टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने गुरुवार को झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता अमर वीर शहीद निर्मल महतो की जयंती पर रांची के जेल मोड़ स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद सीएम ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आज बहुत महत्वपूर्ण दिन है।
राज्य के आदिवासी-मूलवासियों के हक-अधिकार की लड़ाई लड़ने वाले और झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता वीर शहीद निर्मल महतो जी की 75वीं जयंती है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी पूरे राज्य में वीर सपूत शहीद निर्मल महतो जी को लोग याद कर रहे हैं।
टीम एबीएन, रांची। रांची समेत पूरे झारखंड में बुधवार को क्रिसमस का पर्व हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं हुईं, वहीं शहरों और कस्बों में रोशनी, सजावट और उल्लास का माहौल देखने को मिला।
मौके पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया के माध्यम से राज्यवासियों को क्रिसमस की शुभकामनाएं दीं। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने अपने संदेश में लिखा कि क्रिसमस प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का प्रतीक पर्व है। उन्होंने कामना की कि यह पावन अवसर सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आये।
वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संदेश में कहा कि क्रिसमस प्रेम, करुणा, शांति और सेवा का पर्व है। प्रभु यीशु मसीह का जीवन और उनका संदेश मानवता, त्याग और भाईचारे के मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों को हार्दिक बधाई, शुभकामनाएं और जोहार देते हुए कामना की कि यह पावन पर्व सभी के जीवन में उत्तम स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि लेकर आये।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड आंदोलन के मसीहा वीर शहीद निर्मल महतो की आज 75वीं जयंती पर संपूर्ण झारखंड में उनके संघर्षों को याद किया गया। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा सिल्ली विधानसभा ने सोनाहातु जाड़ेया में स्थित शहीद निर्मल महतो की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
मौके पर केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष सह सिल्ली विधानसभा पूर्व प्रत्याशी देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि आज के दिन समस्त झारखंडवासी शहीद निर्मल महतो के संघर्ष को याद कर रहे हैं। जिन्होंने झारखंड की माटी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।
उन्होंने शोषित-वंचित वर्गों, गरीबों, मजदूरों और किसानों के हक अधिकार के लिए सुदखरों और शोषकों के खिलाफ आंदोलन चलाये। युवा अवस्था से ही उन्होंने शोषित समाज की पीड़ा को महसूस किया और छात्र जीवन से ही आंदोलन की राह पकड़ लिया था।
झारखंड अलग राज्य की मांग के लिए युवाओं को संगठित किया। प्रशासनिक दमन के बावजूद रैलियां, धारणाएं और जुलूस आयोजित कर अलग झारखंड की मांग को राष्ट्रीय पटल तक पहुंचा था। 25 दिसंबर 1950 को जमशेदपुर के कदमा, उलियान के एक साधारण परिवार में जन्मे निर्मल महतो के संघर्ष आज भी युवाओं को प्रेरित करती है।
8 अगस्त 1987 को चमरिया गेस्ट हाउस में हुई राजनीतिक षड्यंत्र के शिकार से मौत हुई, लेकिन उनका संघर्ष थम नहीं है। उनका नारा मेरा खून बेकार न जाये, मेरा खून का हिसाब रखना आज भी झारखंडियों के रगों में दौड़ता है। उनकी शहादत अलग झारखंड आंदोलन को एक नयी दिशा दिया, जिससे 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का सपना साकार हुआ।
शहीद निर्मल महतो का संघर्ष हमें सिखाता है कि सच्चा योद्धा अन्याय के आगे कभी झुकता नहीं है। शहीद निर्मल महतो के त्याग, बलिदान और कुर्बानी से अलग झारखंड राज्य गठन तो हुआ, लेकिन उनका सपना झारखंडी आदिवासी मूलवासी का विकास, जल - जंगल-जमीन, भाषा-संस्कृति, रीति-रिवाज का संरक्षण, समृद्ध झारखंड का सपना आज भी अधूरा है।
झारखंड गठन के 25 साल बाद भी झारखंडियों को शासन- प्रशासन, नीति निर्माण और नियोजन में उचित हिस्सेदारी नहीं मिल पायी है। आज तक झारखंडियों को पहचान नहीं मिल पाया है। शहीद निर्मल महतो के सपना को साकार करना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। माल्यार्पण कार्यक्रम के मौके पर रंजीत महतो, मोहन महतो, गदाधर महतो, प्रहलाद महतो के अलावा अन्य सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
टीम एबीएन, रांची। वरिष्ठ पत्रकार और रांची विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो वाइस चांसलर प्रो. डॉ. वेद प्रकाश शरण का गुरुवार तड़के करीब 3.00 बजे रांची के दीपाटोली स्थित क्यूरेस्टा अस्पताल में निधन हो गया। वे 80 वर्ष के थे।
परिजनों के अनुसार प्रो. शरण वर्ष 2021 से किडनी संबंधी बीमारी से पीड़ित थे और लंबे समय से उपचाररत थे। उनके निधन से परिवार, शुभचिंतकों और उनके सहयोगियों में शोक की लहर है। वे अपने पीछे पुत्री और दामाद को छोड़ गए हैं।
प्रो. डॉ. वेद प्रकाश शरण रांची विश्वविद्यालय में प्रो वाइस चांसलर के पद पर कार्यरत रहे थे। इसके अलावा उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची में राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष (एचओडी) के रूप में सेवाएं दीं और वहीं से सेवानिवृत्त हुए।
वह लंबे समय तक सेंट जेवियर्स कॉलेज में पत्रकारिता विभाग के निदेशक भी रहे। वह रांची प्रेस क्लब के संस्थापक संयुक्त सचिव भी थे। प्रो. शरण ने तीन दशकों से भी अधिक समय तक पत्रकारिता की।
वह लंबे समय तक स्टेट्समैन से जुड़े रहे। राजनीतिक जीवन में भी वे सक्रिय रहे और कांग्रेस की झारखंड प्रदेश इकाई के पूर्व मुख्य प्रवक्ता के रूप में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को हरमू मुक्तिधाम में होगा।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। लोकसभा सांसद सुखदेव भगत गुमला पहुंचकर क्रिसमस के अवसर पर गुमला धर्म प्रांत के बिशप लिनु पिंगल सहित विभिन्न चर्च, मिशनरीज संस्थाओं, विद्यालयों और कलीसिया समुदाय के लोगों से मुलाकात कर उन्हें शुभकामनाएं एवं सौहार्द, भाईचारे और समग्र विकास का भी संदेश दिया।
सांसद सबसे पहले गुमला धर्मपरांत पहुंचे जहां उन्होंने बिशप से मुलाकात कर बुके और केक भेंट किया। मौके पर अल्पसंख्यक समुदाय की देश और राज्य के विकास में भूमिका पर चर्चा हुई। सांसद ने कहा कि झारखंड की विविधता ही उसकी ताकत है और यहां सभी समुदाय मिलकर विकास की दिशा तय करते हैं।
इसके बाद सांसद उर्सु लाइन कान्वेंट स्कूल पहुंचे जहां प्राचार्य सिस्टर हरमिला लकड़ा ने उनका स्वागत किया। सांसद ने शिक्षा के क्षेत्र में धर्म बहनों के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें क्रिसमस एवं नव वर्ष की शुभकामनाएं दी। सांसद संत इग्नासियुस हाई स्कूल भी गए जहां रेक्टर फादर फ्लोरेंस और फादर मनोहर खोया ने उनका अभिनंदन किया।
इसके अलावा सांसद रायडीह माझा टोली और लोहरदगा रोड स्थित जीईएल चर्च समेत कई मिशनरी संस्थानों में पहुंचकर पुरोहितों और कलीसिया समुदाय को क्रिसमस की बधाई दी। मौके पर कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजनील तिग्गा, पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष दीप नारायण उरांव, इंटक अध्यक्ष आलोक कुमार साहू, अनिरुद्ध चौबे, जय सिंह, सन्नी सहित अनेक कांग्रेसी उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि वीर बाल दिवस प्रतिवर्ष 26 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिवस सिख इतिहास के उन अमर बाल वीरों-साहिबजादे जोरावर सिंह और साहिबजादे फतेह सिंह-की शहादत की स्मृति में समर्पित है, जिन्होंने धर्म, सत्य और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अत्यंत कम आयु में अद्वितीय साहस का परिचय दिया।
भारत सरकार ने वर्ष 2022 में 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की, ताकि देश की युवा पीढ़ी इन प्रेरक आदर्शों से परिचित हो सके।साहिबजादे जोरावर सिंह (आयु लगभग 9 वर्ष) और फतेह सिंह (आयु लगभग 6 वर्ष) सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी के सुपुत्र थे। सन् 1705 में कठिन परिस्थितियों के बीच वे अपने परिवार से बिछुड़ गये और अंतत: उन्हें सरहिंद में बंदी बनाया गया।
उनसे अपने धर्म और सिद्धांतों से विचलित होने का दबाव डाला गया, किंतु बाल साहिबजादों ने सत्य और आस्था से समझौता करने से इंकार कर दिया। उनके इसी अडिग साहस और बलिदान की स्मृति में वीर बाल दिवस मनाया जाता है। गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन त्याग, संगठन और न्याय की स्थापना के लिए समर्पित था। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना कर समानता, साहस और सेवा के मूल्यों को सुदृढ़ किया साहिब जादे इन्हीं आदर्शों में पले-बढ़े।
अत्यंत कम आयु होने के बावजूद उनमें अदम्य, आत्मबल, नैतिक दृढ़ता और कर्तव्यनिष्ठा स्पष्ट दिखाई देती है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि उम्र नहीं, बल्कि चरित्र और विश्वास ही सच्ची शक्ति होते हैं।वीर बाल दिवस केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए प्रेरणा है। यह दिवस बच्चों और युवाओं में नैतिक साहस, धार्मिक सहिष्णुता, न्याय के प्रति प्रतिबद्धता और राष्ट्रप्रेम के भाव को जाग्रत करता है।
यह हमें बताता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का मार्ग चुनना ही सच्ची वीरता है। विद्यालयों, सामाजिक संस्थानों और समुदायों में इस दिन संगोष्ठियां, भाषण, निबंध प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर इन मूल्यों को आगे बढ़ाया जाता है। आज जब समाज अनेक चुनौतियों से गुजर रहा है, वीर बाल दिवस हमें ईमानदारी, साहस और मानवीय मूल्यों की रक्षा का संकल्प दिलाता है।
साहिबजादों का जीवन यह सिखाता है कि अन्याय के सामने झुकना नहीं, बल्कि शांत दृढ़ता के साथ सत्य पर अडिग रहना ही वास्तविक विजय है। वीर बाल दिवस भारत की सांस्कृतिक और नैतिक विरासत का उज्ज्वल अध्याय है। यह दिवस हमें उन बाल वीरों को नमन करने का अवसर देता है, जिनका बलिदान सदियों तक प्रेरणा देता रहेगा। उनके आदर्शों को अपनाकर ही हम एक न्यायपूर्ण, साहसी और संवेदनशील समाज का निर्माण कर सकते हैं।
टीम एबीएन, रांची। रांची मेन रोड स्थित रोस्पा टॉवर का स्वामित्व जीईएल चर्च को मिलने के बाद दुकानदारों से नये किराया एग्रीमेंट (जिसमें किराया वृद्धि सहित कई नई शर्तें लगायी जा रही है) की मांग की जा रही है और दुकानदारों द्वारा इसे अस्वीकार करने पर कानूनी कार्रवाई और दुकान खाली करने की कार्रवाई की बात की जा रही है।
फेडरेशन आफ आल व्यापार संगठन की लॉ एंड आॅर्डर कमिटी ने आज माननीय मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप, मध्यस्थता एवं राहत की मांग की है। संगठन के अध्यक्ष दीपेश निराला, उपाध्यक्ष उमाशंकर सिंह, उपाध्यक्ष रेणुका तिवारी, महासचिव सत्येंद्र प्रसाद सिंह, कोषाध्यक्ष बिनोद बेगवानी, कार्यकारिणी सदस्य हरीश नागपाल, शाहिद आलम एवं अन्य ने तत्काल एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर निष्पक्ष जांच करवाकर समुचित कार्रवाई की मांग की है।
टीम एबीएन, रांची। रांची के जगन्नाथपुर मंदिर का स्थापना दिवस 25 दिसंबर को होगा। इस दिन विष्णु लक्षार्चना वार्षिक पूजा होगी, सुबह पांच बजे से ही भगवान जगन्नाथ के दर्शन सुलभ होंगे, सुबह छह बजे आरती होगी, सुबह 8 बजे से 8:30 बजे तक कलश पूजा और विष्णु पूजा होगी।
इसके बाद सुबह 8:30 बजे से 9:15 बजे गणपति हवन और विष्णु गायत्री हवन होगा। सुबह 9:16 बजे से 10 बजे तक पूजा के लिए श्रद्धालुओं के बीच पत्तल एवं फुल वितरण होगा 10 बजे से 11:30 बजे तक विष्णु सहस्त्रनाम पूजा होगी।
दिन के 11:31 बजे से अर्चित फूल भगवान को समर्पित किया जायेगा, दोपहर 12 बजे महाप्रभु को अन्न भोग लगाया जायेगा, दोपहर 12:10 बजे महाप्रभु दर्शन पट बंद कर दिया जायेगा। दोपहर 12:30 बजे से अन्न भोग श्रद्धालुओं के बीच निशुल्क वितरण किया जायेगा।
इसके बाद अपराहन 3 बजे पुन: पट खुलेगा, यह जानकारी जगन्नाथपुर मंदिर न्यास समिति ने दी। समिति की ओर से कहा गया है कि विष्णु सहस्त्रनाम अनुष्ठान में भाग लेने के लिए महिलाओं को साड़ी और पुरुषों को धोती पहन कर आना अनिवार्य है, अन्य किसी परिधान में होने से अनुष्ठान में नहीं बैठ सकते हैं।
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