एबीएन न्यूज नेटवर्क, हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले के चौपारण थाना क्षेत्र के ग्राम मुरानिया में पुलिस एवं वन विभाग द्वारा संयुक्त अभियान चलाकर अवैध अफीम की खेती के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की गयी।
गुप्त सूचना के आधार पर आज चलाये गये इस अभियान में लगभग 10 एकड़ क्षेत्रफल में अवैध रूप से लगी अफीम की फसल को चिन्हित कर मौके पर ही पूर्णत: विनष्ट कर दिया गया। अभियान के दौरान घटनास्थल से 4 डिलीवरी पाइप बरामद किये गये, जिन्हें मौके पर ही नष्ट कर दिया गया।
अवैध अफीम की खेती में संलिप्त व्यक्तियों के नाम-पते का सत्यापन किया जा रहा है। दोषियों की पहचान के उपरांत उनके विरुद्ध विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जायेगी। मामले में अग्रतर कार्रवाई जारी है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए राज्यसभा सांसद आदित्य साहू का चुना जाना लगभग तय हो गया है। मंगलवार को हुए नामांकन में वह इस पद के लिए एकमात्र उम्मीदवार रहे। पार्टी के अनुसार नामांकन प्रक्रिया दोपहर 12 बजे शुरू हुई और दोपहर 2 बजे समाप्त हुई।
झारखंड भाजपा के चुनाव पदाधिकारी और केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए केवल आदित्य साहू का ही नामांकन प्राप्त हुआ है। इसके अलावा राज्य से राष्ट्रीय परिषद सदस्य पद के लिए कुल 21 नामांकन दाखिल किये गये हैं।
जुएल ओराम ने कहा कि नामांकन की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बुधवार को प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद सदस्यों की औपचारिक घोषणा की जाएगी। पार्टी की ओर से सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के तहत पूरी की जा रही हैं।
राष्ट्रीय परिषद सदस्य पद के लिए नामांकन करने वाले नेताओं में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, रघुवर दास, मधु कोड़ा और चंपई सोरेन शामिल हैं। इसके अलावा सांसद संजय सेठ, करिया मुंडा और दीपक प्रकाश के साथ केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी नामांकन दाखिल किया है।
गौरतलब है कि 3 अक्तूबर को भाजपा ने आदित्य साहू को झारखंड इकाई का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया था। अब उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने का रास्ता साफ हो गया है। वह बाबूलाल मरांडी की जगह लेंगे, जो वर्तमान में झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी हैं।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के कुछ हिस्सों में मंगलवार को शीतलहर की स्थिति बनी रही और 13 जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने यह जानकारी दी।
मौसम विभाग के अनुसार, गुमला राज्य का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 2.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके बाद खूंटी में यह 4.2 डिग्री सेल्सियस और पलामू जिले के डाल्टनगंज में 5.6 डिग्री सेल्सियस रहा।
रांची स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के उप निदेशक अभिषेक आनंद ने कहा कि क्षोभमंडल स्तर पर उत्तर-पश्चिम से उत्तर दिशा की ओर ओर लगातार हवाएं चल रही हैं, जिसके कारण राज्य में शीतलहर की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने बताया कि रांची में न्यूनतम तापमान 7.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि चाईबासा में यह 9.3 डिग्री सेल्सियस और जमशेदपुर में 10 डिग्री सेल्सियस रहा।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, रामगढ़। जिले में मंगलवार को एक हाथी मृत पाया गया। वन विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि गोला पुलिस थाना क्षेत्र में रामगढ़-बोकारो राजमार्ग के किनारे चोदारू घाटी के पास आलू के खेत से हाथी का शव बरामद किया गया।
वन परिक्षेत्र अधिकारी आरके सिंह ने कहा कि वयस्क हाथी के शरीर के किसी भी हिस्से पर चोट के निशान नहीं मिले हैं। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि हाथी की मृत्यु किसी गंभीर बीमारी के कारण हुई होगी।
अधिकारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल पायेगा। उन्होंने कहा कि रामगढ़ जिले में 16 से 19 दिसंबर के बीच जंगली हाथियों द्वारा कुचले जाने से कम से कम छह लोगों की मौत हो चुकी है।
टीम एबीएन, रांची। विश्व आर्थिक सम्मेलन 2026 में पहली बार झारखंड की उपस्थिति कई मायनों में अहम है। झारखंड औद्योगिक क्षमता और इनफिनाइट आपर्च्युनिटी स्टेट का संदेश तो देगा ही साथ ही, यह भी स्पष्ट करेगा कि जब आधी आबादी नेतृत्व करती हैं, तो अर्थव्यवस्थाएं मजबूत होती हैं, लोग अप्रत्याशित बदलावों का गवाह बनते हैं और विकास स्थायी होता है।
कुछ ऐसा ही संदेश झारखंड की बेटी और विधानसभा के महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष सह विधायक कल्पना सोरेन दावोस में आयोजित होने वाली विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक में और यूनाइटेड किंगडम की अपनी यात्रा के दौरान वैश्विक मंच से देंगी।
वे महिला नेतृत्व, लैंगिक समानता और समावेशी विकास से संबंधित कई उच्च स्तरीय मंचों पर राज्य का प्रतिनिधित्व कर झारखंड की आधी आबादी के आत्मविश्वास, उद्यमशीलता और नेतृत्व कौशल का प्रमाण प्रस्तुत करेंगी।
वे आदिवासी, ग्रामीण और आर्थिक रूप से हाशिए पर रहने वाले समुदायों की महिलाओं की वास्तविकताओं और आकांक्षाओं को वैश्विक मंच पर साझा कर बतायेंगी कि ये वे समूह हैं जो अब झारखंड के आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन की वाहक बन रहीं हैं। सीएम हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार राज्य की महिलाओं के उत्थान के लिए कई कार्य कर रही है।
उसी कड़ी में दावोस में कल्पना सोरेन महिलाओं के राजनीतिक नेतृत्व, आर्थिक भागीदारी और सभी को समान अवसर देने पर केंद्रित नीतिगत संवादों और अंतर्राष्ट्रीय मंचों से संबोधित करेंगी। इनमें महिला सशक्तिकरण पर ब्रिक्स पैनल, ईटी महिला सशक्तिकरण संवाद और एलायंस फॉर ग्लोबल गुड का वी लीड मंच और भारत पवेलियन में आधिकारिक कार्यक्रम आदि शामिल हैं।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी युवा मंच के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष सह समाजसेवी अभिषेक अग्रवाल के आकस्मिक निधन पर झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल,महामंत्री विनोद कुमार जैन एवं संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने गहरा शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि अभिषेक अग्रवाल सरल, मिलनसार, मृदुभाषी, धार्मिक विचारधारा व्यक्तित्व वाले व्यक्ति थे।
उनका निधन अत्यंत दु:खद एवं हृदयविदारक है। उनके निधन से समाज ने एक ऐसे युवा नेतृत्वकर्ता को खो दिया जिन्होंने अपना जीवन समाज सेवा संगठन निर्माण और मानवीय मूल्यों के प्रसार हेतु समर्पित कर दिया। उनकी शालीनता, स्पष्टवादिता, सरलता और समाज के प्रति समर्पण पूरा समाज हमेशा याद रखेगा उनके निधन से समाज को अपूरणीय क्षति हुई है।
टीम एबीएन, रांची। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, चौधरी बगान, हरित भवन के सामने हरमू रोड, रांची द्वारा लोहड़ी के अवसर पर एक आध्यात्मिक समारोह आयोजित किया गया। मौके पर राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा ने कहा कि पंजाब में इस त्योहार को लोहड़ी के नाम से मनाया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि एक देवी थी जिसका नाम लोहई थां इस देवी ने एक जालिम दैत्य को जलाकर भस्म कर दिया और लोगों को उसके प्रकोप से बचाया था तभी से लोग इसे लोहड़ी नाम से पुकारते हैं लोहड़ी शब्द का सम्बन्ध लौ अर्थात प्रकाश से अधिक लगता है। ज्ञान प्रकाश फैलने से अज्ञान अंधकार मिट जाता है।
कलियुगी रूपी रात में ज्ञान की लौ प्रज्वलित कर संसार में फैले अज्ञान अंधकार को समाप्त कर सद्गुणों और ज्ञान के प्रकाश से भरपूर कर देने का प्रतीक है लोहड़ी का त्योहार। हम सभी इसे खाने-खिलाने भर का त्योहार न मानें बल्कि इसमें समाये आध्यात्मिक रहस्यों को आत्मसात कर जीवन को महान बनाने का दृढ़ संकल्प लें।
उक्त जानकारी केंद्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला ने दी। इस दौरान उन्होंने कहा कि नया युग आध्यात्मिक युग होगा। पवित्रता ही सुख शांति की जननी है। हर कीमत पर इसकी रक्षा करना अपना सर्वप्रथम कर्तव्य है।
टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि मकर संक्रांति भारत के प्रमुख और प्राचीन पर्वों में से एक है। यह पर्व प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता है कई स्थानों में 15 जनवरी को भी यह पर्व मनाया जायेगा। मकर संक्रांति का विशेष महत्व इस बात में निहित है कि यह एक खगोलीय घटना पर आधारित पर्व है न कि केवल धार्मिक तिथि पर।
इसी कारण यह लगभग हर वर्ष एक ही दिन मनाया जाता है, जबकि अन्य भारतीय पर्व तिथियों के अनुसार बदलते रहते हैं। मकर संक्रांति उस दिन मनायी जाती है जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। इस दिन से सूर्य की गति उत्तर दिशा की ओर हो जाती है, जिसे उत्तरायण कहते हैं।
शास्त्रों में उत्तरायण को देवताओं का दिन और दक्षिणायण को रात्रि माना गया है। इसलिए यह समय अत्यंत शुभ, सकारात्मक और कल्याणकारी माना गया है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन किया गया दान, स्नान, जप और तप अक्षय फल देता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने असुरों का अंत कर उन्हें मंदार पर्वत के नीचे दबा दिया था।
महाभारत के अनुसार पितामह भीष्म ने उत्तरायण की प्रतीक्षा कर इसी दिन देह त्याग किया, जिससे उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। गंगा सागर में स्नान का भी विशेष महत्व है। मकर संक्रांति केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक भी है। भारत के विभिन्न राज्यों में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है उत्तर भारत में मकर संक्रांति, पंजाब में लोहड़ी तमिलनाडु में पोंगल, असम में भोगाली बिहू, गुजरात और राजस्थान में पतंगोत्सव हर क्षेत्र में परंपराएं अलग हैं, पर भाव एक ही है- उत्सव, उल्लास और नयी शुरुआत।
मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बने व्यंजन खाने और दान करने की परंपरा है। तिल शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और गुड़ मिठास व गर्मी देता है। प्रतीकात्मक रूप से यह संदेश देता है कि कटु वचन छोड़कर जीवन में मधुरता अपनानी चाहिए। मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाना केवल एक परंपरा नहीं बल्कि आस्था, ज्योतिष और सामाजिक चेतना का सुंदर संगम है यह पर्व सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने और जीवन में नयी ऊर्जा के स्वागत करने का संदेश देता है। यह पर्व कृषि प्रधान भारत में फसल कटाई के समय आता है।
किसान अपनी मेहनत की पहली उपज प्रकृति और ईश्वर को अर्पित कर कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। यह पर्व मानव और प्रकृति के बीच सामंजस्य का सुंदर उदाहरण है। मकर संक्रांति केवल एक तिथि या उत्सव नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि, सकारात्मक सोच और सामाजिक एकता का पर्व है।
यह हमें अंधकार से प्रकाश की ओर, नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर और आलस्य से कर्म की ओर प्रेरित करता है। बदलते समय में भी मकर संक्रांति हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़कर जीवन में संतुलन और सौहार्द बनाये रखने का संदेश देती है।
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