झारखंड

View All
Published / 2021-04-23 08:07:18
हजारीबाग : ऑक्सीजन प्लांट से शुरू हुआ उत्पादन, 24 घंटे में मिला लाइसेंस

हजारीबाग। ऑक्सीजन की हो रही किल्लत हजारीबाग़ में अब दूर हो जाएगी। सरकार ने ऑक्सीजन की किल्लत को देख 24 घंटे में लाइसेंस दे दिया है। हजारीबाग़ जिला से आठ किमी दूर एनएच 33 रांची पटना स्थित डेमोटांड़ स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में मेडिकल ऑक्सीजन सिलिंडर प्लांट महर्षि एयर सल्यूशन से बुधवार को उत्पादन शुरू हो गया है। एबीएन न्यूज़ 24 से बातचीत में महर्षि एयर सल्यूशन कम्पनी के मैनेजर अकरम खान ने बताया कि अब हजारीबाग़ के अस्पतालों को रामगढ़ का रुख नहीं करना पड़ेगा। एक साल का इंतजार खत्म हुआ : सरकार ने बुधवार को लाइसेंस दे दिया जिससे यहां से अभी लगभग 200 ऑक्सीजन सिलेंडर को अस्पतालों को मुहैय्या कराया जा रहा है। जिस तरह अस्पतालों को परेशानी हो रही थी अब लोगों की जिंदगी को बचाया जा सकेगा। बताते चलें कि हजारीबाग़ में हर रोज लगभग 200 डी टाइप सिलेंडर की आवश्यकता है। अब यहां से 24 घण्टे ऑक्सीजन अस्पतालों को उपलब्ध कराया जाता रहेगा। 10 से 12 सिलेंडर की रिफिलिंग की जा रही है : यहां कार्य कर रहे फिलिंग ऑपरेटर ओमप्रकाश यादव कहते है कि बुधवार से शुरू हुआ। यह प्लांट अस्पतालों को ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था करा रहा है। 18 से 20 मिनट में 10 से 12 सिलेंडर की रिफिलिंग की जा रही है। वहीं, दूसरे ऑपरेटर रामाधार यादव का कहना है कि सरकार ने एक साल के बाद लाइसेंस दिया है। अब ऑक्सीजन अस्पतालों में उपलब्ध कराया जा रहा है इससे लोगों की जिंदगी को बचाया जा सकेगा। कोरोना को लेकर जो ऑक्सीजन की कमी हो रही थी उसको पूरा करने का काम महर्षि एयर सल्यूशन कर रहा है।

Published / 2021-04-21 12:55:20
झारखंड में 2 बजे तक ही खुले रहेंगे बैंक

रांची। कोरोना के कहर के कारण बैंकों में कामकाज 22 से 29 अप्रैल तक सुबह 10 से दिन के 2 बजे तक होगा। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में 50 फीसदी कर्मचारियों को ड्यूटी पर रखते हुए दिन के 2 बजे तक बैंकों को खोले रखने का निर्णय लिया गया है। 30 अप्रैल को राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक होगी, जिसमें आगे का निर्णय होगा।

Published / 2021-04-21 12:15:13
झारखंड : लॉकडाउन के बावजूद शादी-ब्याह पर रोक नहीं

रांची। राज्य में 22 से 29 अप्रैल तक स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह मनाया जाना है। इसके तहत कई जरूरी सेवाओं को छोड़कर अन्य गतिविधियों को सीमित किया गया है। सीएम हेमंत सोरेन के इस संबंध में मंगलवार सुबह सूचना जारी करने के बाद से लोगों में सबसे ज्यादा उलझन शादी-ब्याह को लेकर थी। यह उलझन देर शाम मुख्य सचिव के स्तर से दूर कर दी गयी है। स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह के दौरान शादी-ब्याह पर रोक नहीं होगी, हालांकि उसमें शामिल होने वालों की संख्या 50 से अधिक नहीं होनी चाहिए। सरकार ने 29 अप्रैल तक होने वाले शादी विवाह के कार्यक्रमों पर रोक नहीं लगायी है। पर इसके लिए ऊपरी सीमा 50 तक तय कर दी है। यानि शादी समारोह में अधिकतम 50 लोग ही शामिल हो सकेंगे। किसी के निधन, अंतिम संस्कार में 30 लोगों की सीमा तय की गयी है। धार्मिक स्थल खुले रहेंगे, पर इसमें श्रद्धालुओं का प्रवेश निषेध रहेगा। केवल पुजारी ही पूजा-पाठ कर सकेंगे। इन सभी अवसरों पर कोरोना प्रोटोकॉल का पालन किया जायेगा। परिवहन सेवाएं रहेंगी जारी : सरकार के आदेश के मुताबिक राज्य में ट्रेन, बस, हवाई जहाज, आॅटो रिक्शा, कार जैसी सेवाएं जारी रहेंगी। इस पर कोई रोक नहीं होगी। ट्रेन, हवाई जहाज की सेवा का उपयोग करते समय यात्रियों के पास पहचान पत्र होना चाहिये। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक्स सेवा (मीडिया) जारी रहेंगी। सरकारी कार्यालय (केंद्र, राज्य) खुले रहेंगे। इनमें प्रवेश करने वालों के चेहरे पर मास्क होना अनिवार्य रहेगा। होटल, रेस्टोरेंट सेवाएं जारी रहेंगी। पर इसमें बैठाकर भोजन नहीं कराया जा सकेगा। भोजन यहां से पार्सल कराकर लिया जा सकेगा। कुरियर सेवा, टेलिकॉम रिलेटेड सर्विस भी जारी रहेगी। सड़कों के किनारे ढ़ाबे खुले रहेंगे। स्ट्रीट वेंडर (फल-सब्जी विक्रेता, दूध कारोबार, मवेशी चारा, मिठाई निर्माण और वितरण) को बंद नहीं किया जायेगा। इसके अलावे जिले स्तर पर डीसी को जो सेवाएं जरूरी लगेंगी, वह उसे कोरोना प्रोटोकॉल को देखते हुए फैसला ले सकता है। किन किन सेवाओं को किया गया स्थगित : राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थान अगले आदेश तक बंद रहेंगे। आंगनबाड़ी सेंटर भी बंद रहेंगे। स्कूली बच्चों को डिजीटल कंटेंट देकर पढ़ाई से जोड़े रखा जायेगा। जरूरतमंदों (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधि के तहत) को खाद्य सामग्री होम डिलीवरी की जायेगी। किसी भी तरह का मेला इस अवधि में निषिध रहेगा। जिम, स्वीमिंग पुल, पार्क बंद रखे जायेंगे।

Published / 2021-04-19 07:19:21
पूर्व मंत्री सरयू राय, सीएम के बड़े बेटे कोरोना पॉजिटिव

रांची। झारखंड में कोरोना की दूसरी लहर का कहर जारी है। लगातार संक्रमितों की संख्‍या बढ़ रही है। मौत का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ रहा है। संक्रमण आम से लेकर खास किसी को भी नहीं छोड़ रहा। राज्‍यपाल के बाद सीएम हेमंत सोरेन के घर में भी संक्रमण पहुंच चुका है। सीएम के बड़े बेटे नितिन सोरेन भी कोरोना संक्रमित हो गए हैं। सैंपल जांच रिपोर्ट में वे पॉजिटिव पाए गए हैं। नितिन भी होम आइसोलेशन में है। उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है। वहीं अब पूर्व मंत्री सरयू राय भी कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। उन्‍होंने खुद इसकी जानकारी सोशल मीडिया के माध्‍यम से दी है। उन्‍होंने लिखा है- कोरोना वायरस के शुरुआती लक्षण के चेक-अप के बाद मुझे COVID-19 पॉजिटिव पाया गया है। डॉक्टर से सलाह के बाद अभी मैं घर पर हूं। दो दिन पूर्व ही मैंने खुद को आइसोलेट कर लिया था। मेरे संपर्क में आये सभी लोग खुद को आइसोलेट कर जांच करवा लें। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए सेवा सदन के बाद रिम्‍स में भी ओपीडी सेवा बंद कर दी गई है। रिम्‍स में ई-ओपीडी की शुरुआत की गई है। वहीं सचिवालय संघ ने 5 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा की है। शास्‍त्री मार्केट भी एक सप्‍ताह के लिए स्‍वत: लॉकडाउन है। पिछले 24 घंटे में राज्‍य में 3992 नए पॉजिटिव मरीज मिले। जिसमें रांची से अकेले 1073 मरीज शामिल हैं। राज्य में आज 50 संक्रमितों ने दम तोड़ा। बेड नहीं मिलने की वजह से डिप्‍टी मेयर संजीव विजयवर्गीय के चाचा का निधन हो गया। स्थिति काफी डरावनी हो गई है। मृतकों में पूर्वी सिंहभूम से 17, रांची से 11, चतरा से 01, धनबाद से 01, दुमका से 02, गढ़वा से 02, गोड्डा से 04, गुमला से 02, खूंटी से 02, कोडरमा से 01, लातेहार से 01, पलामू से 02, रामगढ़ से 02, साहिबगंज से 01 और पश्चिमी सिंहभूम से 01 मरीज शामिल है। कहां मिले कितने मरीज : बोकारो से 113, चतरा से 141, देवघर से 141, दुमका से 63, धनबाद से 174, पूर्वी सिंहभूम से 676, गढ़वा से 72, गिरिडीह से 27, गोड्डा से 55, गुमला से 52, हजारीबाग से 115, जामताड़ा से 113, खूंटी से 147, कोडरमा से 287, लातेहार से 101, लोहरदगा से 23, पाकुड़ से दो, पलामू से 47, रामगढ़ से 80, रांची से 1073, साहिबगंज से 143, सरायकेला से 135, सिमडेगा से 96 और पश्चिमी सिंहभूम से 116।

Published / 2021-04-18 09:56:36
झारखण्ड : जेपीएससी समेत तमाम परीक्षाएं स्थगित, स्कूल, कॉलेज, कोचिंग व आंगनबाड़ी सब बंद

रांची। कोरोना के दूसरे लहर से मुकाबले करने के मकसद से झारखंड सरकार ने मजबूत कदम उठाया है। जेपीएससी समेत तमाम परीक्षाओं को स्थगित करने का निर्णय लेने के साथ ही स्कूल, कॉलेज, कोचिंग, तकनीकी शिक्षा संस्थान व आंगनबाड़ी केंद्रों को अगले आदेश तक बंद रखने का फैसला लिया है। इसके साथ ही सरकार ने संक्रमण के मद्देनजर शादी समारोह में 50 से अधिक लोगों के शामिल होने पर पाबंदी लगा दी है। सातवीं से 10 वीं जेपीएसपी परीक्षा दो मई को होनी थी। इस परीक्षा के लिए राज्य के करीब पांच लाख विद्यार्थी शामिल हो रहे थे। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के आन जान करने से संक्रमण के और फैलने का खतरा था। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए जेपीएससी की परीक्षा स्थगित की गई। इस परीक्षा रद्द करने के लिये झारखंड लोक सेवा आयोग पर दबाव बनाया जा रहा था। सरकार ने यह फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में रविवार के दोपहर हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया है।सरकार की ओर से दावा किया गया है कि राज्य में कोरोना का खतरा तेजी से बढ़ा है। इसे देखते हुए व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करते हुए काम किया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ायी जा रही हैं। जीवनरक्षक दवाओं और जरूरी बेड की व्यवस्था की जा रही। मेडिकल सेंटर में बेडों की संख्या बढ़ाने का भी काम चल रहा है। तेजी से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ रही है। संक्रमण की गति में कब तक कमी आयेगी, अभी कह पाना कठिन है। ऐसे में कोरोना की रफ्तार में कमी करने को संक्रमण का चेन तोड़ने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री हेमंत ने राज्य के लोगों से अपील करते हुए कहा है कि संक्रमण को रोकने में सबों की मदद चाहिये। इसे हल्के में न लें। यह घातक रूप में सामने आ रहा है. नौजवान, बुजूर्ग और हर उम्र के लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। नौजवान वर्ग के लोग बेवजह मौज मस्ती करना और घूमना बंद करें। अगले को संक्रमित मानकर चलें। ऐसा नहीं करने पर आपके आपके परिजन भी चपेट में आ सकते हैं। बेवजह अभी कोई न घूमें। जरूरी होने पर मास्क लगाकर ही निकलें। भीड़ के झूंड में ना रहने से बचें। सीएम ने यह भी कहा कि संक्रमण के खतरे को रोकने को और भी निर्णय लिये जा सकते हैं। इस महीने के बाद इसकी फिर से समीक्षा की जायेगी।

Published / 2021-04-17 13:36:47
पलामू : रिमांड होम से चार दिनों में पांचवां बच्चा फरार

मेदिनीनगर। जिला मुख्यालय स्थित रिमांड होम से फिर एक नाबालिग के भाग जाने के बाद प्रशासन सकते में है। चार दिन के अंतराल में यह दूसरी घटना है जब रिमांड होम से बच्चा फरार हुआ है। अभी 13 और 14 अप्रैल को भी दो-दो बच्चे बाल गृह और रिमांड होम से सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर दीवार फांद कर भाग गए थे। जिनका अभी तक कोई अता पता नहीं चला है। शुक्रवार की रात रिमांड होम की छत से पेड़ के सहारे उतरकर एक और बच्चा फरार हो गया। बच्चों के लगातार भागने से रिमांड होम और बालगृह की सुरक्षा के साथ साथ अंदर रख रखाव की व्यवस्था व सक्रियता पर भी सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार भागने वाले नाबालिक की उम्र 17 वर्ष है। वह लातेहार जिले के चंदवा का रहने वाला है। दुष्कर्म के एक मामले में उसे रिमांड होम में रखा गया था। रात के ढाई बजे उसके भागने का वीडियो सीसीटीवी फुटेज में कैद हुआ है। सूचना मिलने के बाद समाज कल्याण पदाधिकारी नीता चैहान, एसडीपीओ के. विजय शंकर, एसडीएम राजेश कुमार साह सहित अन्य पदाधिकारियों ने रिमांड होम का जायजा लिया। बच्चे के फरार होने की सूचना जिले के उपायुक्त और एसपी को भी दी गयी है।

Published / 2021-04-17 13:14:45
पोषक तत्वों से भरपूर हैं झारखंड की साग-सब्जियां

एबीएन डेस्क। विटामिन, खनिज और एंटीआक्सीडेंट गुणों से भरपूर जनजातीय इलाकों में पायी जाने वाली ये पत्तेदार सब्जियां स्थानीय आदिवासियों के भोजन का अहम हिस्सा होती हैं। इनमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम, मैग्निशयम, आयरन, पोटैशियम जैसे खनिज तथा विटामिन पाए गए हैं। गोभी, पालक, मटर, शिमला मिर्च, गाजर और आलू जैसी सब्जियां रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कुछ ऐसी सब्जियां हैं, जिनका प्रचलन देशभर में है। वहीं, देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसी सैकड़ों विशिष्ट सब्जी प्रजातियां पायी जाती हैं, जो पोषण से भरपूर होने के बावजूद वह लोकप्रियता हासिल नहीं कर सकी हैं, जो आलू, गोभी, मटर, पालक, भिंडी, लौकी, कद्दू और इसके जैसी अन्य सब्जियों को मिली है। हालांकि, ऐसी सब्जी प्रजातियां गरीब और पिछड़ेपन का शिकार माने जाने वाले झारखंड के जनजातीय लोगों के भोजन का एक अहम हिस्सा हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पटना एवं रांची स्थित पूर्वी अनुसंधान परिसर के शोधकतार्ओं ने झारखंड के स्थानीय आदिवासियों द्वारा उपयोग की जाने वाली पत्तेदार सब्जियों की 20 ऐसी प्रजातियों की पहचान की है, जो पौष्टिक गुणों से युक्त होने के साथ-साथ भोजन में विविधता को बढ़ावा दे सकती हैं। शोधकतार्ओं का कहना है कि पोषण एवं खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी सब्जियों की ये स्थानीय प्रजातियां मददगार हो सकती हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से अधिकतर सब्जियों के बारे में देश के अन्य हिस्सों के लोगों को जानकारी तक नहीं है। इस अध्ययन के दौरान रांची, गुमला, खूंटी, लोहरदगा, पश्चिमी सिंहभूमि, रामगढ़ और हजारीबाग समेत झारखंड के सात जिलों के हाट (बाजारों) में सर्वेक्षण कर वहां उपलब्ध विभिन्न मौसमी सब्जियों की प्रजातियों के नमूने एकत्रित किए हैं। इन सब्जियों में मौजूद पोषक तत्वों, जैसे- विटामिन-सी, कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्निशयम, पोटैशियम, सोडियम और सल्फर, आयरन, जिंक, कॉपर एवं मैगनीज, कैरोटेनॉयड्स और एंटीआक्सीडेंट गुणों का पता लगाने के लिए नमूनों का जैव-रासायनिक विश्लेषण किया गया है। विटामिन, खनिज और एंटीआक्सीडेंट गुणों से भरपूर जनजातीय इलाकों में पायी जाने वाली ये पत्तेदार सब्जियां स्थानीय आदिवासियों के भोजन का अहम हिस्सा होती हैं। इनमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम, मैग्निशयम, आयरन, पोटैशियम जैसे खनिज तथा विटामिन पाए गए हैं। इन सब्जियों में फाइबर की उच्च मात्रा होती है, जबकि काबोर्हाइड्रेट एवं वसा का स्तर बेहद कम पाया गया है। सब्जियों की इन प्रजातियों में लाल गंधारी, हरी गंधारी, कलमी, बथुआ, पोई, बेंग, मुचरी, कोईनार, मुंगा, सनई, सुनसुनिया, फुटकल, गिरहुल, चकोर, कटई/सरला, कांडा और मत्था इत्यादि शामिल हैं। ये सब्जी प्रजातियां झारखंड के आदिवासियों के भोजन का प्रमुख हिस्सा हैं। शोधकतार्ओं ने पाया है कि जनजातीय लोग लाल गंधारी, हरी गंधारी और कलमी का भोजन में सबसे अधिक उपयोग करते हैं। वहीं, गिरहुल अपेक्षाकृत रूप से कम लोकप्रिय है। बरसात एवं गर्मी के मौसम में विशेष रूप से जनजातीय समुदाय के लोग खाने योग्य विभिन्न प्रकार के पौधे अपने आसपास के कृषि, गैर-कृषि एवं वन्य क्षेत्रों से एकत्रित करके सब्जी के रूप में उपयोग करते हैं। इन सब्जियों को विभिन्न वनस्पतियों, जैसे- झाड़ियों, वृक्षों, लताओं, शाक या फिर औषधीय पौधों से प्राप्त किया जाता है। सब्जियों को साग के रूप में पकाकर, कच्चा या फिर सुखाकर खाया जाता है। सुखाकर सब्जियों का भंडारण भी किया जाता है, ताकि पूरे साल उनका भोजन के रूप में उपभोग किया जा सके। अलग-अलग स्थानों पर विभिन्न मौसमों में भिन्न प्रकार की सब्जियां उपयोग की जाती हैं। इनकी पत्तियों, टहनियों और फूलों को मसालों अथवा मसालों के बिना पकाकर एवं कच्चा खाया जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन सब्जियों की उपयोगिता के बावजूद इन्हें गरीबों एवं पिछड़े लोगों का भोजन माना जाता है, और व्यापक रूप से कृषि चक्र में ये सब्जियां शामिल नहीं हैं। जबकि, सब्जियों की ये प्रजातियां खाद्य सुरक्षा, पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और आमदनी का जरिया बन सकती हैं। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बेहद कम संसाधनों में इनकी खेती की जा सकती है।

Published / 2021-04-17 13:13:54
पोषक तत्वों से भरपूर हैं झारखंड की साग-सब्जियां

एबीएन डेस्क। विटामिन, खनिज और एंटीआक्सीडेंट गुणों से भरपूर जनजातीय इलाकों में पायी जाने वाली ये पत्तेदार सब्जियां स्थानीय आदिवासियों के भोजन का अहम हिस्सा होती हैं। इनमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम, मैग्निशयम, आयरन, पोटैशियम जैसे खनिज तथा विटामिन पाए गए हैं। गोभी, पालक, मटर, शिमला मिर्च, गाजर और आलू जैसी सब्जियां रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कुछ ऐसी सब्जियां हैं, जिनका प्रचलन देशभर में है। वहीं, देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसी सैकड़ों विशिष्ट सब्जी प्रजातियां पायी जाती हैं, जो पोषण से भरपूर होने के बावजूद वह लोकप्रियता हासिल नहीं कर सकी हैं, जो आलू, गोभी, मटर, पालक, भिंडी, लौकी, कद्दू और इसके जैसी अन्य सब्जियों को मिली है। हालांकि, ऐसी सब्जी प्रजातियां गरीब और पिछड़ेपन का शिकार माने जाने वाले झारखंड के जनजातीय लोगों के भोजन का एक अहम हिस्सा हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पटना एवं रांची स्थित पूर्वी अनुसंधान परिसर के शोधकतार्ओं ने झारखंड के स्थानीय आदिवासियों द्वारा उपयोग की जाने वाली पत्तेदार सब्जियों की 20 ऐसी प्रजातियों की पहचान की है, जो पौष्टिक गुणों से युक्त होने के साथ-साथ भोजन में विविधता को बढ़ावा दे सकती हैं। शोधकतार्ओं का कहना है कि पोषण एवं खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी सब्जियों की ये स्थानीय प्रजातियां मददगार हो सकती हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से अधिकतर सब्जियों के बारे में देश के अन्य हिस्सों के लोगों को जानकारी तक नहीं है। इस अध्ययन के दौरान रांची, गुमला, खूंटी, लोहरदगा, पश्चिमी सिंहभूमि, रामगढ़ और हजारीबाग समेत झारखंड के सात जिलों के हाट (बाजारों) में सर्वेक्षण कर वहां उपलब्ध विभिन्न मौसमी सब्जियों की प्रजातियों के नमूने एकत्रित किए हैं। इन सब्जियों में मौजूद पोषक तत्वों, जैसे- विटामिन-सी, कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्निशयम, पोटैशियम, सोडियम और सल्फर, आयरन, जिंक, कॉपर एवं मैगनीज, कैरोटेनॉयड्स और एंटीआक्सीडेंट गुणों का पता लगाने के लिए नमूनों का जैव-रासायनिक विश्लेषण किया गया है। विटामिन, खनिज और एंटीआक्सीडेंट गुणों से भरपूर जनजातीय इलाकों में पायी जाने वाली ये पत्तेदार सब्जियां स्थानीय आदिवासियों के भोजन का अहम हिस्सा होती हैं। इनमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम, मैग्निशयम, आयरन, पोटैशियम जैसे खनिज तथा विटामिन पाए गए हैं। इन सब्जियों में फाइबर की उच्च मात्रा होती है, जबकि काबोर्हाइड्रेट एवं वसा का स्तर बेहद कम पाया गया है। सब्जियों की इन प्रजातियों में लाल गंधारी, हरी गंधारी, कलमी, बथुआ, पोई, बेंग, मुचरी, कोईनार, मुंगा, सनई, सुनसुनिया, फुटकल, गिरहुल, चकोर, कटई/सरला, कांडा और मत्था इत्यादि शामिल हैं। ये सब्जी प्रजातियां झारखंड के आदिवासियों के भोजन का प्रमुख हिस्सा हैं। शोधकतार्ओं ने पाया है कि जनजातीय लोग लाल गंधारी, हरी गंधारी और कलमी का भोजन में सबसे अधिक उपयोग करते हैं। वहीं, गिरहुल अपेक्षाकृत रूप से कम लोकप्रिय है। बरसात एवं गर्मी के मौसम में विशेष रूप से जनजातीय समुदाय के लोग खाने योग्य विभिन्न प्रकार के पौधे अपने आसपास के कृषि, गैर-कृषि एवं वन्य क्षेत्रों से एकत्रित करके सब्जी के रूप में उपयोग करते हैं। इन सब्जियों को विभिन्न वनस्पतियों, जैसे- झाड़ियों, वृक्षों, लताओं, शाक या फिर औषधीय पौधों से प्राप्त किया जाता है। सब्जियों को साग के रूप में पकाकर, कच्चा या फिर सुखाकर खाया जाता है। सुखाकर सब्जियों का भंडारण भी किया जाता है, ताकि पूरे साल उनका भोजन के रूप में उपभोग किया जा सके। अलग-अलग स्थानों पर विभिन्न मौसमों में भिन्न प्रकार की सब्जियां उपयोग की जाती हैं। इनकी पत्तियों, टहनियों और फूलों को मसालों अथवा मसालों के बिना पकाकर एवं कच्चा खाया जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन सब्जियों की उपयोगिता के बावजूद इन्हें गरीबों एवं पिछड़े लोगों का भोजन माना जाता है, और व्यापक रूप से कृषि चक्र में ये सब्जियां शामिल नहीं हैं। जबकि, सब्जियों की ये प्रजातियां खाद्य सुरक्षा, पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और आमदनी का जरिया बन सकती हैं। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बेहद कम संसाधनों में इनकी खेती की जा सकती है।

Page 1545 of 1563

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse