टीम एबीएन, रांची। राजद विधायक संजय प्रसाद यादव को झारखंड मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का स्वागत करते हुए रांची जिला राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष अध्यक्ष धर्मेंद्र महतो ने संजय प्रसाद यादव को बधाई दी।
मंत्रिमंडल में शामिल किये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए श्री माहतो ने कहा कि उनके जिम्मे जो भी विभाग सरकार निर्धारित करेगी।
उसके निर्धारण में श्री यादव झारखंड की जनता की सेवा में शत प्रतिशत खरा उतरने का प्रयास करेंगे। इस मौके पर कई राजद नेता भी उपस्थित थे। श्री महतो ने फूलों का गुलदस्ता देकर श्री यादव का स्वागत किया।
टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 5/12/2024 को अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) का एक प्रतिनिधिमंडल डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय से मिलकर ज्ञापन सौंपा, जो इस प्रकार है :
कुलपति महोदय ने सभी विषयों को गंभीरता पूर्वक लिया और जल्द ही सभी मांगों को पूरा करने की बात कही। मौके पर प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा, अजित कुमार आशुतोष सिन्हा, आनंद यादव, राजेश सिंह, बबलू मंडल, निशांत, शिवम, दीपक, तारीख़ एवं अन्य लोग उपस्थित थे। उक्त जानकारी अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने दी।
टीम एबीएन, रांची। बांग्लादेश मे रहने वाले हिंदू भाई-बहनो एवं साधु-संतो पर हो रहे अत्याचार के विरोध मे हिंदू समाज द्वारा मोराबादी में धरना- प्रदर्शन के बाद निकाली गयी जन आक्रोश रैली के साथ उपायुक्त कार्यालय में ज्ञापन सौंपा गया।
धरना-प्रदर्शन रैली मे विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू, विहिप सेवा विभाग व राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ, अशोक पुरोहित, वासुदेव भल्ला, मनोज बजाज, मुकेश काबरा, सहित अन्य हजारों सनातनी लोग शामिल हुए।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने मंईयां सम्मान योजना और वृद्ध एवं विधवा पेंशन में कई स्तरों पर गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए राज्य की हेमंत सोरेन सरकार से इन्हें दुरुस्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
मरांडी ने कहा कि वे पिछले दो दिनों से धनवार विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में जनसंपर्क अभियान के दौरान ग्रामीणों से संवाद कर रहे हैं। धनवार प्रखंड के कोड़ाडीह, जगदीशपुर समेत एक दर्जन से भी ज्यादा अन्य गांवों की कई महिलाओं ने अपनी समस्याओं को साझा किया।
महिलाओं ने बताया कि वे मंईयां सम्मान योजना के लाभ से वंचित हैं। कई पात्र महिलाओं के फॉर्म भरे ही नहीं गये हैं, जिसके कारण उन्हें योजना का कोई लाभ नहीं मिल पाया है। मंईयां योजना के लिए चुनी गयी महिलाओं को राशि भुगतान में भी भारी लापरवाही बरती जा रही है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया है कि धनवार विधानसभा क्षेत्र समेत राज्य के दूसरे इलाकों में भी विशेष शिविर का आयोजन कर मंईयां सम्मान योजना से वंचित सभी महिलाओं के फॉर्म भरे जाएं और उन्हें योजना का भुगतान समय से प्रदान किया जाये।
टीम एबीएन, रांची। गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे एचइसी कर्मियों का जहां 28 माह का वेतन बकाया हो गया है। वहीं पिछले एक माह से अस्थायी रूप से नियुक्त किये जा रहे सप्लाई कर्मी अपनी बीमारी को इस उम्मीद में पाल रहे हैं कि उन्हें जल्द से जल्द इएसआइ की सुविधा मिलेगी। जानकारी के अनुसार प्रत्येक दिन औसतन 15 से 20 अस्थायी कर्मी अपना तथा परिजन की बीमारी के इलाज के लिए एचइसी मुख्यालय का चक्कर काट रहे हैं।
कर्मियों का कहना है कि एचइसी वेलनेस सेंटर में सुविधा नगण्य हैं। वहां मरहम-पट्टी भी खुद खरीद कर लाना पड़ता है। ऐसे में गंभीर बीमारी से ग्रस्त कर्मी एमआरआइ, सीटी स्कैन, सीवीसी, लीपिड प्रोफाइल, सिरम क्रिटनीन, थॉयराइड की जांच कहां करायेंगे।
कर्मी पिछले एक माह से प्रबंधन की पहल पर प्लांटों में कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें मेडिकल सुविधा नहीं मिल रही है। हटिया प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन के महामंत्री लीलाधर सिंह ने कहा कि प्रबंधन से इएसआइ सुविधा जल्द बहाल करने की मांग की गयी है।
लेकिन प्रबंधन आर्थिक स्थिति खराब होने की बात कह कर समय ले रहा है। जल्द ही यूनियन का एक प्रतिनिधिमंडल मिलकर प्रबंधन पर दबाव बनायेगा। वहीं एचइसी सप्लाई संघर्ष समिति के मनोज पाठक ने कहा कि इलाज के लिए कई कर्मी इंतजार में हैं।
इएसआइ जल्द लागू होने से उनका इलाज संभव हो सकेगा। हटिया कामगार यूनियन के उपाध्यक्ष लालदेव सिंह ने कहा कि कंपनी एक्ट के तहत अस्थायी कर्मियों को तत्काल इएसआइ की सुविधा मिलनी चाहिए। प्रबंधन यह सुविधा नहीं देकर कर्मियों के साथ न्याय नहीं कर रहा है।
एचइसी में कार्यरत स्थायी कर्मियों की भी मेडिक्लेम की सुविधा नवंबर में समाप्त हो गयी है। जब तक प्रबंधन राशि जमा नहीं करेगा, स्थायी कर्मियों को भी इलाज कराने में परेशानी है। प्रबंधन का कहना है कि जल्द इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाया जायेगा।
टीम एबीएन, रांची। झारखण्ड के कामगारों और श्रमिकों के प्रति संवेदनशील मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की पहल पर एक बार फिर विदेश में फंसे 50 झारखण्डी कामगारों को वापस उनके घर और गांव लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आगामी 11 से 18 दिसंबर तक सभी कामगार के झारखण्ड लौट आयेंगे। इसके लिए जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
झारखण्डी कामगारों के मलेशिया की लीडमास्टर इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन कंपनी में कार्यरत 70 कामगारों के फंसे होने की शिकायत राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष को 24 सितंबर 2024 को प्राप्त हुई। बताया गया कि कामगारों का चार महीने से वेतन लंबित है उन्हें भोजन की अनुपलब्धता और वतन वापसी की समस्याएं सामने आ रहीं हैं।
मामले की जानकारी जब मुख्यमंत्री को हुई तबतक चुनाव हेतु आचारसंहिता लागू हो गया, इसके बाद इनकी वापसी की प्रक्रिया धीमी हो गयी थी, लेकिन चुनाव समाप्त होने और नई सरकार गठन के बाद अब कामगारों के स्वदेश वापसी का रास्ता साफ़ हो गया है। 70 कामगारों में से 50 कामगार झारखण्ड के हैं एवं अन्य दूसरे प्रदेशों के रहने वाले हैं।
जानकारी के अनुसार, सभी कामगारों का अनुबंध के तहत 1,700 मलेशियन रिंगिट (मुद्रा/रुपया) का वेतन तय था, परंतु उन्हें 1,500 रिंगिट ही दिये जा रहे थे, जिसमें भी कटौती हो रही थी। भोजन की सुविधा नहीं दी गई और धमकियां भी मिल रहीं थीं।
इसको लेकर कामगारों ने मलेशिया पुलिस से शिकायत दर्ज भी की। बाद में कामगारों ने इस मामले से संबंधित आवश्यक दस्तावेज एवं आवेदन श्रम विभाग को भेजा। श्रम विभाग के निर्देशानुसार प्रोटेक्टर ऑफ़ एमिग्रांत, रांची को मामला पत्र राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष द्वारा प्रेषित किया गया।
श्रम विभाग के पहल पर भारतीय दूतावास, कुआलालंपुर द्वारा कंपनी एवं कामगारों को दूतावास के कार्यालय बुलाया गया, जहाँ दोनों पक्षों का सत्यापन किया गया, जिसके फलस्वरूप भारतीय दूतावास ने सभी कामगारों को अपने संरक्षण में रखते हुए कंपनी को बकाया भुगतान करने एवं श्रमिकों के भारत वापसी सुनिश्चित कराने को कहा।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, सिल्ली। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा द्वारा सिल्ली विधान सभा चुनाव समीक्षा प्रखंडवार कार्यक्रम आज जोन्हा पंचायत के डहुवा मैदान में गुड़ीडीह, जोन्हा, बरवादाग, टाटी, सुरसू पंचायत के सभी 31 बूथ का समीक्षा बैठक कार्यक्रम के साथ समीक्षा बैठक कार्यक्रम का समापन हुआ।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रत्याशी देवेंद्र नाथ महतो ने हार कारण को स्पष्ट करते सभी त्रुटि को सुधार करते हुए नए ऊर्जा के साथ सिल्ली विधान सभा क्षेत्र के जनता का समस्या का समाधान के लिए सभी कार्यकर्ता को तत्पर रहने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम हार जीत हमारे लिए महत्व नहीं हैं हमारा कर्तव्य है सदैव जनता के हित में संघर्ष करना।
जनता का सेवा सुचारु रूप से जारी रखने के लिए बैठक के माध्यम सर्व सम्मति से पंचायत प्रभारी और सह प्रभारी भी नियुक्त किया गया जो इस प्रकार है जोन्हा पंचायत प्रभारी दिलीप अहीर, सह प्रभारी अजीत उरांव, रमेश मुंडा, गुड़ीडीह पंचायत प्रभारी राजेन्द्र महतो, सह प्रभारी संतोष भोक्ता, चमन भोक्ता, देवानंद महतो बरवादाग पंचायत प्रभारी रमण मुंडा, सह प्रभारी जागेश्वर महतो, सुभाष मुंडा, उपेन्द्र मुंडा।
टाटी पंचायत प्रभारी लखन बेदिया, सह प्रभारी फूल सिंह महतो, वीरेंद्र महतो। सुरसु पंचायत प्रभारी अरविंद बेदिया सह प्रभारी दयाल बेदिया, माही बेदिया, निरंजन रजवार को नियुक्त किया गया। बैठक में अनगड़ा प्रखण्ड के 31 बूथ के बूथ कमिटी पांच पंचायत के अधिकारी पदाधिकारी उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार को निशाने पर लिया। मरांडी ने सोशल मीडिया के माध्यम से मरांडी ने हेमंत सरकार को घेरते हुए बड़ा सवाल किया कि आखिर कब तक जनता परेशान होती रहेगी।
मरांडी ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं में खाली पदों के कारण आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा। राज्य में लोकायुक्त, सूचना आयोग और मानवाधिकार आयोग जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में लंबे समय से पद खाली हैं, जिससे लोगों की अर्जियों पर सुनवाई नहीं हो रही।
उन्होंने कहा कि लोकायुक्त कार्यालय में 2000 से अधिक मामले लंबित हैं। पूर्व लोकायुक्त जस्टिस डीएन उपाध्याय का कार्यकाल जून 2021 में समाप्त हो गया और तब से यह पद खाली है। इसके कारण भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों की सुनवाई ठप हो गई है।
राज्य मानवाधिकार आयोग भी पूरी तरह से बंद है। मानवाधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए इस आयोग में पिछले लंबे समय से अध्यक्ष और सदस्य नहीं हैं जिससे लोग मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में न्याय पाने से वंचित हो रहे हैं।
मरांडी ने कहा कि राज्य महिला आयोग की स्थिति भी बेहद खराब है। महिलाओं की समस्याओं और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए यह आयोग काम करता है, लेकिन अध्यक्ष और सदस्यों के अभाव में शिकायतों की सुनवाई नहीं हो रही।
सूचना आयोग में भी पद खाली रहने के कारण प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता की कमी और सरकार की जवाबदेही कमजोर पड़ रही है, साथ ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। मरांडी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी संवैधानिक संस्थाओं में नियुक्तियां समय पर करने की आवश्यकता पर बल दिया है, लेकिन झारखंड में अभी तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाये गये हैं।
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