टीम एबीएन, रांची। हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मनाली में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पोते वीर सोरेन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गयी। उनका शव मनाली के सिमसा क्षेत्र स्थित एक होम स्टे में मिला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वीर सोरेन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिवार को इस दु:ख को सहन करने की शक्ति की कामना की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, आदरणीय चंपई सोरेन के पोते वीर सोरेन का कुल्लू में आकस्मिक निधन का अत्यंत मर्माहत करने वाला समाचार मिला।
मरांग बुरु दिवगंत आत्मा को शांति प्रदान कर शोकाकुल परिजनों को दु:ख की घड़ी सहन करने की शक्ति दे। इस दुखद घड़ी में हम उनके साथ हैं। जानकारी के अनुसार, वीर सोरेन अपने दो दोस्तों के साथ 22 फरवरी को मनाली घूमने आये थे और सिमसा के होम स्टे में रुके थे। 23 फरवरी को सभी ने सोलंग घाटी और सेथन गांव घूमकर दिन बिताया।
24 फरवरी को वीर ने दोस्तों के साथ बाहर जाने से मना किया और कहा कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है। दोपहर में जब दोस्तों ने उसे बिस्तर पर देखा तो वह सिर दर्द की शिकायत कर रहा था। दोस्तों ने उसे दवा दी और वह सो गया। करीब 2 बजे कमरे से जोरदार गिरने की आवाज आयी। कमरे में जाकर दोस्तों ने देखा कि वीर बिस्तर से गिरा हुआ है।
वे उसे तुरंत उठाकर अस्पताल ले गये। रास्ते में वीर के मुंह से झाग निकलने लगा। मनाली सिविल अस्पताल में डॉक्टरों ने सीपीआर कर हर संभव प्रयास किया, लेकिन वीर को बचाया नहीं जा सका और उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और दोस्तों, होम स्टे कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है।
टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट एवं श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा समिति के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हिंदू धर्म में श्रद्धा और विश्वास का अद्भुत केंद्र माने जाने वाले श्री खाटू श्याम जी का फाल्गुन मेला महोत्सव देशभर में अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन उत्सव 21 फरवरी से 28 फरवरी तक मनाया जा रहा है, तथा फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी 27 फरवरी एवं द्वादशी 28 फरवरी के दौरान विशेष रूप से मनाया जायेगा।
राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम मंदिर में इस अवसर पर विशाल मेले का आयोजन होता है, जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु श्याम प्रभु के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्री श्याम प्रभु महाभारत काल के वीर बर्बरीक थे, जो घटोत्कच के पुत्र और भीम के पौत्र थे। उन्होंने युद्ध में हारने वाले पक्ष का साथ देने का संकल्प लिया था। उनकी शक्ति से चिंतित होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उनका शीश दान में मांगा।
बर्बरीक ने सहर्ष अपना शीश अर्पित कर दिया। उनकी अद्वितीय वीरता और त्याग से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें श्याम नाम देकर कलियुग में अपने नाम से पूजे जाने का वरदान दिया। ऐसी मान्यता है कि फाल्गुन शुक्ल एकादशी के दिन खाटू धाम में उनका प्राकट्य हुआ था, इसी कारण इस तिथि को विशेष उत्सव मनाया जाता है। यह महोत्सव त्याग, बलिदान और सच्ची भक्ति का प्रतीक है।
फाल्गुन मेला महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भक्ति का महासागर है।मंदिर को भव्य रूप से फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। निशान यात्रा (ध्वज यात्रा) का विशेष महत्व होता है, जिसमें भक्त पैदल यात्रा कर ध्वज अर्पित करते हैं। अखंड कीर्तन, भजन संध्या और रात्रि जागरण का आयोजन होता है। लाखों श्रद्धालु हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा के जयघोष के साथ प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
राजस्थान के अलावा दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों में भी श्याम भक्त मंडलियों द्वारा भव्य शोभायात्राएं और भजन संध्याएं आयोजित की जाती हैं। श्री श्याम प्रभु का फाल्गुन मेला उत्सव समाज में समर्पण, त्याग और परोपकार की भावना जागृत करता है। यह पर्व सिखाता है कि सच्ची भक्ति में अहंकार का स्थान नहीं होता। बाबा श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है, क्योंकि वे दुखी, निराश और पीड़ित जनों के संरक्षक माने जाते हैं।
समाज में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करना, आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देना तथा सेवा भावना को प्रोत्साहित करना है। फाल्गुन मेला महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का विराट संगम है। इस वर्ष भी यह पावन पर्व श्रद्धालुओं के लिए नई ऊर्जा, आशा और सकारात्मकता लेकर आयेगा। श्री श्याम प्रभु का यह संदेश सदैव प्रेरित करता है कि जीवन में सच्ची निष्ठा, त्याग और विश्वास ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। जय श्री श्याम के उद्घोष के साथ यह महापर्व पूरे देश में भक्ति और उत्साह का वातावरण निर्मित करता है।
टीम एबीएन, रांची। क़रीब एक महीने पहले की बात है। संथाल परगना क्षेत्र की एक महिला बोरसी तापने के दौरान जल गई थीं। बेहतर इलाज के लिए उन्हें रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती किया गया। लेकिन कुछ राहत नहीं मिली। वे लगभग 70 प्रतिशत जल चुकी थीं। फ़ैसला हुआ कि एम्स दिल्ली लेकर जाया जायेगा। सवाल उठा कि कैसे? तब एयर एंबुलेंस की बात सामने आई।
बताया गया कि झारखंड सरकार 50% सब्सिडी में एयर एंबुलेंस देती है क्यों नहीं उसके लिए प्रयास किया जाए। टॉल फ्री नंबर पर बात करने पर बताया गया कि बर्न केस में 30% प्रतिशत से अधिक जल जाने पर हमलोग एयर लिफ्ट नहीं करते। फिर प्राइवेट एयरलाइंस से बात हुई और वे 7.5 लाख में ले जाने को तैयार हुए। पैसा क़रीब तीन बजे ही जमा लिया गया और शाम क़रीब सात बजे मरीज़ को एयरलिफ़्ट करके एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाया गया।
अब आते हैं मरीज़ संजय कुमार के केस में। जिस विमान का हादसा हुआ वह रेडबर्ड एयर लाइंस का ही था। झारखंड सरकार जो एयर एंबुलेंस की सुविधा 50 फ़ीसदी सब्सिडी के साथ देती है उसका संचालन भी एयर बर्ड एयर लाइंस ही करता है। परिवार वालों ने जैसी जानकारी दी उसके अनुसार कर्ज लेकर 7.5 लाख जुटाया और एयर एंबुलेंस के लिए दिया। तो यहां सवाल उठता है कि आख़िर मरीज़ संजय को सरकार की सब्सिडी वाला एयर एंबुलेंस क्यों नहीं मिला ? जैसी जानकारी है उसके अनुसार संजय भी 65% प्रतिशत जल चुके थे।
तो सवाल है कि जो रेड बर्ड कंपनी प्रतिशत का आंकड़ा दिखाकर सरकारी व्यवस्था के तहत मरीज़ को ले जाने से मना कर देती है वही कंपनी वही जगह से पूरा पैसा लेकर उसी विमान से कैसे लेकर जाती है? क्या इसमें कोई बड़ा खेल है? जानकारी तो यह भी मिली है कि रेड बर्ड कंपनी के जिस Beechcraft King Air BE9L का हादसा हुआ वह क़रीब 39 साल पुराना विमान था। पूरे मामले की कठोर जांच की ज़रूरत है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, मेदिनीनगर। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के केन्द्रीय संचार ब्यूरो, डालटनगंज की ओर से वर्ष भर चलने वाले वन्दे मातरम् के गौरवपूर्ण 150 वर्ष के स्मरणोत्सव, एक पेड़ मां के नाम एवं स्वच्छ भारत अभियान विषय पर आज राजकीयकृत ब्राह्मण प्लस टू उच्च विद्यालय, मेदिनीनगर में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत पौधरोपण, पर्यावरण संरक्षण के संकल्प तथा कन्या पूजन के साथ हुई। इसके उपरांत क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी श्री गौरव कुमार पुष्कर ने अतिथियों का परिचय कराते हुए विषय प्रवेश कराया।
उन्होंने कहा कि वन्दे मातरम् राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने और मातृभूमि के प्रति समर्पण भाव को सशक्त करने वाला अमर मंत्र है। बतौर अतिथि उपस्थित पर्यावरणविद् एवं वनराखी मूवमेंट के प्रणेता कौशल किशोर जायसवाल ने वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से बिगड़ते पर्यावरण संतुलन पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने पर्यावरण धर्म के आठ मूल मंत्रों की जानकारी देते हुए प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने का आह्वान किया।
वरिष्ठ पत्रकार प्रभात मिश्र सुमन ने वन्दे मातरम् के पलामू से ऐतिहासिक जुड़ाव पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वन्दे मातरम् के रचयिता बंकिम चन्द्र चटर्जी के बड़े भाई संजीव चट्टोपाध्याय, जो पलामू में मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात थे, ने पलामू नाम से बांग्ला में एक प्रसिद्ध यात्रा-वृत्तांत लिखा था।
पत्रकार सतीश चंद्र मिश्र सुमन ने कहा कि वन्दे मातरम् हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने सेल्फी बूथ पर फोटो खिंचाकर वन्दे मातरम् का सामूहिक गान करते हुए भारत माता को नमन किया। इस अवसर पर सामूहिक स्वच्छता शपथ भी दिलाई गई।
विद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने वातावरण को राष्ट्रभावना और ऊर्जा से भर दिया। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के शिक्षक संतोष कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन विद्यालय के प्राचार्य डॉ. सतीश कुमार दुबे ने किया। इस अवसर पर क्षेत्रीय प्रचार सहायक मनोज कुमार सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।
जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित निबंध, रंगोली एवं पेंटिंग प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
टीम एबीएन, रांची। झारखण्ड चैम्बर के कार्यकारिणी सदस्य अमित शर्मा ने कहा है कि झारखण्ड बजट 2026-27 का विश्लेषण करें तो 1.58 लाख करोड़ का प्रावधान और 14% विकास दर का लक्ष्य राज्य की आर्थिक दिशा को स्पष्ट करता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि, कौशल विकास और निवेश पर जोर सराहनीय है। पूंजीगत व्यय में वृद्धि और स्थानीय निकायों को सशक्त करना सकारात्मक कदम हैं।
हालांकि, उद्योग एवं व्यापार को और प्रोत्साहन देने के लिए अतिरिक्त नीतिगत समर्थन आवश्यक होगा, जिससे रोजगार और निवेश दोनों को गति मिल सके।
टीम एबीएन, रांची। विधानसभा में अपने बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि केंद्र सरकार का आर्थिक सहयोग जरूरी है, लेकिन अभी तक हमें सही ढंग से सहयोग नहीं प्राप्त हुआ। 11 हजार करोड़ भी नहीं मिला। अनुदान की राशि भी काट दी जाती है। ऐसे में झारखंड के ऊपर वितीय बोझ बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भले ही केंद्र सरकार झारखंड को सहयोग न करे, लेकिन हमारे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कोई कमी नहीं छोड़ी। विपक्ष कहता रहा कि सरकार का खजाना खाली है, लेकिन हमने किसी का वेतन नहीं रोका। हमने 13,000 करोड़ मईया सम्मान पर खर्च कर दिया। इसके बावजूद झारखंड के पास आज भी राशि मौजूद है।
उन्होंने कहा कि यह बजट राज्य सरकार की विकासोन्मुख सोच, सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता और अबुआ झारखंड के संकल्प को आगे बढ़ाने वाला दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का लक्ष्य राज्य के अंतिम व्यक्ति तक विकास की किरण पहुंचाना है। यह बजट गरीब, किसान, मजदूर, महिला, युवा, आदिवासी, दलित एवं वंचित वर्गों के सशक्तिकरण को समर्पित है।
उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ आधार प्रदान करने के लिए पूंजीगत व्यय में वृद्धि का प्रावधान किया गया है। आधारभूत संरचना, सड़क, सिंचाई, बिजली और पेयजल योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने हेतु किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार तथा कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण हमारी सरकार की प्राथमिकता है। मंईयां सम्मान योजना, स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा तथा पोषण कार्यक्रमों के विस्तार के लिए पर्याप्त राशि का प्रावधान किया गया है। युवाओं के लिए रोजगार सृजन, कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार तथा स्वरोजगार योजनाओं को गति देने का निर्णय लिया गया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, जिला अस्पतालों के उन्नयन, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम हेतु नयी योजनाओं का प्रस्ताव किया गया है। शिक्षा क्षेत्र में विद्यालयों की आधारभूत संरचना सुधार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा तथा उच्च शिक्षा संस्थानों को सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखा गया है।
ग्रामीण विकास योजनाओं, सड़क निर्माण, आवास योजनाओं और पेयजल परियोजनाओं पर विशेष बल दिया गया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार हो सके। वित्तीय अनुशासन बनाये रखते हुए राजकोषीय प्रबंधन को सुदृढ़ करने और संसाधनों के प्रभावी उपयोग का संकल्प इस बजट में व्यक्त किया गया है। हमारा उद्देश्य विकास और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन स्थापित करना है।
टीम एबीएन, रांची। पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के लिए 361 करोड़ 67 लाख का प्रावधान है जबकि गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के लिए 11,038 करोड़ 53 लाख रुपए, वित्तीय वर्ष 2022-23 में हमर अपन बजट, वित्तीय वर्ष 2023- 24 और 2024-25 में हमीन कर बजट, 2025-26 में अबुआ बजट और वित्तीय वर्ष 2026-27 में अबुआ दिशोम बजट रखा गया।
अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के लिए 3568.19 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। पथ निर्माण विभाग के लिए 6601 करोड़ 28 लाख रुपए का प्रावधान है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में राजस्व आय 66700 करोड़ रहने का अनुमान। स्थापना एवं योजना व्यय का अनुपात 36:64 प्रस्तावित है। सिंकिंग फंड में इस वर्ष 654 करोड़ के दोबारा निवेश का प्रस्ताव है। वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 9% ज्यादा है। राजस्व व्यय के लिए 1 लाख 20 हजार 851.90 करोड़ का प्रस्ताव।
वित्त मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में धनबाद में दो, पलामू , लातेहार और गढ़वा में एक-एक यानी कुल पांच झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय के निर्माण की घोषणा की है। साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 में 100 नए उत्कृष्ट विद्यालय के संचालन का लक्ष्य रखा गया है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार के द्वारा एक बार फिर भारी भरकम बजट पेश किया गया है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन में आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करने के बाद ईटीवी भारत संवाददाता भुवन किशोर झा के साथ खास बातचीत में कहा कि इस बजट में सोशल सेक्टर, शिक्षा और स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान दिया गया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के तुलना में करीब 9% ज्यादा का प्रावधान करते हुए 1,58,560 करोड़ का रखा गया है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में राजस्व व्यय के लिए 1,20,851.90 करोड़ रुपये प्रस्तावित है, जो पिछले वर्ष से 9.2 प्रतिशत अधिक है। पूंजीगत व्यय अन्तर्गत गत वर्ष के बजट पर 8.5 प्रतिशत वृद्धि के साथ 37,708.10 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बजट में है।
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस मौके पर कहा कि राज्य अपने आंतरिक श्रोत को बढ़ाकर अपने पैर पर खड़ा होना चाहती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राजनीति के तहत राज्य के अंशदान में लगातार कटौती कर रही है। इसके लिए हमें अपने आंतरिक श्रोत को मजबूत करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हमारा आमदनी कर राजस्व से 46,000 करोड़ रुपये तथा गैर कर राजस्व से 20,700 करोड़ रुपये केंद्रीय सहायता से 18,273.66 करोड़ रुपये तथा केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी के रूप में 51,236.38 करोड़ रुपये, लोक ऋण से 22049.96 करोड़ रुपये एवं उधार तथा अग्रिम की वसूली से 300 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटा 13,595.96 करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जो कि अनुमानित जीएसडीपी का 2.18 प्रतिशत है। वर्तमान मूल्य पर झारखंड का जीएसडीपी वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 5 लाख 16 हजार करोड़ रुपये रहा। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास होगा कि अगले 5 वर्षों में इसे दोगुना किया जाए। इसके लिए हमें वर्तमान मूल्य पर करीब 14 प्रतिशत का विकास करना होगा। स्थिर मूल्य पर यह करीब 9 से 10 प्रतिशत की विकास दर होगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि 14.1 प्रतिशत की लक्षित विकास दर राज्य के मौजूदा संसाधनों का उपयोग करके, बाहरी कारकों, विशेष रूप से सूखे के प्रभाव को निष्प्रभावी करके और विकास को बढ़ावा देने वाले उपायों को लागू करके हासिल की जाएगी। इस क्रम में ग्रोथ इंजन कृषि, उद्योग, भौतिक संरचनाओं का विकास, वित्तीय सेक्टर का विकास स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास तथा सामाजिक सुरक्षा पर विशेष बल दिया जायेगा।
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