दिखाई देती। संगठन ने मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए इस तरह के खर्च का विरोध करने की घोषणा की है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। नई दिल्ली/लोहरदगाः नीट पेपर लीक और लगातार सामने आ रहे परीक्षा घोटालों को लेकर शुक्रवार को संसद भवन परिसर में इंडिया गठबंधन के सांसदों ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया।
सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देने की मांग की। इस प्रदर्शन में लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत भी सक्रिय रूप से शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसे कांग्रेस और इंडिया गठबंधन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जिससे 7.5 करोड़ से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं। ये केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि देश के युवाओं के टूटे हुए सपनों की कहानी है।
सरकार ट्वीट और भाषण से काम चलाना चाहती है, लेकिन देश के छात्र जवाब और न्याय चाहते हैं। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने सबसे पहले नीट पेपर लीक का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उठाया और लगातार छात्रों की आवाज संसद से लेकर सड़क तक बुलंद की।
बावजूद इसके सरकार ने छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया।उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों से छात्र अपने अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार संवेदनहीन बनी हुई है। छात्रों पर लाठीचार्ज और आत्महत्या जैसी घटनाएं सरकार की विफलता का प्रमाण हैं।
प्रदर्शन के दौरान इंडिया गठबंधन के सांसदों ने शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो, छात्रों को न्याय दो और पेपर लीक बंद करो जैसे नारे लगाए। संसद परिसर में हुए इस विरोध प्रदर्शन में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग उठाई गई।
सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और इंडिया गठबंधन देश के छात्रों के साथ मजबूती से खड़ा है। जब तक पेपर लीक के दोषियों को सजा नहीं मिलती, जिम्मेदारी तय नहीं होती और छात्रों को न्याय नहीं मिलता, तब तक हमारा संघर्ष और आंदोलन जारी रहेगा।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों सुखा नशा का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। अब नशा के व्यापारी 12 से 15 वर्ष के बच्चों को टारगेट कर रहे हैं। इस उम्र के बच्चे नशा के जाल में फंसते जा रहे हैं। देखा जा रहा है कि नशे के व्यापारी छोटे बच्चे जिसे अभी दुनिया और समाज का ज्ञान नहीं है। उन बच्चों को नशा का लत लगा रहे हैं और उन बच्चों से अपराध करा रहे हैं। बच्चे नशा सेवन के चक्कर में अपने घर में चोरी करना शुरू कर दिए हैं।
घर के ज्वेलरी नगदी आदि चुराकर नशा व्यापारी तक पहुंचा रहे हैं। नशा के व्यापारी अब विद्यालय को भी टारगेट कर रहे हैं। विद्यालय के कम उम्र के बच्चों को नशा का लत लगा रहे हैं। मैं सभी अभिभावक एवं शिक्षकों के साथ-साथ जिला प्रशासन से निवेदन करता हूं कि इस पर रोक लगाने के लिए हम सभी को एकजुट होकर पहल करने की आवश्यकता है।
विद्यालय के शिक्षक स्कूल के समय पर किसी भी सूरत पर बच्चों को कैंपस से बाहर न जाने दे और उद्दंड बच्चों पर गहरी नजर बनाए रखें। अभिभावक बच्चों पर विशेष निगरानी रखें। उनके गतिविधियों को नजर अंदाज ना करें। अन्यथा हमारा युवा समाज नशे के कारण बर्बादी की ओर चले जाएंगे और व्यापारी लाखों करोड़ों कमाने के चक्कर में हमारे बच्चों को विनाश की ओर ले जाएंगे।
हम लोगों ने देखा है कि पंजाब में किस तरह से लोगों को नशा लत लगाया गया था। लोग नशा करने के चक्कर में कोई भी अपराध करने के लिए तैयार खड़ा रहते थे, जिसका जीता जागता उदाहरण है। फिल्म उड़ता पंजाब अब झारखंड में भी इस तरह की नशा का व्यापार जोरों पर है आए दिन कई शहरों में पुलिस द्वारा नशा के व्यापारियों को पकड़ा जा रहा है।
प्रतिदिन किसी न किसी शहर में नशा व्यापारी पकड़े जा रहे है। इससे प्रतीत होता है कि सुखा नशा का एक बड़ा खेप झारखंड में पहुंचाया जा रहा है। इस कड़ी को तोड़ने के लिए हम सभी सजग नागरिकों को आगे आकर मुकाबला करने की आवश्यकता है नहीं तो हमारे बच्चे हमारे युवा पीढ़ी का विनाश तय है।
मैं पुलिस प्रशासन से भी निवेदन करता हूं कि लोहरदगा में इस नशा व्यापारियों पर जल्द से जल्द हंटर चलाया जाए और उन्हें जेल की सलाखों में पहुंचाया जाए छोटे-छोटे व्यापारियों को पकड़ने से कोई लाभ नहीं होने वाला है। बड़ी खेप पहुंचाने वाले साजिश करता को पकड़ना अति आवश्यक है। अन्यथा सभी धर्म जाति के लोग इस नशा के चक्कर में पड़कर बर्बाद हो जाएंगे।
आज यह बच्चे चोरी कर छोटा अपराध कर रहे हैं कल नशा के चक्कर में बड़े अपराध करने पर भी पीछे नहीं हटेंगे क्योंकि इसी नशे के चक्कर में लोहरदगा में कुछ दिन पूर्व एक मुस्लिम बेटे की हत्या हुई थी। इसके बाद भी हम सभी अपने-अपने कर्तव्यों का निर्वाह न करें तो अपनी बर्बादी हम खुद कर बैठेंगे।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। जिले के शहीद निर्मल महतो अस्पताल के अधीक्षक डाक्टर दिनेश कुमार गिद्दोरिया के आने से अस्पताल की स्थिति चरमरा गयी है, जिसको लेकर अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ जिला अध्यक्ष रत्नेश कुमार ने झारखंड सरकार, स्वास्थ मंत्री, विधायक सरयू राय, विधायक रागिनी सिंह को ट्वीट किया।
उन्होंने लिखा कि धनबाद का सबसे बड़ा अस्पताल शहीद निर्मल महतो है लोग इसमें दूर दराज से इलाज करवाने आते हैं पर इलाज के नाम पर खानापूर्ति किया जाता है, जबकि अस्पताल में आए दिन कोई न कोई गम्भीर समस्या आ रही है।
अधिक्षक की लापरवाही के कारण पिछले दिनों एक बच्चा सिटी स्कैन में देरी होने या लापरवाही के कारण बच्चे की स्थिति खराब हो गई, जबकि अस्पताल का एमरजेंसी वार्ड आईसीयू रात्रि में जुनियर नर्स के भरोसे चलता है, उसमें रात्रि में कोई भी सिनियर डाक्टर नहीं रहता है, जिस कारण लोगों काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और मरिज की स्थिति खराब हो जाती है।
जबकि यहां के अधिक्षक खुद एक सरकारी अस्पताल का मुलाजिम है तो वह कैसे अपना प्राइवेट नर्सिंग होम जोड़ा फाटक में सक्ति नर्सिंग होम चला रहे हैं। जबकि इस मामले पर सरकार गंभीर पूर्वक लेते हुए अधिक्षक के ऊपर कार्रवाई करना चाहिए। नहीं कार्रवाई होने से अधीक्षक का मनोबल दिनों दिन बढ़ती जा रही है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। देशभर में नीट समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला तेज कर दिया है। लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि अब उनके पास इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को निभाने का नैतिक अधिकार नहीं बचा है। सुखदेव भगत ने कहा कि राहुल गांधी उन पहले नेताओं में रहे जिन्होंने नीट पेपर लीक और छात्रों के भविष्य का मुद्दा देश के सामने मजबूती से उठाया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार छात्रों के अधिकारों और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रही है, लेकिन केंद्र सरकार इस गंभीर विषय पर संवेदनहीन बनी हुई है। सांसद सुखदेव भगत ने अपने बयान में कहा कि पिछले एक दशक में देशभर में 152 प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं, जिससे करीब 7.5 करोड़ छात्र-युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बचाने में पूरी तरह विफल रही है।
सुखदेव भगत ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सबसे पहले नीट पेपर लीक और छात्रों के भविष्य का मुद्दा मजबूती से उठाया था। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पिछले दो वर्षों से लगातार परीक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार और पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने इस गंभीर समस्या पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने छात्रों पर हुए लाठी चार्ज और लगातार बढ़ रही आत्महत्या की घटनाओं पर भी गहरी चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि पेपर लीक से करोड़ों युवाओं के सपने टूट रहे हैं और जब वे न्याय की मांग करते हैं तो उन्हें लाठियां मिलती हैं। यह देश के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने सवाल किया कि छात्रों के भविष्य की बर्बादी और उन पर हुए लाठीचार्ज की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? कांग्रेस सांसद ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अब तक तो सिर्फ पेपर ही लीक हो रहे थे, लेकिन अब इस सरकार की जिम्मेदारी भी लीक हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि अब उनमें इस पद पर बने रहने का नैतिक बल नहीं बचा है। सुखदेव भगत ने कहा कि पेपर लीक, छात्रों पर बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज और परीक्षा व्यवस्था में लगातार हो रही विफलताओं की जवाबदेही केवल शिक्षा मंत्री तक सीमित नहीं है, बल्कि गृह मंत्री और प्रधानमंत्री को भी इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार को इस पूरे मामले पर गंभीर आत्ममंथन करते हुए ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे देश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि करोड़ों छात्रों का भविष्य किसी भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना केंद्र सरकार का दायित्व है। कांग्रेस इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक मजबूती से उठाती रहेगी।
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